महिलाओं पर यूएन की रिपोर्ट: दुनिया के इतने फीसदी लोग बीवी की पिटाई को सही ठहराते हैं

महिलाओं पर यूएन की रिपोर्ट: दुनिया के इतने फीसदी लोग बीवी की पिटाई को सही ठहराते हैं
लॉकडाउन में बढ़ी घरेलू हिंसा की घटनाएं (प्रतीकात्मक चित्र)

यूएन (UN) की एक रिपोर्ट के मुताबिक आज के जमाने में भी 28 फीसदी लोग बीवी की पिटाई को सही ठहराते हैं..

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महिलाओं के अधिकार (Women Rights) और उनके हक के लिए पूरी दुनिया में आवाज उठ रही है. महिला सशक्तिकरण (Women empowerment) के लिए तमाम उपाय किए जा रहे हैं. जेंडर इक्वैलिटी पूरी दुनिया में बहस का बड़ा मुद्दा है. लेकिन ऐसा लग नहीं रहा है कि हालात ज्यादा बदले हैं.

यूएन (United Nations) की एक रिपोर्ट बताती है कि तमाम कोशिशों के बावजूद भी हमारी दुनिया कितनी सेक्सिएस्ट है. इस रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया का हर 10 में से 9 आदमी महिलाओं को लेकर पूर्वाग्रह से ग्रस्त है. वो अभी भी महिलाओं को अपने बराबर मानने को तैयार नहीं है. हर 10 में से 9 आदमी महिलाओं को कमतर मानता है.

यूएन की इस रिपोर्ट का कहना है कि हर 10 में से 9 आदमी ये सोचता है कि यूनिवर्सिटी की पढ़ाई पुरुषों के लिए ज्यादा अहम है. इसी तरह से इनलोगों का ये भी मानना है कि पुरुषों को महिलाओं की तुलना में जॉब की जरूरत ज्यादा है. यूएन की ये रिपोर्ट चौंकाने वाली है. एक तरफ महिलाएं अपने अधिकार के लिए मुखर होकर सामने आई हैं तो दूसरी तरफ उनके लिए रवैये में कोई खास परिवर्तन नहीं देखने को आ रहा है. पुराने जमाने की तरह अब भी महिलाओं को पैर की जूती समझने वालों की संख्या कम नहीं है.



राजनीति से लेकर बिजनेस तक में पुरुषों का दबदबा
पुरुष और पुरुषवादी मानसिकता हर जगह हावी है. यहां तक कि कुछ महिलाओं की सोच भी इसी दिशा में काम करती है. यूएन की रिपोर्ट कहती है कि दुनिया की करीब आधी आबादी, जिसमें महिला और पुरुष दोनों शामिल हैं, ये मानते हैं कि पुरुष ही बेहतर राजनेता हो सकते हैं. इसी तरह से करीब 40 फीसदी लोगों का लगता है कि पुरुष ही बेहतर बिजनेस एग्जीक्यूटिव हो सकते हैं.

28 फीसदी लोग बीवी की पिटाई को सही ठहराते हैं
सबसे चौंकाने वाली रिपोर्ट घरेलू हिंसा को लेकर है. जनजागरुकता के तमाम उपायों के बाद और मॉर्डन कल्चर को बड़ी आबादी द्वारा अपनाए जाने के बाद भी करीब 28 फीसदी लोग पत्नी की पिटाई को सही ठहराते हैं. इन 28 फीसदी लोगों को लगता है कि घरेलू झगड़े में पति अगर अपनी पत्नी को पीट दे तो कोई बात नहीं. हैरानी की बात है कि ये किसी एक पिछड़े देश की बात नहीं है. ये ग्लोबल रिपोर्ट है. इसके डाटा 80 फीसदी से भी ज्यादा के ग्लोबल पॉपुलेशन से जुटाए गए हैं.

रिपोर्ट में महिलाओं के लिए मुस्कुराने की भी कुछ वजहें
ऐसा नहीं है कि यूएन की रिपोर्ट में महिलाओं के लिए सबकुछ नकारात्मक ही है. कुछ अच्छी चीजें भी हैं, जो पिछले दिनों हुई हैं. मसलन रिपोर्ट के मुताबिक पूरी दुनिया में प्राइमरी स्कूल में लड़कियों के दाखिले में तेजी आई है. बच्चो को जन्म देते वक्त महिलाओं की मृत्युदर में कमी आई है.

यूनाइटेड नेशंस डेवलपमेंट प्रोग्राम के मुखिया पेड्रो कॉन्सेकियो का कहना है कि मौजूदा दौर में जेंडर इक्वैलिटी की लड़ाई का मतलब है महिलाओं के प्रति पूर्वाग्रह से ग्रस्त कहानियां.

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