Coronavirus: डेल्टा वेरिएंट के खिलाफ असरदार हैं फाइजर और एस्ट्राजेनेका के दो डोज, UK की स्टडी में खुलासा

फाइजर का एक डोज 36 फीसदी और एस्ट्राजेनेका की 30 प्रतिशत प्रभावी था. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Shutterstock)

Covid-19 Vaccine Update: न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित स्टडी में पता चला है कि डेल्टा वेरिएंट के चलते हुई लक्षणों वाली बीमारी में फाइजर (Pfizer) के दो डोज 88 फीसदी तक प्रभावी हैं. जबकि, अल्फा वेरिएंट के मामले में यह आंकड़ा 93.7 प्रतिशत था.

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    लंदन. कोरोना वायरस (Coronavirus) के डेल्टा वेरिएंट (Delta Variant) के बढ़ते कहर के बीच अच्छी खबर है. फाइजर और एस्ट्राजेनेका (AstraZeneca) के दो डोज अल्फा की तरह डेल्टा वेरिएंट पर भी उतने प्रभावी हैं. इस बात की जानकारी बुधवार को प्रकाशित हुई एक स्टडी से मिली है. अधिकारियों का कहना है कि डेल्टा के खिलाफ ये टीके असरदार हैं. जबकि, स्टडी में भी यह पता चला है कि बेहतर सुरक्षा के लिए एक डोज पर्याप्त नहीं है.

    न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित स्टडी में पता चला है कि डेल्टा वेरिएंट के चलते हुई लक्षणों वाली बीमारी में फाइजर के दो डोज 88 फीसदी तक प्रभावी हैं. जबकि, अल्फा वेरिएंट के मामले में यह आंकड़ा 93.7 प्रतिशत था. एस्ट्राजेनेका के दो डोज डेल्टा के खिलाफ 67 फीसदी और अल्फा वेरिएंट के खिलाफ 74.5 प्रतिशत प्रभावी हैं.

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    इजरायल से मिला डेटा इस बात के संकेत देता है कि लक्षणों वाली बीमारी के खिलाफ फाइजर के डोज का प्रभाव कम है. हालांकि, गंभीर बीमारी के मामले में यह काफी असरदार है. पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड ने पहले कहा था कि किसी भी वैक्सीन का पहला डोज डेल्टा वेरिएंट से होने वाली बीमारी के खिलाफ 33 प्रतिशत प्रभावी है. वहीं, बुधवार को प्रकाशित स्टडी के आंकड़े बताते हैं कि फाइजर का एक डोज 36 फीसदी और एस्ट्राजेनेका का पहला डोज 30 प्रतिशत प्रभावी था.

    वैक्सीन का दूसरा डोज है अहम
    हाल ही में स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं ने फाइजर की कोविड-19 वैक्सीन से तैयार होने वाली इम्यून प्रतिक्रिया की जानकारी जुटाई थी. शोधकर्ताओं के अनुसार, कोविड-19 वैक्सीन का दूसरा डोज इम्यून सिस्टम के उस हिस्से की ताकत बढ़ाती है, जो बड़े स्तर पर एंटीवायरल सुरक्षा देता है. स्टेनफोर्ड मेडिसिन की तरफ से जारी प्रेस रिलीज में कहा गया है कि स्टडी इस बात का समर्थन करती है कि दूसरा डोज छोड़ा नहीं जाना चाहिए.

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