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US के लिए आज अहम दिन! इलेक्टर्स करेंगे वोटिंग, बाइडन के राष्ट्रपति होने पर लगाएंगे मुहर

आज इलेक्टोरल कॉलेज बाइडन को राष्ट्रपति चुनने के लिए करेगा वोटिंग (फोटो- AP)
आज इलेक्टोरल कॉलेज बाइडन को राष्ट्रपति चुनने के लिए करेगा वोटिंग (फोटो- AP)

US Electoral College Voting: अमेरिका में 14 दिसंबर को इलेक्टोरल कॉलेज की वोटिंग है जिसके बाद 6 जनवरी को अमेरिकी चुनावों के आधिकारिक नतीजों की घोषणा की जाएगी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 14, 2020, 2:07 PM IST
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वाशिंगटन. पॉपुलर वोटों के आधार पर भले ही डेमोक्रेट उम्मीदवार जो बाइडन (Joe Biden) भले ही जीत गए हैं लेकिन इलेक्टोरल कॉलेज की वोटिंग (US Electoral College) से आज उनके अमेरिका के अगले राष्ट्रपति होने पर पक्की मुहर लगाई जाएगी. 14 दिसंबर को इलेक्टोरल कॉलेज की वोटिंग है जिसके बाद 6 जनवरी को अमेरिकी चुनावों के आधिकारिक नतीजों की घोषणा की जाएगी.

कानून के अनुसार इलेक्टोरल कॉलेज की बैठक दिसंबर के दूसरे बुधवार के बाद आने वाले पहले सोमवार को होती है. इस दिन सभी 50 राज्यों और डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया के निर्वाचक अपना मत डालने के लिए बैठक करते हैं. मतदान का परिणाम वाशिंगटन को भेजा जाएगा और संसद के छह जनवरी को होने वाले संयुक्त सत्र में इसकी गणना की जाएगी जिसकी अध्यक्षता उपराष्ट्रपति माइक पेंस करेंगे. निर्वाचन मंडल के मत इस साल पहले की तुलना में अधिक चर्चा में हैं, क्योंकि देश के मौजूदा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हार स्वीकार करने से इनकार कर दिया है और चुनाव में धोखाधड़ी का बेबुनियाद आरोप लगाना जारी रखा है.

बाइडन की जीत तय
इलेक्टोरल कॉलेज के मतदान करने के बाद बाइडन संभवत: सोमवार रात को राष्ट्र को संबोधित करेंगे, लेकिन ट्रंप ने बाइडन की जीत स्वीकार नहीं की है. ट्रंप ने शनिवार को रिकॉर्ड किए गए ‘फॉक्स न्यूज’ को दिए साक्षात्कार में कहा, 'नहीं, मैं देश में एक अवैध राष्ट्रपति होने को लेकिर चिंतित हूं. ऐसा राष्ट्रपति जो बुरी तरह हारा है.' बाइडन ने 306 और ट्रंप ने 232 इलेक्ट्रोरल (निर्वाचकों के मत) मत जीते हैं. बहुमत के लिए 270 मतों की आवश्यकता होती है. निर्वाचक अमूमन अपने राज्य में विजेता रहे उम्मीदवार के लिए ही मतदान करते हैं, क्योंकि वे अपने दल के लिए समर्पित होते हैं.
इलेक्टोरल कॉलेज पर उठे हैं सवाल!


हाल ही में गैलप के एक सर्वे में 61% अमेरिकी नागरिकों ने इसका विरोध किया था. उनका कहना था कि राष्ट्रपति का चुनाव इलेक्टोरल कॉलेज से नहीं, बल्कि पॉपुलर वोट से होना चाहिए. बता दें कि इलेक्टोरल कॉलेज का मतलब किसी एजुकेशनल इंस्टीट्यूट से नहीं है. इसका मतलब है जन प्रतिनिधियों का समूह या निर्वाचक मंडल. यही समूह अमेरिकी राष्ट्रपति चुनता है. अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों की प्रक्रिया थोड़ी जटिल होती है. ट्रंप रिपब्लिकन कैंडिडेट थे और बाइडन डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार थे. वोटर ने जब बाइडन या ट्रंप को वोट किया तो उनके नाम के आगे ब्रेकेट में एक नाम और लिखा था. मतदाता ने ब्रैकेट में लिखे नाम वाले व्यक्ति को अपना इलेक्टर चुना.

यही इलेक्टर 14 दिसंबर को राष्ट्रपति चुनाव के लिए वोटिंग करेगा और आसान तरीके से समझें तो वोटर ने ट्रंप या बाइडन को वोट नहीं दिया, बल्कि अपना प्रतिनिधि चुना और उसे ही वोट दिया. अब यह प्रतिनिधि यानी इलेक्टर अमेरिकी राष्ट्रपति चुनेगा. मतदाता इलेक्टर्स चुनते हैं और इलेक्टर्स के समूह को इलेक्टोरल कॉलेज कहा जाता है. इलेक्टोरल कॉलेज में कुल 538 इलेक्टर्स होते हैं. राष्ट्रपति बनने के लिए 270 इलेक्टोरल वोट या इलेक्टर्स के समर्थन की जरूरत है.



इलेक्टर कौन और कैसे बनता है?
इसका फैसला उस पार्टी का राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार और पार्टी मिलकर तय करते हैं. इसे आप उम्मीदवार का प्रतिनिधि कह सकते हैं. मान लीजिए ट्रंप रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार थे. उन्हें कैलिफोर्निया के 55 इलेक्टर्स की लिस्ट बनानी है. तो पार्टी और ट्रम्प मिलकर इनके नाम तय करेंगे. बैलट पर प्रेसिडेंशियल कैंडिडेट के नाम के आगे ब्रैकेट में इस इलेक्टर का नाम होगा. वोटर जब राष्ट्रपति उम्मीदवार को चुनेगा, तो इसी इलेक्टर के नाम पर निशान लगाएगा.
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