UN चीफ एंटोनियो गुटरेस का CAA पर बेतुका बयान-'किसी की नागरिकता नहीं जानी चाहिए'

UN चीफ एंटोनियो गुटरेस का CAA पर बेतुका बयान-'किसी की नागरिकता नहीं जानी चाहिए'
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंतोनियो गुतारेस

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत यात्रा के ऐन पहले यूएन महासचिव ने भारत के अंदरूनी मामले में इस तरह की टिप्पणी की है

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  • Last Updated: February 20, 2020, 6:44 PM IST
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पाकिस्तान (Pakistan) के दौर पर पहुंचे संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटरेस (Antonio Guterress) ने भारत के आंतरिक मामले में टिप्पणी की है. पाकिस्तान में एक इंटरव्यू में उन्होंने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) की वजह से भारतीय मुसलमानों की नागरिकता पर चिंता जताई है. गुटरेस ने सीएए (CAA) पर चिंता जताते हुए कहा कि जब भी नागरिकता कानून में बदलाव होता है तो यह सुनिश्चित होना चाहिए कि इससे किसी की नागरिकता न जाए. इसके लिए सब कुछ करना जरूरी होता है. कोई भी देश विहीन न हो.

एंटोनियो गुटरेस इससे पहले कश्मीर पर अपनी विवादित टिप्पणी कर चुके हैं. उन्होंने कश्मीर पर मध्यस्थता की पेशकश की थी जिसे कि भारत ने ठुकरा दिया था. लेकिन पाकिस्तान की सरहद में उन्होंने सीएए और एनआरसी को लेकर बेतुका बयान दिया है. उन्होंने भारत के तकरीबन 20 लाख मुसलमानों की नागरिकता पर खतरा बताया.

पाकिस्तान की सरहद में बैठे गुटरेस ये भूल गए कि वहां के धार्मिक उत्पीड़न के शिकार अल्पसंख्यकों के ही लिए भारत ने नागरिकता संशोधन कानून पास किया है और इस कानून में ऐसा कोई भी प्रावधान नहीं है जिससे कि भारत में रहने वाले किसी मुसलमान की नागरिकता को खतरा हो. जबकि ये कानून खासतौर पर पड़ौसी देशों में धार्मिक प्रताड़ना के शिकार लोगों को भारत की नागरिकता देने के लिए बनाया गया है. इसके बावजूद गुटरेस ने कहा कि इस तरह के कानूनों से नागरिकता जाने का खतरा पैदा होता है. गुटरेस की ये टिप्पणी CAA और NRC पर उनकी सतही जानकारी और गंभीर अज्ञानता को ही साबित करती है.



इससे पहले कश्मीर पर मध्यस्थता की पेशकश कर गुटरेस ने भारत के अंदरूनी मामले में दखल देने की कोशिश की थी. तीन दिवसीय पाक दौरे के दौरान इस्लामाबाद में उन्होंने कहा था कि वह कश्मीर के हालात को लेकर चिंतित हैं और लंबे समय से अटके इस मुद्दे के समाधान के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता के लिए तैयार हैं. लेकिन भारत ने उनकी मध्यस्थता की पेशकश को ठुकराते हुए कहा था कि जरूरी ये है कि पाकिस्तान द्वारा अवैध तरीके से और जबरन कब्जे किए गए इलाकों को खाली कराया जाए.
खास बात ये है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत यात्रा के ऐन पहले यूएन महासचिव ने भारत के अंदरूनी मामले में इस तरह की टिप्पणी की है.
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