दिल्ली पहुंचे पोम्पियो, आज आतंकवाद से लेकर ट्रेड वार तक सभी मुद्दों पर होगी बात

अक्टूबर 2018 में रूस के साथ एस-400 ट्रायम्फ मिसाइल खरीदने के बाद भी अमेरिका ने भारत के साथ रिश्ते तल्‍ख कर लिए थे. इसके बाद कई मसलों पर तल्‍खी बढ़ती चली गई. जानिए अमेरिका विदेश मंत्री की भारत यात्रा से क्या चाहता है?

News18Hindi
Updated: June 26, 2019, 12:42 PM IST
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अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो मंगलवार को भारत पहुंच चुके हैं. इसमें भारत और अमेरिका के दो प्रमुख नेता मिलकर आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच के रिश्ते की दिशा का रुख तय करेंगे. इनमें प्रमुख रूप से निवेश में बढ़ोतरी पर बात की जाएगी. इसके अलावा भारत के नये विदेश मंत्री एस. जयशंकर से बुधवार को माइक पॉम्पियो की मुलाकात होगी.

G-20 में पीएम मोदी और डोनांल्ड ट्रंप की मुलाकात पर होगा फैसला


अमेरिकी विदेश मंत्री की इसी यात्रा में इस बात की पृष्ठभूमि तैयार हो जाएगी कि इसी सप्ताह जापान में होने जा रही G-20 देशों की बैठक में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनांल्ड ट्रंप और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात होगी या नहीं.

क्यों उभरा है दोनों देशों में तनाव

अगर दोनों राष्ट्राध्यक्षों की मुलाकात होती है तो यह दोनों देशों के बीच  उभरे ट्रेड-वार को खत्म करने की दिशा में मील का पत्‍थर साबित हो सकती है. हालांकि, दोनों देशों में उभरे ट्रेड वार की वजह भी दोनों राष्ट्र प्रमुखों की ओर से घरेलू उत्पादन और अपने देश में सामान बनाने के अभियान हैं. पीएम मोदी का 'मेक इन इंड‌िया' और ट्रंप के 'मेक ग्रेट अमेरिका अगेन' के चलते ही दोनों देशों में ट्रेड-वार जैसी स्थिति बनी है. इसके साथ ही रूस से भारत के हथ‌ियार खरदीने और अमेरिका की ओर से चीनी सामान पर प्रतिबंध से भी दोनों देशों के बीच दूरी बढ़ी है.

भारत ने बढ़ाई टैरिफ
जून महीने की शुरुआत में भारत को 44 साल पहले मिला कारोबारी वरीयता का दर्जा अमेरिका की ओर से वापस ले लिया गया है. डोनाल्ड ट्रंप सरकार ने 5 जून से भारत के करीब 2000 उत्पादों को प्रवेश शुल्क में दी गई छूट को खत्म कर दिया था. इस फैसले से भारत के कुछ उत्पाद अमेरिकी बाजार में महंगे हो गए हैं. भारत की प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता प्रभावित हुई है.
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इसके बाद काबूली चने पर 30 फीसदी से बढ़ाकर ड्यूटी 70 फीसदी, मसूर दाल पर 30 फीसदी से बढ़ाकर 70 फीसदी तक सेब पर 50 फीसदी की जगह अब 75 फीसदी तक, साबूत अखरोट पर 30 फीसदी की बजाय 120 फीसदी, आयरन के फ्लैट रोल्ड प्रोडक्ट 15 फीसदी तक इसी तरह मूंगफली पर भी टैक्स बढ़ाया गया. इसके बाद से दोनों देशों के बीच ट्रेड वार शुरू हो गई थी.

ई-कॉमर्स को लेकर तनातनी, लेकिन अमेरिका हुआ नरम
अमेरिका ने भारत को बताया था कि वह डेटा स्टोरेज की जरूरत वाले देशों के लिए H-1B वीजा प्रोसेस को बैन करने पर विचार कर रहा है. H-1B कुशल विदेशी श्रमिकों के लिए अमेरिकी वीजा जारी करता है. विदेश विभाग के एक प्रवक्ता ने कहा, 'ट्रंप प्रशासन के पास उन राष्ट्रों पर रोक लगाने की योजना नहीं है, जो विदेशी कंपनियों को स्थानीय स्तर पर डेटा स्टोर करने के लिए रोक रहे हैं.' हालांकि अमेरिकी विदेश विभाग ने बाद में कहा कि ट्रंप प्रशासन के पास उन देशों के लिए H-1B वीजा जारी करने को कम करने कोई योजना नहीं है.

हुवावे को लेकर तनातनी
अमेरिका ने चीन की बड़ी टेलीकॉम कंपनी हुवावे और उसकी मुख्‍य वित्‍तीय अधिकारी मेंग वानझू के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज कराए थे. इन पर बैंक जालसाजी, न्‍याय में रुकावट डालने और अमेरिकी कंपनी टी मोबाइल की तकनीक चुराने के बाद 23 मामले दर्ज कराने बाद अमेरिका ने चीन पर कई तरह के प्रतिबंध लगा दिया था. इससे एशियाई देशों के साथ अमेरिका रिश्ते तल्ख हो गए थे. इसमें सबसे बड़ी भारत के सामने ये खड़ी हो गई थी कि ये चीनी कंपनियों को भारत में 5जी के ट्रॉयल के लिए बुलाए या ना बुलाए?



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आतंकवाद पर एकजुट हैं अमेरिका-भारत
भारत सरकार देश की सुरक्षा को लेकर कई बड़े कदम उठा रही है. इनमें सबसे अहम अमेरिका के साथ हो रहे रक्षा सौदे हैं. मोदी सरकार दूसरे कार्यकाल के पूर्वाद्ध में ही अमेरिका से करीब 10 बिलियन अमेरिकी डॉलर यानी करीब छह खरब रुपये का रक्षा हथ‌ियारों के लिए अनुबंध करने जा रही है. दोनों देश आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में एक-साथ हैं.

रूस से हथ‌ियार खरीदने से नाराज था अमेरिका
अक्टूबर 2018 में रूस के साथ एस-400 ट्रायम्फ मिसाइल खरीदने के बाद भी अमेरिका ने भारत के साथ रिश्ते तल्‍ख कर लिए थे. हालांकि इसके बाद भी मार्च 2019 में भारत ने परमाणु क्षमता वाली हमलावर पनडुब्बी अकुला-1 को 10 साल के लिए पट्टे पर रूस से लिया था.
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