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अमेरिकी अधिकारियों का खुलासा, ट्रंप प्रशासन ने आरामको पर हमले के बाद ईरान पर किया साइबर अटैक

अमेरिकी अधिकारियों का खुलासा, ट्रंप प्रशासन ने आरामको पर हमले के बाद ईरान पर किया साइबर अटैक

साइबर हमला अमेरिका की ओर से ईरान के खिलाफ की गई दूसरी कार्रवाई के मुकाबले सीमित था.

साइबर हमला अमेरिका की ओर से ईरान के खिलाफ की गई दूसरी कार्रवाई के मुकाबले सीमित था.

अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप (Donald Trump) का प्रशासन साइबर हमला कर ईरान (Iran) को दबाव में लेने की कोशिश कर रहा था. इससे पहले जून में अमेरिका (US) ने आरोप लगाया था कि ईरान ने उसका एक ड्रोन (Drone) मार गिराया था. वहीं, ईरान के रिवाल्‍यूशनरी गार्ड्स ने खाड़ी (Gulf) में ऑयल टैंकर्स (Oil Tankers) पर हमला किया था. इसके अलावा सऊदी अरब (Saudi Arabia), ब्रिटेन (Britain), फ्रांस (France) और जर्मनी (Germany) ने 14 सितंबर को तेल कंपनी आरामको पर हमले के लिए ईरान को ही जिम्‍मेदार ठहराया था.

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    वाशिंगटन. सऊदी अरब (Saudi Arabia) की तेल कंपनियों (Oil Company) पर 14 सितंबर को हुए हमले के बाद अमेरिका (US) ने ईरान (Iran) पर सीक्रेट साइबर (Cyber Attack) हमले किए थे. अमेरिका के अधिकारियों (US Officials) ने बताया कि वाशिंगटन और रियाद ने इन साइबर अटैक का आरोप तेहरान (Tehran) पर लगाया था. राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप (Donald Trump) के प्रशासन ने इस अभियान को सितंबर के आखिरी सप्‍ताह में अंजाम दिया. अमेरिका ने साइबर अटैक के जरिये तेहरान की प्रचार-प्रसार (Propaganda) की क्षमता को काफी नुकसान पहुंचाया. एक अधिकारी ने बताया कि इस हमले में ईरान की प्रचार-प्रसार क्षमता के हार्डवेयर (Hardware) को सीधा नुकसान हुआ.

    ईरान को दबाव में लेने के लिए ट्रंप प्रशासन ने की कार्रवाई
    अधिकारियों ने बताया कि कैसे ट्रंप प्रशासन (Trump Administration) ने साइबर हमलों के जरिये ईरान को दबाव में लेने की कोशिश की. ये हमला अमेरिका की ओर से ईरान के खिलाफ की गई दूसरी कई कार्रवाई के मुकाबले सीमित था. दरअसल, इससे पहले कथित तौर पर जून में ईरान की सेना ने अमेरिका का एक ड्रोन (Drone) मार गिराया था. इसके बाद ईरान ने मई में अमेरिका के तेल टैंकरों (Oil Tankers) पर खाड़ी (Gulf) में हमला कर दिया. वहीं, 14 सितंबर को तेल कंपनी सऊदी आरामको (Saudi Aramco) पर हुए हमलों के लिए सऊदी अरब, ब्रिटेन (Britain), फ्रांस (France) और जर्मनी (Germany) ने ईरान को ही जिम्‍मेदार ठहराया. हालांकि, ईरान ने हमले में हाथ होने से साफ इनकार कर दिया था. ईरान के विद्रोही संगठन हुती (Houthi) ने इस हमले की जिम्‍मेदारी ली थी.

    पेंटागन ने साइबर अटैक के बारे में बोलने से कर दिया इनकार
    पेंटागन (Pentagon) ने इस साल सऊदी अरब को सुरक्षा मुहैया कराने के लिए हजारों अतिरिक्‍त सैनिक (Troops) और उपकरण (Equipment) भेज दिए. पेंटागन ने साइबर हमले को लेकर कोई भी टिप्‍पणी करने से इनकार कर दिया. पेंटागन की प्रवक्‍ता एलिजा स्मिथ (Elissa Smith) ने कहा कि नीतिगत और सुरक्षा कारणों के चलते हम साइबरस्‍पेस अभियान, इंटेलिजेंस या प्‍लानिंग को लेकर कोई बात नहीं करते हैं. साइबर अटैक के असर का आकलन करने में महीनों का वक्‍त लग सकता है. युद्ध जैसे हालात में साइबर अटैक मामूली विकल्‍प है. साइबर एक्‍सपर्ट जेम्‍स लुइस ने कहा कि साइबर अटैक के जरिये आप आम लोगों को बिना नुकसान पहुंचाए दुश्‍मन को नुकसान पहुंचा सकते हैं.

    'पारंपरिक हमलों से भी नहीं बदला जा सकता ईरान का व्‍यवहार'
    वाशिंगटन के सेंटर फॉर स्‍ट्रैटजिक एंड इंटरनेशनल स्‍टडीज के साइबर एक्‍सपर्ट लुइस का कहना है कि पारंपरिक सैन्‍य हमलों (Conventional Military Strikes) के जरिये भी ईरान का व्‍यवहार बदलना संभव नहीं है. खाड़ी में तनाव का महौल मई 2018 से ही बनना शुरू हो गया था, जब ट्रंप ने तेहरान के साथ परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने वाली 2015 की संयुक्त व्यापक कार्ययोजना से अमेरिका को बाहर कर लिया था. इस कार्ययोजना का मकसद ईरान पर लगी पाबंदियों में ढील देना था. अभी यह भी स्‍पष्‍ट नहीं हुआ है कि सितंबर के आखिर में किए गए अटैक के बाद ईरान पर कोई दूसरा साइबर अटैक किया गया है या नहीं. ईरान भी अमेरिका के खिलाफ इस तरह के हमले करता रहता है.

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    Tags: Cyber issues, Donald Trump administration, Iran, Saudi arabia, US

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