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अमेरिका, चीन, भारत व यूरोप को उत्सर्जन कम करने के लिए अधिकतम प्रयास करने की जरूरत : संरा

गुतारेस ने कहा कि विज्ञान हमें बताता है कि 1.5 डिग्री से ऊपर कुछ भी विनाशकारी होगा.(फाइल फोटो)

गुतारेस ने कहा कि विज्ञान हमें बताता है कि 1.5 डिग्री से ऊपर कुछ भी विनाशकारी होगा.(फाइल फोटो)

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख (Antonio Guterres) ने कहा कि एक ओर विकसित देशों को अपने राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान में प्रमुख भूमिका निभाने की जरूरत है, वहीं कई उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए भी अतिरिक्त प्रयास करना और उत्सर्जन में कमी के लिए प्रभावी रूप से योगदान करना आवश्यक है.

  • News18Hindi
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    संयुक्त राष्ट्र: संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस (Antonio Guterres) ने सोमवार को जोर दिया कि 2050 तक शून्य उत्सर्जन के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए विकासशील और विकसित दोनों प्रकार के देशों को ‘अपना काम करना चाहिए.’ इसके साथ ही उन्होंने उम्मीद जतायी कि दूसरे देश क्या कर रहे हैं, इसकी प्रतीक्षा किए बिना अमेरिका, चीन, भारत, यूरोप आदि समझेंगे कि उन्हें अधिकतम प्रयास करने की आवश्यकता है.

    गुतारेस और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने विभिन्न राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों के एक छोटे प्रतिनिधि समूह के साथ जलवायु कार्रवाई पर अनौपचारिक जलवायु गोलमेज बैठक की.

    इससे पहले संयुक्त राष्ट्र ने कहा था कि गोलमेज बैठक ‘राष्ट्रीय नेताओं के लिए विश्व के 1.5 डिग्री सेल्सियस तापमान लक्ष्य को पहुंच के भीतर रखने के लिए एकजुटता प्रदर्शित करने का एक अवसर होगा.’

    गुतारेस ने गोलमेज बैठक के बाद यहां संवाददातओं से बातचीत करते हुए कहा कि सदस्य देशों की मौजूदा प्रतिबद्धताओं के आधार पर, विश्व 2.7 डिग्री गर्मी के ‘विनाशकारी रास्ते’ पर है. उन्होंने कहा कि विज्ञान हमें बताता है कि 1.5 डिग्री से ऊपर कुछ भी विनाशकारी होगा. तापमान में वृद्धि को 1.5 डिग्री तक सीमित करने के लिए हमें 2030 तक उत्सर्जन में 45 प्रतिशत की कटौती करने की आवश्यकता है.

    संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने कहा कि एक ओर विकसित देशों को अपने राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान में प्रमुख भूमिका निभाने की जरूरत है, वहीं कई उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए भी अतिरिक्त प्रयास करना और उत्सर्जन में कमी के लिए प्रभावी रूप से योगदान करना आवश्यक है.

    उन्होंने कहा कि उनका मानना ​​है कि उत्सर्जन में कमी के संबंध में अब भी एक लंबा रास्ता तय करना है. जी20 देश 80 प्रतिशत उत्सर्जन करते हैं. उन्होंने कहा कि इसका कोई मतलब नहीं होगा यदि विकसित देश जो 2015 में पहले ही शून्य उत्सर्जन के लिए प्रतिबद्धता जता चुके हैं और अब कहते हैं कि उन्होंने जलवायु कार्रवाई की दिशा में अपना काम किया है तथा अब यह विकासशील देशों, विशेष रूप से उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर है कि वे अपना काम करें.

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