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UN की रिपोर्ट में दावा- तेजी से पिघल रहे ग्लेशियर से दुनिया में बाढ़ का खतरा

News18Hindi
Updated: September 25, 2019, 11:49 PM IST
UN की रिपोर्ट में दावा- तेजी से पिघल रहे ग्लेशियर से दुनिया में बाढ़ का खतरा
ग्लेशियर का फाइल फोटो.

संयुक्त राष्ट्र (United Nations) की लैंडमार्क रिपोर्ट (Landmark report) में कहा गया है कि बढ़ते वैश्विक तापमान (Global Warming) के कारण ग्लेशियर (Glacier) तेजी से पिघल रहे हैं. इससे साल 2100 में समुद्र (Sea) का तल एक मीटर तक बढ़ सकता है और दुनिया के सामने बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है.

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संयुक्त राष्ट्र संघ. वैश्विक जलवायु परिवर्तन (Global Climate Change) को लेकर जहां एक ओर दुनिया भर के नेता समाधान खोज रहे हैं. वहीं संयुक्त राष्ट्र (United Nations) ने एक रिपोर्ट जारी कर दुनिया को आगाह किया है. रिपोर्ट में बढ़ते वैश्विक तापमान (Global Warming) के कारण पिघल रहे ग्लेशियर (Glacier) और बढ़ते समुद्र तल पर चिंता जाहिर की गई है.

संयुक्त राष्ट्र (United Nations) की "इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज" (IPCC) ने अपनी लैंडमार्क रिपोर्ट (Landmark report) में पिघल रहे ग्लेशियर (Glacier) से बढ़ते समुद्र तल के बारे दुनिया को आगाह किया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया भर में बढ़ते तापमान के कारण ग्लेशियर जिस गति से पिघल रहे हैं, उससे वर्ष 2100 में समुद्र (Sea) का तल 1 मीटर तक बढ़ सकता है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि हिमालय (Himalaya) और अंटार्टिका (Antarctica) में बर्फ तेजी से पिघल रही है. इससे पानी में रहने वाली मछलियां और अन्य जीव मर रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि अगर इसी तेजी से ग्लेशियर पिघलते रहे तो न्यूयार्क (New york) और संघाई (Sanghai) जैसे शहरों में बाढ़ का खतरा पैदा हो जाएगा. "इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज" (IPCC) की लैंडमार्क रिपोर्ट (Landmark report) के अनुसार ग्रीनहाउस (Greenhouse) गैसों के उत्सर्जन के कारण वैश्विक तापनाम बढ़ रहा है और ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं.

सौ से अधिक वैज्ञानिकों ने तैयार की रिपोर्ट

आईपीसीसी (IPCC) के वाइस चेयरमैन बैरेट के अनुसार "बदलते जलवायु और महासागर" विषय 36 देशों (Countries) के 100 से अधिक वैज्ञानिकों ने मिलकर यह रिपोर्ट तैयार की है. उन्होंने कहा कि आईपीसीसी की अक्टूबर तक की खास तीन रिपोर्टों में यह एक है. इस रिपोर्ट में 2030 तक ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) को 1.5 % से नीचे रखने के सुझाव दिए गए हैं.

यह रिपोर्ट सबसे अलग है
आईपीसीसी के वाइस चेयरमैन बैरेट ने कहा कि यह रिपोर्ट (Report) सबसे अलग है, क्योंकि पहली बार आईपीसीसी ने इतने बड़े पैमाने पर पृथ्वी में सबसे दूर ध्रुवीय क्षेत्रों के पहाड़ों और गहरे सागरों के बारे में गहन शोध कर बड़ी रिपोर्ट सौंपी हैं. उन्होंने बताया कि रिपोर्ट में पता चला है कि इंसानों के कारण ही वैश्विक जलवायु परिवर्तन (Global Climate Change) हो रहा है. उन्होंने कहा कि इसके अलावा मौसम परिवर्तन के दूसरे और भी कारण हो सकते हैं. जैसे कि समुद्र स्तर का बढ़ना, लेकिन इसे रोका नहीं जा सकता.भविष्य में घातक हो सकते हैं परिणाम
भविष्य में इसके वास्तविक परिणाम (Actual Result) क्या होंगे इसके बारे में कहा नहीं जा सकता. जलवायु परिवर्तन के कारण पहले भी मनुष्य को काफी नुकसान उठाना पड़ा है. भविष्य में ना जाने कितने नुकसान उठाने पड़ें. उन्होंने कहा कि अगर मनुष्य जीवाश्म ईंधन पर वैश्विक अर्थव्यवस्था की निर्भरता को समाप्त करने के लिए तेजी से कदम उठाये तो इसके कुछ साकारात्मक परिणाम सामने आ सकते हैं.

दुनिया के जलमग्न होने की आहट
रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक जलवायु परिवर्तन (Global Climate Change) के कारण एक दिन दुनिया जलमग्न हो सकती है. यह रिपोर्ट बताती है कि आने वाले समय में नाटकीय ढंग से जलवायु में परिवर्तन हो सकता है. रिपोर्ट बताती है कि वैश्विक तापमान बढ़ने के कारण ग्रीनलैंड से अंटार्टिका तक के ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं. इससे साल 2100 में समुद्र का सतह 1 मीटर तक बढ़ सकता है. इसके कारण दुनिया जलमग्न होने की ओर बढ़ जाएगी.

ग्रीनलैंड़ में तेजी से पिघल रही है बर्फ की परत
रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्रीनलैंड़ में बर्फ की परत अकेले समुद्र स्तर को 20 मीटर तक बढ़ा सकती है. यह परत 2006 से 2015 के बीच 275 गीगाटन पिघल चुकी है. 2007 से 2016 के बीच अंटार्टिका में बर्फ की परत तेजी से पिघली है. विशेषज्ञों ने कहा कि जिस रफ्तार से अंटार्टिका में बर्फ की परत पिघल रही है, इससे साल 2100 में समुद्र की सतह 3 फीट तक बढ़ जाएगी.

68 करोड लोगों के सामने बाढ़ का खतरा
वैज्ञानिकों ने कहा कि अगर ऐसे ही बर्फ की परत पिघलती रही तो 2050 में दुनिया भर में समुद्र तटीय क्षेत्रों में रहने वाले 680 मिलियन (68 करोड) लोगों को बाढ़ का सामना करना पड़ेगा. रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके कारण तटीय देशों के मौसम में बदलाव आ जाएगा और उन्हें बाढ़ जैसी आपदाओं से जूझना पड़ेगा.

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First published: September 25, 2019, 9:14 PM IST
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