संयुक्त राष्ट्र महासचिव बोले- कोरोना के खिलाफ जंग लड़ रही है दुनिया, सभी तक हो जरूरी वस्तुओं की पहुंच

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुतारेस (फाइल फोटो)

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुतारेस (फाइल फोटो)

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कोरोना काल की तुलना युद्ध के समय से की है. एक बयान में गुटेरेश ने कहा कि विश्व कोरोना के खिलाफ 'युद्ध लड़' रही है.

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संयुक्त राष्ट्र. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश (Antonio Guterres) ने कोरोना काल की तुलना युद्ध के समय से की है. एक बयान में गुटेरेश ने कहा कि विश्व कोरोना के खिलाफ 'युद्ध लड़' रही है. उन्होंने कहा कि इस महामारी से लड़ने के लिए 'जरूरी हथियार' तक सभी की समान रूप से पहुंच हो. संयुक्त राष्ट्र के अनुसार गुटेरेश ने विश्व स्वास्थ्य ऐसेम्बली को सम्बोधित करते हुए कहा है कि 'कोविड-19 महामारी, अपने साथ पीड़ा की एक सुनामी लाई है.' उन्होंने मौजूदा संकट से निपटने के लिये, विश्व नेताओं से कोरोनावायरस वैक्सीन, परीक्षण और उपचार की न्यायसंगत सुलभता को सुनिश्चित करने वाली एक वैश्विक योजना के साथ तत्काल आगे बढ़ने का आह्वान किया है.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने कहा कि हम ऐसी स्थिति का सामना कर सकते हैं कि अमीर देश टीकाकरण करके अपने अर्थव्यवस्था के दरवाजे खोल लेंगे जबकि गरीब देशों में संक्रमण का चक्र जारी रहेगा. उन्होंने चेतावनी दी कि दुनिया के धनी हिस्सों में तेजी से टीकाकरण शुरू करने के बावजूद संकट खत्म नहीं होगा. बता दें भारत, ब्राजील समेत दुनिया में3.4 करोड़ लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं अमेरिका, ब्रिटेन और इजराइल जैसे समृद्ध देशों में वैक्सीनेशन के बाद इकॉनमी खुलने की ओर है.

सबसे कमजोर सबसे अधिक पीड़ित- गुटेरेश

गुटेरेश ने खतरों पर जोर देते हुए कहा  - 'सबसे कमजोर सबसे अधिक पीड़ित हैं, और मुझे डर है कि यह खत्म नहीं हुआ है. कोरोना के मामलों में और बढ़ोत्तरी के चलते  सैकड़ों लोगों की जिन्दगी खतरे में पड़ सकते हैं. इसके साथ ही आर्थिक तौर पर दुनिया धीरे-धीरे उबरेगी.


उन्होंने कहा, 'हमारा लक्ष्य वैक्सीन निर्माण क्षमता को कम से कम दोगुना करना चाहिए. इसके लिए स्वैच्छिक लाइसेंस और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण से लेकर पेटेंट पूलिंग और बौद्धिक संपदा अधिकारों को लचीला करने पर बात होनी चाहिए.' उन्होंने कहा 'दुनिया को मौजूदा व्यवस्था को बदलने के लिए बड़े स्तर पर राजनीतिक प्रतिबद्धता की आवश्यकता है.'

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