अपने सीवेज में कोरोना वायरस की मौजूदगी जांच रहा है ब्रिटेन, जानें वजह

ब्रिटेन की रहा है सीवेज की जांच. (File pic)

Coronavirus: ब्रिटेन (UK) के स्‍वास्‍थ्‍स विभाग के अनुसार इस तरह की जांच को बढ़ाया जा रहा है ताकि दो-तिहाई जनसंख्‍या को कवर किया जा सके.

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    नई दिल्‍ली. देश-विदेश में कोरोना वायरस (Coronavirus) लगातार कहर बरपा रहा है. इस जानलेवा वायरस के नए-नए वैरिएंट (Corona Variants) सामने आने से खतरा और अधिक बढ़ गया है. ऐसे में कोरोना वायरस (Covid 19) से निपटने के लिए तमाम शोध किए जा रहे हैं. इस बीच ब्रिटेन (United Kingdom) अपने यहां कोरोना वायरस की मौजूदगी के लिए सीवेज की जांच कर रहा है. ब्रिटेन सीवेज में कोरोना वायरस और उसके वैरिएंट की मौजूदगी जानने के लिए शोध कर रहा है.

    ब्रिटेन के स्‍वास्‍थ्‍स विभाग के अनुसार इस तरह की जांच को बढ़ाया जा रहा है ताकि दो-तिहाई जनसंख्‍या को कवर किया जा सके. सीवेज की जांच के लिए एक्‍जर्टर में एक प्रयोगशाला बनाई गई है. यह वेस्‍ट वॉटर या सीवेज की जांच कर रही ऐसी दुनिया की सबसे बड़ी प्रयोगशालाओं में से एक है.

    गंदे पानी की जांच क्‍यों?
    एक साल पहले ऑस्‍ट्रेलिया के शोधकर्ताओं ने एक ऐसा सर्विलांस सिस्‍टम बनाया था, जो सीवेज में मौजूद वायरस के जीन की पहचान करके कम्‍युनिटी ट्रांसमिशन की चेतावनी पहले ही देने में सक्षम है. ऐसा इसलिए संभव हुआ था क्‍योंकि कोरोना से पीड़ित कुछ लोगें के मल-मूत्र में यह वायरस पाया गया था.

    इस तरह की जांच के तरीके से यह पता लगाने में मदद मिलती है कि यह जानलेवा बीमारी कम्‍युनिटी में कितने बड़े स्‍तर पर फैलती है. सैंपल में कोरोना वायरस की पहचान करने और उसकी संख्‍या का पता लगाने से यह जानकारी मिल सकती है कि उस इलाके में कोरोना वायरस का प्रसार कितना है.

    इस जानकारी के बाद अफसरों या सरकार को उस तय इलाके में कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए उठाए जाने वाले कदमों में मदद मिलती है. इससे वह जांच भी बढ़ा देते हैं. ताकि कोविड 19 से निपटा जा सके. जिन इलाकों में कोरोना टेस्टिंग संभव नहीं होती वहां भी इस तरीके से कोरोना वायरस का पता लगाकर उससे निपटने के कदम उठाए जा सकते हैं.

    जैसे इंग्‍लैंड के ल्‍यूऑन बॉरो काउंसिल के गंदे पानी की जांच करके यह पता लगाया गया था कि वहां कम्‍युनिटी ट्रांसमिशन का कोई केस नहीं था, बल्कि वहां व्‍यक्ति से व्‍यक्ति में फैले केस आ रहे थे. ब्रिटेन में अब शोधकर्ता खासकर कोरोना के विभिन्‍न वैरिएंट के प्रसार को लेकर जांच कर रहे हैं. इनमें दक्षिण अफ्रीका और भारत में पाया गया कोरोना का वैरिएंट भी है.

    पूरे देश के करीब 500 अलग-अलग स्‍थानों से गंदे पानी के सैंपल लेने के बाद उन्‍हें एक्‍जर्टर लैब में भेजा जाता है. वहां वैज्ञानिक उस पानी की जांच करते हैं और उसमें कोरोना वायरस की मात्रा का आकलन करते हैं. इसके बाद इनमें से कुछ सैंपल को दूसरी लैब में भेजा जाता है, जहां सीक्‍वेंसिंग के जरिये विभिन्‍न वैरिएंट का पता लगाया जाता है.