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US President Election: बाइडेन के सियासी रथ के सारथी हैं कर्नाटक के विवेक मूर्ति, बड़े ओहदे पर दावेदारी भी मजबूत

कर्नाटक के रहने वाले हैं विवेक मूर्ति.
कर्नाटक के रहने वाले हैं विवेक मूर्ति.

US Presidential Election 2002: डॉक्टर विवेक एच मूर्ति (Vivek Murthy) 2014 में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के सबसे कम उम्र के सर्जन जनरल नियुक्त हुए थे. इस बार के राष्ट्रपति चुनाव अभियान में वह जो बाइडेन के मुख्य रणनीतिकार हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 2, 2020, 12:10 PM IST
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बेंगलुरु. अमेरिकी राष्‍ट्रपति चुनाव (US Presidential Election 2020) इस बार काफी अहम हैं. अमेरिका के मौजूदा राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप (Donald Trump) जहां फिर मैदान में हैं, वहीं उनके प्रतिद्वंद्वी जो बाइडेन (Joe Biden) भी उन्हें कड़ी टक्‍कर दे रहे हैं. कुछ रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जो बाइडेन यह चुनाव जीत सकते हैं. वहीं अगर जो बाइडेन (Joe Biden) अगले अमेरिकी राष्ट्रपति बने तो कर्नाटक के विवेक मूर्ति (Vivek Murthy) को अमेरिकी प्रशासन में उच्च पद मिल सकता है.

जो बाइडेन अगर अमेरिका के अगले राष्ट्रपति बनने में कामयाब रहते हैं तो कर्नाटक मूल के एक भारतीय अमेरिकी को बाइडेन प्रशासन में कोई महत्वपूर्ण पद मिल सकता है. डॉक्टर विवेक एच मूर्ति 2014 में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के सबसे कम उम्र के सर्जन जनरल नियुक्त हुए थे. इस बार के राष्ट्रपति चुनाव अभियान में वह जो बाइडेन के मुख्य रणनीतिकार हैं.

विवेक मूर्ति 43 साल के हैं और वह मूलरूप से कर्नाटक में मांड्या ज़िला के मद्दूर तालुका के हल्लेगेरे गांव के रहने वाले हैं. विवेक एचटी नारायण शेट्टी के पोते हैं जो कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री डी देवराज के करीबी रह चुके हैं और पिछड़े वर्ग के महत्त्वपूर्ण नेता माने जाते हैं. हल्लेगेरे के लोग इस उम्मीद से काफ़ी खुश लग रहे हैं कि उनके इलाके का कोई व्यक्ति वाइट हाउस में किसी उच्च पद पर बैठेगा.



गांववालों का मानना है कि मूर्ति अभी भी अपनी मातृभाषा कन्नड़ भूले नहीं हैं और अपने घर में वह इसी भाषा में बात करते हैं. डॉक्टर विवेक मूर्ति अभी तक अपनी जड़ को भूले नहीं हैं. हर साल वो हल्लेगेरे आते हैं और अपने पैतृक गांव में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए लाखों डॉलर खर्च करते हैं.
डॉक्टर विवेक मूर्ति मैसूर मेडिकल कॉलेज के छात्र रह चुके डॉक्टर एचएन लक्ष्मी नरसिम्हा मूर्ति के बेटे हैं और वो ब्रिटेन में विभिन्न पदों पर रह चुके हैं. डॉक्टर विवेक की बहन रश्मि भी फ़्लोरिडा में डॉक्टर हैं. डॉक्टर मूर्ति हर साल अपने गांव में परिवार के पैसे से चल रहे स्कोप फाउंडेशन के तहत वार्षिक चिकित्सा शिविर लगाते हैं. डॉक्टरों की टीम और उनके अपने परिवार के लोग मिलकर इस क्षेत्र में मुफ़्त नेत्र चिकित्सा शिविर लगा चुके हैं और 60 लोगों का ऑपरेशन कर चुके हैं.

इन लोगों ने मद्दूर तालुका और इसके आसपास के सरकारी स्कूलों में 100 कम्प्यूटर बांटे हैं. हालांकि विवेक और उनका परिवार मांड्या ज़िले के हर स्कूल में कंप्यूटर बांटना चाहता है, पर अभी वह अपनी इस योजना पर धीमे काम कर रहे हैं क्योंकि इस क्षेत्र में बिजली की आपूर्ति ठीक नहीं होने और रखरखाव बढ़िया नहीं होने के कारण कंप्यूटरों का प्रयोग नहीं हो पा रहा है.

वैसे, स्कोप फाउंडेशन ने सोलर किट बांटने का निर्णय लिया है ताकि स्कूलों में कंप्यूटरों को इनसे चलाया जा सके. उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार को लोगों को मुफ़्त स्वास्थ्य कवर देने और सेवाओं में सुधार करने के बारे में सुझाव देने की भी इच्छा जताई है.

डॉक्टर मूर्ति की पैदाइश लंदन में हुई और उनका लालन-पालन अमेरिका में हुआ. मूर्ति ने हॉर्वर्ड विश्वविद्यालय से बीए किया, येल स्कूल ऑफ मैनेजमेंट से एमबीए और येल स्कूल ऑफ मेडिसिन से एमडी की डिग्री हासिल की. मूर्ति ब्रिग़म में हॉस्पिटल में काम करते थे और डॉक्टर्स फ़ॉर अमेरिका के सह संस्थापक हैं. वाशिंगटन डीसी-स्थित यह संस्था 16,000 डॉक्टरों मेडिकल छात्रों का समूह है जो सस्ते और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं को सर्वसुलभ कराने की बात को जोर-शोर से उठाता है. उनके इस समूह डॉक्टर्स फ़ॉर अमेरिका का मूल नाम डॉक्टर्स फ़ॉर ओबामा था और इसने 2008 और 2012 में ओबामा के चुनाव अभियान में मदद की थी.

मूर्ति को 2011 में चिकित्सा से संबंधित एक एडवाइज़री ग्रुप का सदस्य बनाया गया था. वो ट्रायल नेटवर्क्स के 2007 से सह-संस्थापक और चेयरमैन भी रह चुके हैं जो पहले एपेरनिकस के नाम से जाना जाता था. अमेरिका में शक्तिशाली बंदूक लॉबी के भारी विरोध के बावजूद ओबामा ने उन्हें 2014 में सर्जन जनरल नियुक्त किया था. उस समय उनकी उम्र मात्र 37 साल थी. हाउस में वोटिंग के बाद अमेरिकी सीनेट ने उनकी नियुक्ति को हां कह दिया था.

सर्जन जनरल के रूप में मूर्ति सार्वजनिक स्वास्थ्य के मुद्दे पर अमेरिका के शीर्ष प्रवक्ता थे. बोरिस लुश्नीयक ने उनसे पहले कार्यवाहक सर्जन जनरल के पद पर काम किया था. अमेरिका की बहुत ही शक्तिशाली बंदूक लॉबी के भारी विरोध ने मूर्ति की नियुक्ति को राष्ट्रपति बराक ओबामा के लिए मुश्किल कार्य बना दिया था. दोनों ही पार्टियों के सांसदों ने सवाल उठाया था कि मूर्ति इस पद के योग्य नहीं हैं और उनके पास जरूरी अनुभव नहीं है और यह भी कि चूंकि उन्होंने ओबामा को चुनाव जीतने में मदद की थी और उन्होंने राष्ट्रपति के हेल्थ-केयर बिल का समर्थन किया था जिसकी वजह से वो एक ही पार्टी से जुड़े समझे जा सकते हैं. अगर बाइडेन दुनिया के सबसे शक्तिशाली पद पर बैठने में कामयाब हो जाते हैं तो कर्नाटक में डॉक्टर मूर्ति के क्षेत्र के लोगों के लिए बेहद खुशी का मौका होगा.
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