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Citizenship Amendment Bill 2019: अमेरिका ने कहा - पूरे घटनाक्रम पर हमारी नजर

News18Hindi
Updated: December 13, 2019, 11:54 AM IST
Citizenship Amendment Bill 2019: अमेरिका ने कहा - पूरे घटनाक्रम पर हमारी नजर
एक अमेरिकी सांसद ने भी नागरिकता संशोधन विधेयक पर टिप्पणी की थी.

नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 (Citizenship amendment bill 2019) में अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से धार्मिक प्रताड़ना के कारण 31 दिसम्बर, 2014 तक भारत आए गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है.

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  • Last Updated: December 13, 2019, 11:54 AM IST
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वॉशिंगटन. अमेरिका (United states of America) ने भारत से अनुरोध किया है कि वह अपने संवैधानिक और लोकतांत्रिक मूल्यों को बरकरार रखते हुए धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करे. अमेरिका नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 (Citizenship amendment bill 2019) के संबंध में भारत के विभिन्न राज्यों में जारी घटनाक्रम पर नजर रख रहा है.

अमेरिकी विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘हम नागरिकता संशोधन विधेयक के संबंध में हर घटनाक्रम पर करीब से नजर बनाए हुए हैं. कानून के तहत समान व्यवहार और धार्मिक स्वतंत्रता का सम्मान हम दो लोकतांत्रिक देशों के मौलिक सिद्धांत हैं.’ प्रवक्ता ने कहा, ‘अमेरिका भारत से अनुरोध करता है कि वह अपने संवैधानिक और लोकतांत्रिक मूल्यों को बरकरार रखते हुए धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करे.’

नागरिकता संशोधन विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी
बता दें गुरुवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (President of India Ramnath Kovind) ने नागरिकता (संशोधन) विधेयक 2019 को मंजूरी दे दी, जिसके बाद यह कानून बन गया है. एक आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार गुरुवार को आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित होने के साथ ही यह कानून लागू हो गया है.

कानून के अनुसार हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के जो सदस्य 31 दिसंबर, 2014 तक पाकिस्तान, बांग्लादेश व अफगानिस्तान से भारत आए हैं तथा जिन्हें अपने देश में धार्मिक उत्पीड़न का सामना पड़ा है, उन्हें गैरकानूनी प्रवासी नहीं माना जाएगा, बल्कि उन्‍हें भारतीय नागरिकता दी जाएगी. नागरिकता (संशोधन) विधेयक बुधवार को राज्यसभा और सोमवार को लोकसभा से पारित किया गया था.

इन राज्यों में नहीं लागू होगा कानून
कानून के मुताबिक, इन छह समुदायों के शरणार्थियों को पांच साल तक भारत में रहने के बाद भारत की नागरिकता दी जाएगी. अभी तक यह समयसीमा 11 साल की थी. कानून के मुताबिक, ऐसे शरणार्थियों को गैर-कानूनी प्रवासी के रूप में पाए जाने पर लगाए गए मुकदमों से भी माफी दी जाएगी.कानून के अनुसार, यह असम, मेघालय, मिजोरम और त्रिपुरा के आदिवासी क्षेत्रों पर लागू नहीं होगा, क्योंकि ये क्षेत्र संविधान की छठी अनुसूची में शामिल हैं. साथ ही यह कानून बंगाल पूर्वी सीमा विनियमन, 1873 के तहत अधिसूचित इनर लाइन परमिट (Inner Line Permit ILP) वाले इलाकों में भी लागू नहीं होगा. आईएलपी अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड और मिज़ोरम में लागू है.

अमेरिकी सांसद ने किया था विरोध
अमेरिका के एक मुस्लिम सांसद ने भारत के नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 पर चिंता जाहिर करते हुए कहा था कि यह अल्पसंख्यक मुसलमानों को दूसरे दर्जे का नागरिक बनाने की कोशिश है. सांसद आंद्रे कार्सन ने कहा, ‘यह कदम भारत में अल्पसंख्यक मुसलमानों को दूसरे दर्जे का नागरिक बनाने का एक और प्रभावी प्रयास है.’ नागरिकता संशोधन विधेयक के लोकसभा और राज्यसभा में पारित होने के बाद कार्सन ने यह बयान दिया था.

कार्सन ने जम्मू-कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा वापस लेने पर भी चिंता जाहिर की. उन्होंने कहा था, ‘भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा वापस लेने की घोषणा की थी, तब भी मैंने कश्मीर के भविष्य पर उसके असर को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की थी.’
एजेंसी इनपुट के साथ

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First published: December 13, 2019, 11:11 AM IST
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