चीन पर शिकंजा कसने के लिए दक्षिण चीन सागर में अमेरिका ने तैनात किए अपने युद्धतोप

चीन पर शिकंजा कसने के लिए दक्षिण चीन सागर में अमेरिका ने तैनात किए अपने युद्धतोप
दक्षिण चीन सागर में अमेरिका ने तैनात किए अपने युद्धतोप

चीन की विस्तारवादी आक्रमक रवैये (Agressive Expansion Policy Of China) के खिलाफ दक्षिण चीन सागर में लगातार उकसावे का खेल खेल रहे चीन पर शिकंजा कसने के लिए अमेरिका ने दो विमानवाहक युद्धपोत तैनात कर दिए हैं.

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वाशिंगटन. चीन की विस्तारवादी आक्रमक रवैये (Agressive Expansion Policy Of China) के खिलाफ दक्षिण चीन सागर में लगातार उकसावे का खेल खेल रहे चीन पर शिकंजा कसने के लिए अमेरिका ने दो विमानवाहक युद्धपोत तैनात कर दिए हैं. अमेरिका के भेजे गए ये दोनों ही पोत यहां सैन्य अभ्यास में शामिल होंगे. अमेरिकी नौसेना ने इसकी पुष्टि की है और कहा है कि हमने प्रशांत सागर क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए यूएसएस रीगन (CVN 76)और यूएसएस निमित्ज हिंत (CVN 68) दक्षिण चीन सागर में भेजे हैं. दोनों ही विमानवाहक युद्धपोत अभ्यास में जुट गए हैं.

अमेरिकी अधिकारी ने की पुष्टि

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार रोनाल्ड रीगन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप के अधिकारी लेफ्टिनेंट कमांडर सीन ब्रोफी ने कहा कि मैं इस बात की पुष्टि करता हूं कि यूएसएस रोनाल्ड रीगन और यूएसएस निमित्ज हिंद प्रशांत क्षेत्र स्वतंत्र और खुला रखने के लिए कैरियर ऑपरेशन और एक्सरसाइज में जुटे हैं. पिछले दिनों अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के वर्तमान विस्तारवादी रवैये को लेकर चेतावनी देते हुए कहा था कि चीन की हरकतें गुस्सा दिलानेवाली है और अमेरिका उसे छोड़ेगा नहीं.



अमेरिका और चीन के सैन्य जहाज करेंगे युद्ध अभ्यास
दो विमान वाहक चार युद्धपोतों के साथ 24 घंटे फ्लाइट टेस्टिंग और हमला करने को लेकर इनकी क्षमता का परीक्षण करेंगे. पूरी दुनिया की नजर इसलिए भी टिकी हुई है क्योंकि चीन और अमेरिका के सैन्य जहाज एक ही क्षेत्र में एक समय पर अभ्यास करेंगे, यह बेहद ही दुर्लभ मौका है.

अमेरिकी विदेशमंत्री ने भी जताया था विरोध

अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने भी शुक्रवार को ट्वीट किया था कि अमेरिका दक्षिण पूर्व एशिया के अपने मित्रों से सहमत है. हम पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना का दक्षिण चीन सागर में विवादित स्थान पर सैन्य अभ्यास का विरोध करते हैं. हम चीन के गैरकानूनी दावे का विरोध करते हैं.

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इस बारे में अमेरिकी नौसेना के अधिकारी ब्रोफी ने कहा कि यह प्रयास अंतरराष्ट्रीय कानूनों के अनुसार किया जा रहा है. हम इस मामले में सभी देशों के साथ खड़े हैं.
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