अमेरिकी सरकार ने गूगल पर किया मुकदमा, इंटरनेट सर्च में मोनोपली का आरोप लगाया

अमेरिकी सरकार ने गूगल पर मुकदमा दर्ज कराया है.
अमेरिकी सरकार ने गूगल पर मुकदमा दर्ज कराया है.

अमेरिकी सरकार (Americas Government) के न्याय विभाग ने गूगल (Google) पर मुकदमा दायर किया है. सरकार ने गूगल के स्वामित्व वाली कंपनी अल्फाबेट (Alphabet) पर इंटरनेट सर्च (Internet Search) में उसके प्रभुत्व के गैरकानूनी इस्तेमाल का आरोप लगाया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 21, 2020, 9:18 PM IST
  • Share this:
वाशिंगटन. अमेरिकी सरकार (Americas Government) के न्याय विभाग ने गूगल (Google) पर मुकदमा दायर किया है. सरकार ने गूगल के स्वामित्व वाली कंपनी अल्फाबेट (Alphabet) पर इंटरनेट सर्च (Internet Search) में उसके प्रभुत्व के गैरकानूनी इस्तेमाल का आरोप लगाया है. अमेरीकी सरकार ने गूगल पर एप्पल और अन्य स्मार्टफोन निर्माताओं जैसी बड़ी कंपनियों के साथ किए गए सौदों के माध्यम से सर्च और सर्च विज्ञापनों के बाजार में अपनी प्रभावी स्थिति को अवैध रूप से बचाने का आरोप लगाया है. एप्पल और अन्य स्मार्टफोन निर्माता कंपनियां अपने फ़ोन आदि डिवाइस में गूगल को डिफ़ॉल्ट सर्च इंजन के रूप में रखते हैं. न्याय विभाग के अनुसार इन्हीं सब कारणों से सर्च मार्किट में गूगल प्रमुख नाम बना हुआ है. न्याय विभाग ने गूगल को 'इंटरनेट पर एकाधिकार रखने वाले गेटकीपर' के रूप में वर्णित किया है.

गूगल पर डिजिटल विज्ञापन भी जांच के घेरे में

गूगल पर सर्च डिजिटल विज्ञापन भी जांच के दायरे में हैं. इसके अंतर्गत सर्च, वेब डिस्प्ले और वीडियो विज्ञापन शामिल हैं.मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि डिजिटल एडवरटाइजिंग स्पेस में गूगल का व्यवहार एकाधिकारवादी और अपने से छोटे प्रतियोगियों के बहिष्कार और उन्हें दबा कर रखने का है. गूगल इंटरनेट के क्षेत्र में किसी भी तरह के नए बदलावों या खोजों को रोकता है जिसके परिणामस्वरूप उपभोक्ताओं को भारी निराशा होती है.



इस विषय पर गूगल ने दी अपनी प्रतिक्रियाएं
गूगल का कहना है कि उसने लगातार यह सुनिश्चित किया है कि उसकी सेवाएं उपभोक्ताओं के लिए उपयोगी हों और सभी के लिए मुफ़्त हों. गूगल ने ने इस बात पर भी जोर दिया है कि उसके द्वारा किए गए सभी सौदे कानूनी हैं और कंपनियों की मदद करते हैं.

अमरीकी सांसदों का रवैया

बारनी सैंडर्स और अलेक्जेंड्रिया ओकासियो कोरटेज़ जैसे सीनेटरों द्वारा बार-बार यह मुद्दा उठाया गया है कि एक कंपनी के पास इतनी अधिक शक्ति का होना नीतिगत चिंता का विषय है. फिलहाल इस मुकदमे के कई अर्थ लगाए जा रहे हैं क्योंकि यह मुकदमा 2020 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों से ठीक दो सप्ताह पहले किया गया है.

इसी तरह माइक्रोसॉफ्ट पर भी हुआ था मुकदमा

22 साल पहले 1998 में माइक्रोसॉफ्ट के खिलाफ ऐसा ही एक मामला हुआ था. माइक्रोसॉफ्ट पर विंडोज के आसपास सभी प्रोडक्ट्स की बंडलिंग करने का आरोप लगाया गया था.जिस समय माइक्रोसॉफ्ट पर मुकदमा किया गया था उस समय गूगल केवल एक स्टार्टअप था और उसने उस समय दावा किया था कि माइक्रोसॉफ्ट की कार्य प्रणाली या व्यवहार "प्रतिस्पर्धा-विरोधी (anti-competitive) थे.

ये भी पढ़ें: चिली में प्रदर्शनकारी हुए हिंसक, चर्च को किया आग के हवाले, लूटपाट की 

नाईजीरिया में प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पुलिस ने चलाई ताबड़तोड़ गोलियां, कई मरे

अब अमेरिकी सरकार और गूगल एक समझौता कर सकते हैं लेकिन अगर यह सम्भव नहीं हो पाया तब दोनों कोर्ट का रुख करेंगे. इस मुकदमे का फैसला आने में कुछ साल लगेंगे लेकिन गूगल जैसी बड़ी कंपनी पर किया गया यह मुकदमा गूगल के खिलाफ उठाया गया पहला महत्वपूर्ण कदम है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज