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अमेरिका ने सांठगांठ कर लगाया वैश्विक हैकिंग का बेबुनियाद आरोप: चीन

अमेरिका ने सांठगांठ कर लगाया वैश्विक हैकिंग का बेबुनियाद आरोप: चीन

चीन ने अमेरिका पर लगाए आरोप. सांकेतिक फोटो (flickr)

चीन ने अमेरिका पर लगाए आरोप. सांकेतिक फोटो (flickr)

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजान ने मंगलवार को आरोप लगाया कि ‘‘अमेरिका से प्रोत्साहन पाकर नाटो ने साइबरस्पेस को नया रणक्षेत्र बना दिया है’’ जो शायद साइबर हथियारों की होड़ को बढ़ावा देगा.

    बीजिंग. चीन ने मंगलवार को अमेरिका पर वैश्विक हैकिंग अभियान चलाने का कथित बेबुनियाद आरोप लगाने के लिए सहयोगियों के साथ साठगांठ करने का आरोप लगाया और उससे ऐसे आरोप लगा उसपर ‘कीचड़’ उछालने से बाज आने को कहा. चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजान ने मंगलवार को आरोप लगाया कि ‘‘अमेरिका से प्रोत्साहन पाकर नाटो ने साइबरस्पेस को नया रणक्षेत्र बना दिया है’’ जो शायद साइबर हथियारों की होड़ को बढ़ावा देगा. वह अमेरिका और नाटो द्वारा चीन पर वैश्विक हैकिंग अभियान चलाने के आरोप पर प्रतिक्रिया दे रहे थे.

    झाओ ने कहा, ‘‘ अमेरिका ने चीनी साइबर सुरक्षा पर चीन के विरूद्ध बेबुनियाद आरोप लगाने के लिए अपने सहयोगियों के साथ साठगांठ की. ’’ यूरोपीय संघ, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यूजीलैंड, जापान और नाटो समेत अमेरिकी सहयोगियों एवं साझेदारों का अप्रत्याशित समूह चीन की दुर्भावनापूर्ण साइबर गतिविधियों को उजागर करने और उनकी आलोचना करने के लिए सोमवार को अमेरिका के साथ आया.

    व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव जेन साकी ने सोमवार को संवाददाताओं से कहा कि नाटो ने चीन की साइबर गतिविधियों की पहली बार निंदा की है. अमेरिका द्वारा तैयार एकजुट मोर्चे ने चीन की खिंचाई की. झाओ ने कहा कि यह (आरोप) विशुद्ध रूप से राजनीतिक मंशा से बदनाम करने एवं दबाव बनाने की हरकत है. चीन कभी इसे स्वीकार नहीं करेगा और दृढ़ता से उसका विरोध करेगा एवं किसी भी प्रकार के साइबर हमले का मुकाबला करेगा. .. ’’

    उन्होंने यह कहते हुए नाटो को निशाने पर लिया कि अमेरिका की अगुवाई वाले इस सैन्य गठबंधन ने साइबरस्पेस को नया रणक्षेत्र बना दिया है. उन्होंने कहा कि यदि नाटो को अपने सदस्य देशों की साइबरसुरक्षा की परवाह है तो उसने कुछ सदस्य देशों की विशाल साइबर जासूसी के मामले पर अन्य सदस्य देशों के साथ चर्चा करनी चाहिए.

    चीन से साइबर हमला होने के आरोप पर झाओ ने चीन का बार-बार का यह बचाव दोहराया कि साइबर हमले के स्रोत को साबित करना मुश्किल है. उन्होंने ‘‘साइबरस्पेस के आभासी स्वभाव और यह कि ऑनलाइन कार्यकर्ता ऐसे प्रकार के हैं कि उनका पता लगाना कठिन है, इन बातों को ध्यान में रखते हुए , साइबर संबंधी घटनाओं की जांच करने एवं उनकी पहचान करने के लिए पर्याप्त सबूत का होना अहम है.’’

    उन्होंने कहा, ‘‘अमेरिका द्वारा जारी तथाकथित प्रौद्योगिकीगत विवरण सबूतों की संपूर्ण श्रृंखला नहीं बनाता है.

    झाओ ने अमेरिका ‘‘ दुनिया में साइबर हमला का सबसे बड़ा स्रोत होने तथा चीन के एयरोस्पेस अनुसंधान इकाइयों, तेल उद्योग, इंटरनेट कंपनियों एवं सरकारी एजेंसियों को निशाना बनाने का भी आरोप लगाया. उन्होंने कहा, ‘‘ चीन और अन्य को बदनाम करके कोई पाक-साफ नहीं हो सकता. चीन अमेरिका और उसके सहयोगियों से अपनी साइबर जासूसी तथा चीन पर हमला करना बंद करने का दृढ़ आह्वान करता है.…’’

    (Disclaimer: यह खबर सीधे सिंडीकेट फीड से पब्लिश हुई है. इसे News18Hindi टीम ने संपादित नहीं किया है.)

    Tags: America, China, China and america, Hacking

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