अंटार्कटिका से बर्फ का पहाड़ खींचकर लाएगा यूएई, पेयजल संकट होगा दूर

यूएई इस योजना पर करीब साढ़े तीन अरब रुपये खर्च करेगी. अगर योजना सफल हो जाती है तो इससे देश को कम बारिश की समस्या से भी निजात मिल सकती है.

News18Hindi
Updated: June 22, 2019, 11:03 AM IST
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Updated: June 22, 2019, 11:03 AM IST
पीने के पानी की समस्या से निपटने के लिए संयुक्त संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) अनोखा तरीका अपना रहा है. यूएई की एक कंपनी अंटार्कटिका से बर्फ का एक विशाल पहाड़ खींचकर देश के तटीय क्षेत्र तक लाने की योजना पर काम कर रही है. बता दें कि इस प्रक्रिया में बर्फ के पहाड़ को तकरीबन 12,000 किमी की दूरी तय करनी होगी. यूएई इस योजना पर करीब साढ़े तीन अरब रुपये खर्च करेगी. जानकारों का कहना है कि अगर यूएई की यह योजना सफल हो जाती है तो इससे देश को पेयजल संकट के साथ ही कम बारिश की समस्या से भी निजात मिल सकती है.

2020 तक यूएई के तटीय क्षेत्र तक लाने की है योजना 

योजना पर काम कर रही कंपनी नेशनल एडवाइजर ब्यूरो लमिटेड का कहना है कि एक बड़े आइसबर्ग में औसतन 20 अरब गैलन पानी होता है, जिससे पांच साल तक 10 लाख लोगों की प्यास बुझ सकती है. गल्फ न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, ‘यूएई आइसबर्ग प्रोजेक्ट’ के तहत यूएई के तट पर विशालकाय आइसबर्ग की मौजूदगी से शुष्क भूमि पर ज्यादा बारिश की उम्मीद बढ़ेगी. कंपनी 2020 तक आइसबर्ग को यूएई के तटीय क्षेत्र तक लाने की योजना बना रही है.

जलवायु परिवर्तन और बारिश की भी बढ़ेगी उम्मीद 

कंपनी के मुताबिक, आइसबर्ग के आसपास के क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन की संभावना रहती है. खींचकर लाया जाने वाला आइसबर्ग अरब सागर के ऊपर बादलों को आकर्षित करेगा. इससे एक भंवर पैदा होगा, जो बारिश कराएगा. इससे क्षेत्र में स्वच्छ जल उपलब्ध कराने में भी मदद मिलेगी और यूएई दुनिया को जलापूर्ति करने वाला केंद्र भी बन सकता है. दक्षिणी ध्रुव स्थित हर्ड आइसलैंड से आइसबर्ग को कई जहाज खींचकर 12 हजार किमी दूर फुजेराह के तट पर ले जाएंगे.

खास तकनीक से रास्ते में ज्यादा नहीं पिघलेगी बर्फ 

अरेबियन बिजनेस डॉट कॉम की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी एक खास तकनीक का इस्तेमाल कर इस परियोजना की लागत में कमी लाएगी. साथ ही अंटार्कटिका से यूएई की यात्रा के दौरान आइसबर्ग की बर्फ कम पिघलेगी और ग्राहकों को कम कीमत में पानी उपलब्ध कराया जाएगा. कंपनी ने इस तकनीक के पेटेंट के लिए ब्रिटेन में आवेदन कर दिया है. इसके लिए कंपनी एक समिति गठित कर रही है, जिसमें अंटार्कटिका, आइसबर्ग और समुद्र विज्ञान के क्षेत्र में महारत रखने वाले वैज्ञानिकों को शामिल किया जा रहा है. साथ ही जल अनुसंधान केंद्रों और दुनिया भर के विश्वविद्यालयों से भी सहयोग मांगा गया है.
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First published: June 21, 2019, 5:45 AM IST
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