'सैनिकों ने मां की निकाली आंखें, बेटी का किया गैंगरेप और पिता का काटा सिर'

संयुक्त राष्ट्र आयोग ने शुक्रवार को दक्षिण सूडान के पांच साल के गृहयुद्ध पर ताजा रिपोर्ट जारी किया. इस रिपोर्ट में इस उम्मीद के साथ कि एक दिन न्याय जरूर मिलेगा, पागक शहर के भयावह दिनों के साथ-साथ दूसरे चीजों को भी शामिल किया गया है.

News18Hindi
Updated: February 24, 2018, 8:44 AM IST
'सैनिकों ने मां की निकाली आंखें, बेटी का किया गैंगरेप और पिता का काटा सिर'
दक्षिण सूडान का एक चाइल्स सोल्जर Image: AP
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Updated: February 24, 2018, 8:44 AM IST
दक्षिण सूडान में स्थिति काफी भयावह हो चुकी है. हर तरह भय और दर्द का बोलबाला है.  एक घटना में सैनिकों ने एक महिला को अंधा कर दिया गया क्‍योंकि उसने अपनी 17 साल की बेटी को रेप से बचाने की कोशिश की थी. सैनिकों ने भाले से उनकी आंखें निकाल ली थीं. इसके बाद  17 सैनिकों ने उसकी बेटी के साथ बलात्कार किया. इतना ही नहीं लड़की के पिता का सिर भी सैनिकों ने काट डाला.

संयुक्त राष्ट्र आयोग ने शुक्रवार को दक्षिण सूडान के पांच साल के गृहयुद्ध पर ताजा रिपोर्ट जारी की. इस रिपोर्ट में पागक शहर के भयावह दिनों के साथ-साथ दूसरे चीजों को भी शामिल किया गया है. आयोग के एक सदस्य और अंतर्राष्ट्रीय कानून के प्रोफेसर एंड्रयू कैपहम ने मीडिया को बताया कि मैंने उम्मीद नहीं की थी कि कई कारणों से जानबूझकर इस हद तक धार्मिक अपमान और नीच हरकत की जाएगी. ये क्रूरता और दर्द किसी की भी कल्पना से परे है.

रिपोर्ट में ऊपर बताई गई घटनाओं के अलावा कई दूसरी क्रूर घटनाओं का भी जिक्र है. दक्षिण सूडान की एक महिला ने आयोग को बताया कि उसके 12 साल के बेटे को जिंदा रहने के लिएअपनी दादी के साथ सेक्स करने को मजबूर किया गया.

रिपोर्ट में पाया गया कि राष्ट्रपति साल्वा की सरकार के सैनिकों और विद्रोहियों दोनों के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं. रिपोर्ट में 40 से अधिक वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों जिसमें 3 गवर्नर भी शामिल है, की पहचान की गई है जो व्यक्तिगत तौर पर वार क्राइम की जिम्मेदारी ले सकते हैं.

इस रिपोर्ट को जेनेवा में अगले महीने होने वाले यूएन ह्यूमन राइट काउंसिल में पेश किया जाएगा. इसके अलावा इसे दक्षिण सूडान के लिए न्यायिक तंत्र जैसे हाइब्रिड कोर्ट के लिए भी उपलब्ध कराया जाएगा.

सूडान की आजादी के महज 2 साल बाद ही दिसंबर 2013 से हो रहे संघर्ष में अनगिनत लोग मारे जा चुके हैं. 24 साल पहले रवांडन नरसंहार के बाद से दो लाख से अधिक लोग देश छोड़ कर भाग चुके हैं. लाखों लोग जिन्होंने अभी भी घर नहीं छोड़ा है वो भुखमरी की समस्या से जूझ रहे हैं.

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