पाकिस्तान के रक्षा बजट में कटौती का सच

इस बजट से स्पष्ट है कि ऐसी कोई कटौती वास्तव में सैन्य बजट में की ही नहीं गई जैसा कि इसे मीडिया में प्रचारित किया गया.

News18Hindi
Updated: June 23, 2019, 5:44 PM IST
पाकिस्तान के रक्षा बजट में कटौती का सच
इस बजट से स्पष्ट है कि ऐसी कोई कटौती वास्तव में सैन्य बजट में की ही नहीं गई जैसा कि इसे मीडिया में प्रचारित किया गया.
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Updated: June 23, 2019, 5:44 PM IST
(संतोष के वर्मा)
पाकिस्तान के वर्तमान आर्थिक हालात दिनो-दिन बिगड़ते जा रहे हैं और वह अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष और उसके मित्र देशों के  द्वारा की जाने वाली मदद पर आश्रित हो गया है. ऐसी स्थिति में पाकिस्तान की सरकार अपने खर्चों को कम करने के विषय में गंभीरता से सोच रही है. बजट के कुछ दिन पूर्व सेना ने भी इस मुहिम को अपना सहयोग दिया और ईद के दिन, प्रधानमंत्री इमरान खान ने सशस्त्र बलों के इस फैसले की सराहना की जिसमें सेना ने रक्षा बजट में वृद्धि न करने को ‘स्वैच्छिक सहमति’ दी थी.

इमरान खान ने इस अवसर पर यह भी कहा था कि रक्षा आवंटन से बचे इस धन को खैबर पख्तुन्ख्वा और बलूचिस्तान में आदिवासी क्षेत्रों में विकास के लिए आवंटित किया जाएगा. यह सेना की ओर से सरकार के मितव्ययिता सम्बन्धी उपायों का समर्थन माना गया. हालांकि बाद में सेना के मीडिया विंग, आईएसपीआर द्वारा इस घोषित निर्णय को और स्पष्ट किया गया कि सैन्य बजट में वृद्धि पर रोक केवल एक वर्ष के लिए सेना के  वेतन वृद्धि पर ही लागू होनी थी, और सेनाध्यक्ष जनरल क़मर जावेद बाजवा द्वारा इसकी पुष्टि भी कर दी गई.

बजट के आंकड़ों से सामने आया सच

इस कटौती पर सशस्त्र बलों ने यह स्पष्ट किया कि रक्षा बजट में ये स्वैच्छिक कटौती सेना की रक्षा और सुरक्षा क्षमताओं से समझौता नहीं करेगी. जो कि इस बजट से स्पष्ट है कि ऐसी कोई कटौती वास्तव में सैन्य बजट में की ही नहीं गई जैसा कि इसे मीडिया में प्रचारित किया गया. अगर हम 11 जून को पेश किये गए बजट के आंकड़ों को देखें तो यह स्पष्ट होता है कि इस बजट में रक्षा बजट परिव्यय 1,152 अरब रुपये का रखा गया है जिसमें सशस्त्र बलों के विकास कार्यक्रम के लिए आवंटित 308 अरब और सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों और सैनिकों के लिए पेंशन के लिए 327 अर्ब रुपये शामिल नहीं हैं.

11% की हुई है बढ़ोत्तरी
सशस्त्र बलों के विकास कार्यक्रम में आने वाले वित्त वर्ष के लिए, चालू वित्त वर्ष की तुलना में 98 अरब रुपये यानि लगभग 46% वृद्धि की गई है. इसी के साथ साथ संयुक्त राष्ट्र शांति सेना के लिए 30 अरब रुपये और युद्धग्रस्त जनजातीय जिलों में अस्थायी रूप से विस्थापित व्यक्तियों से जुड़े सुरक्षा खर्चों के लिए सशस्त्र बलों को 65 अरब रुपये अलग से आवंटित किए गए हैं.  वर्ष 2019-20 के लिए सभी आवंटन को देखते हुए रक्षा के लिए आवंटित कुल बजट, 2018-19 के 1,694 अरब रुपये के विपरीत 1,882 अरब रुपये तक आता है, जो बताता है कि इस बार रक्षा बजट में 11% की वृद्धि की गई है .
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पाकिस्तानी सेना को मिली बड़ी भूमिका
वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए बजट दस्तावेज से ज्ञात होता है कि कुल बजट में से 450 अरब रुपये रोजगार संबंधी खर्च के लिए दिए गए हैं .  315 अरब रुपये  हथियारों के आयात और खरीद के लिए, 264.5 अरब रुपये परिचालन व्यय के लिए और 123 अरब रुपये सैन्य सेवाओं के  अंदर  सिविल सेवा के लिए प्रस्तावित किये गये हैं. पाकिस्तान के सैन्य बलों में पाकिस्तानी सेना की सबसे बड़ी भूमिका रही है जो रक्षा बजट में भी दिखाई देती है.



बजट में दिखा बालाकोट एयरस्ट्राइक का डर
इस साल सेना के लिए आवंटन 523 अरब रुपये का आवंटन किया गया है  जो कुल रक्षा आवंटन के 45.4 प्रतिशत है और 2018-19 के स्तर पर ही है. परन्तु पुलवामा पर आतंकी हमले के बाद भारत द्वरा किये गये एयर स्ट्राइक का प्रभाव पाकिस्तान की वायुसेना के लिए बढ़े हुए बजट में साफ़ दिखाई देता है. पाकिस्तान वायु सेना (पीएएफ) का बजट 9.64 प्रतिशत बढ़ा दिया गया है और अब रक्षा आवंटन का 22 प्रतिशत से अधिक हिस्सा वायु सेना को जाएगा. इस बजट में नौसेना पर भी  9.6 प्रतिशत तक की वृद्धि की गई है और रक्षा बजट आवंटन में इसकी हिस्सेदारी 11.3 प्रतिशत हो गई  है. रक्षा प्रतिष्ठान/अंतर-सेवा संस्थानों के बजट में 8.78 प्रतिशत की वृद्धि की गई है उनके पास कुल रक्षा आवंटन में 21 प्रतिशत भाग आता  है.

वित्त विधेयक, 2019 को पेश करते हुए, मंत्री हम्माद अजहर ने कहा कि अगले वित्त वर्ष के दौरान रक्षा बजट 1.15 खरब रुपये पर स्थिर रहेगा और साथ ही इससे रक्षा क्षमता अप्रभावित रहेगी. रक्षा व्यय में हालांकि अप्रत्यक्ष रूप से थोड़ी सी बढ़ोतरी की गई है पर भारत के साथ लगातार तनाव के मद्देनजर उसका इरादा सैन्य बजट में वृद्धि का था.

आर्थिक संकट का प्रत्यक्ष परिणाम आया सामने
पाकिस्तान में पिंक बुक जो बजटीय मांगों का विवरण देती है, ने खुलासा किया कि शुरुआत में सरकार ने रक्षा के लिए रु 1.2 खरब रुपये आवंटित करने जा रही थी पर बजट के तुरंत पहले ही इसे संशोधित कर  1.15 खरब रुपये कर दिया गया, जो पाकिस्तान पर मंडरा रहे आर्थिक संकट का प्रत्यक्ष परिणाम है.

पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल क़मर जावेद बाजवा ने भी कई मौकों पर कहा है कि खर्च में कटौती से सेना की परिचालन तैयारियों में बाधा नहीं आएगी. वित्तीय वर्ष में आने वाले रक्षा बजट में स्वैच्छिक कटौती के बावजूद, सैनिकों के जीवन के सभी प्रकार के खतरे और गुणवत्ता पर तथा हमारी प्रतिक्रिया क्षमता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा.

गिरता जा रहा है पाकिस्तानी रुपया
वर्तमान मूल्यों पाकिस्तानी रुपये की कीमत में पिछले एक साल में 25 प्रतिशत से अधिक की कमी आई है . ऐसी स्थिति में पाकिस्तानी सेना के कर्मचारियों और अधिकारियों के वेतन स्थिर रखने का निर्णय सेना के सिपाहियों और जूनियर कमीशंड अधिकारियों के लिए अधिक कष्टकारी हो सकता है. क्योंकि पाकिस्तान सेना एक समानांतर अर्थव्यवस्था का संचालन कर रही है जिसका आकार बहुत बड़ा है. फौजी फाउंडेशन, बहरिया फाउंडेशन और शाहीन फाउंडेशन जैसे संगठनों की आड़ में पाकिस्तानी सेना के उच्चाधिकारी भारी मात्रा में अवैध धन कमा रहे हैं अत: यह निर्णय पाकिस्तान की जनता की आँखों में धूल झोंकने की तरह है .



रक्षा आयातों को बुरी तरह प्रभावित करने वाली है रुपये की गिरावट
इसके साथ ही साथ पाकिस्तान की सेना को आवंटित विकास कार्यक्रमों के नाम पर लगभग 100 अरब रुपये दे दिए गए हैं और रक्षा सम्बन्धी खरीद और आयात के लिए 315 अरब रुपये आवंटित किये गए हैं. पाकिस्तान का सबसे बड़ा हथियार आपूर्तिकर्ता इस समय चीन है जो उसके कुल आयातों का 42 प्रतिशत (2018 में) उपलब्ध कराता है. चीन के साथ भारत के साथ जिस तरह के सम्बन्ध हैं, वही पाकिस्तान को चीन से हथियारों की आपूर्ति सुनिश्चित करते हैं अन्यथा पाकिस्तान की मुद्रा के मूल्य में तीव्र गिरावट उसके अमेरिका और यूरोपीय देशों से रक्षा आयातों को बुरी तरह से प्रभावित करने वाली है. अगर हम पाकिस्तान के  रक्षा बजट में कटौती की बात करें तो इसमें वास्तविक कमी पाकिस्तान की लगातार बिगड़ती अर्थव्यवस्था और अंतर्राष्ट्रीय कारक लाने वाले हैं जो कहीं अधिक वास्तविक और प्रभावी होगी.

पाकिस्तान का लगातार बढ़ता राजकोषीय घाटा, ऋणों का बढ़ता बोझ पाकिस्तान को दिवालियेपन की ओर ले जा रहे हैं. अभी हाल ही में फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स ( FATF) ने पाया कि आतंकवाद रोकने के लिए आवश्यक 27 बिंदुओं के एक्शन प्लान में से 25 में असफल रहा. ये सभी कार्रवाई बिंदु, पाकिस्तान को लश्कर और आतंकी संगठन जैसे जमात-उद-दावा(JuD)और फलाह-ए-इन्सानियत फाउंडेशन जैसे आतंकी समूहों को फंडिंग की जांच करने के लिए दिए गए थे.

FATF ने बढ़ाईं और भी मुश्किलें
फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की इस कार्रवाई ने पाकिस्तान की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं. क्योंकि फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की इस कार्रवाई के बाद अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF), विश्व बैंक(World Bank) और यूरोपीय संघ (EU) जैसे संस्थान पाकिस्तान को डाउनग्रेड करेंगे, जिससे उसकी आर्थिक स्थिति और खराब होने की संभावना है.

गौरतलब है कि अभी पाकिस्तान FATF की ग्रे लिस्ट में शामिल है और कहीं यह ब्लैक लिस्ट में चला जाता है तो आने वाला समय बड़ा भीषण हो सकता है. इससे पाकिस्तान का अनेक देशों से रक्षा एवं सामरिक सहयोग पूर्ण रूप से समाप्त हो सकता है जो पाकिस्तान के लिए बड़ा आघात साबित हो सकता है. वास्तव में पाकिस्तान को अपने आर्थिक संकट से सबसे बड़ा ख़तरा है, भारत से नहीं , जो कि उसके अस्तित्व को वैध सिद्ध करने के लिए एक बहाना बन चुका है.

(लेखक कश्मीर यूनिवर्सिटी में रिसर्च फेलो हैं. ये उनके निजी विचार हैं.)

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First published: June 23, 2019, 5:11 PM IST
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