पाकिस्तान को बहला रहा तुर्की, कहा- कश्मीर मुद्दे में देगा साथ, दोनों देशों का एक ही लक्ष्य

पाकिस्तान को बहला रहा तुर्की, कहा- कश्मीर मुद्दे में देगा साथ, दोनों देशों का एक ही लक्ष्य
पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी और तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगान (फाइल फोटो)

तुर्की इससे पहले भी कई बार पाकिस्तान (Pakistan) को इस तरह का आश्वासन दे चुका है. लेकिन पाकिस्तान इस बात से वाकिफ है कि पूरी दुनिया भारत के साथ खड़ी है और एक-दो देशों का समर्थन उसके लिए कोई मायने नहीं रखता.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 2, 2020, 8:19 PM IST
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तुर्की. पाकिस्तान हर दिन कश्मीर (Kashmir) को पाने का ख्वाब देखता है, लेकिन भारत उसके ख्वाब को पूरा नहीं होने देता. लेकिन अब पाकिस्तान (Pakistan) को इसके लिए तुर्की का भी साथ मिल रहा है. तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगान ने पाकिस्तानी समकक्ष आरिफ अल्वी और प्रधानमंत्री इमरान खान से फोन पर बात करते हुए भरोसा दिलाया कि उनका देश कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान के साथ खड़ा है. बता दें, तुर्की इससे पहले भी कई बार पाकिस्तान को इस तरह का आश्वासन दे चुका है. लेकिन पाकिस्तान इस बात से वाकिफ है कि पूरी दुनिया भारत के साथ खड़ी है और एक-दो देशों का समर्थन उसके लिए कोई मायने नहीं रखता.

पाकिस्तान के प्रमुख अखबार 'डॉन' के अनुसार, तुर्की के राष्ट्रपति ने ईद के मौके पर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री इमरान खान से फोन पर बात कर कई मुद्दों पर चर्चा की. पाकिस्तानी राष्ट्रपति के दफ्तर की ओर से ट्वीट किया गया, 'राष्ट्रपति आरिफ अल्वी और राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगान के बीच ईद-उल-अजहा के अवसर पर फोन पर बात करते हुए एक दूसरे को मुबारकबाद दी. कश्मीर और कोविड-19 जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हुई. पाकिस्तान UNGA से पहले राष्ट्रपति एर्दोगान के स्पष्ट बयान की तारीफ करता है.'
एक अन्य ट्वीट में अल्वी ने कहा, 'तुर्की के राष्ट्रपति ने भरोसा दिया कि उनका देश कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान के स्टैंड का समर्थन करेगा क्योंकि भाई-भाई जैसे दोनों देशों के लक्ष्य एक हैं.' पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के दफ्तर की ओर से भी इन बातों को दोहराया गया है.

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पिछले साल भारत ने खत्म किया था अनुच्छेद 370
बता दें, पिछले साल 5 अगस्त को मोदी सरकार ने कश्मीर से अनुच्छेद 370 को खत्म कर दिया था. और इस बार उसकी पहली वर्षगांठ है. भारत के इस फैसले का पाकिस्तान ने जमकर विरोध किया था. इसके लिए पाकिस्तान ने कई देशों से संपर्क किया, लेकिन सभी ने उसे यह कहकर लौटा दिया कि यह भारत का अंदरुनी मामला है, पाकिस्तान सरकार ने कई बार इसे स्वीकार भी किया कि वह इस मुद्दे पर अलग-थलग पड़ चुका है,
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