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अमेरिकी सांसद के चीन पर गंभीर आरोप, कहा- खुद के बचाव के लिए बीजिंग ने महामारी के सबूत नष्ट किए

टॉम कॉटन चीन के खिलाफ कदम नहीं उठाने को लेकर यूएस के प्रेसिडेंट पर भी जमकर बरसे.

टॉम कॉटन चीन के खिलाफ कदम नहीं उठाने को लेकर यूएस के प्रेसिडेंट पर भी जमकर बरसे.

सीनेटर ने फॉक्स न्यूज को दिए साक्षात्कार में कहा कि जिन लोगों ने इसके खिलाफ आवाज उठाने की कोशिश की उन साक्ष्य और गवाहों या तो गायब कर दिए गए हैं या उन्हें मार दिया गया है. उनका कहना है कि इस महामारी के बारे में हमें कोई निश्चित उत्तर मिले इसकी संभावना बहुत कम रह गई है.

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    नई दिल्ली:  यूएस सीनेटर (US Senator) टॉम कॉटन ने चीन पर झूठ बोलने और कोविड-19 (Covid-19) से जुड़े तथ्यों को छिपाने का आरोप लगाया है. इसके साथ ही उन्होंने चीन (China) पर यह भी आरोप लगाया है कि बीजिंग (Beijing) इस महामारी के शुरुआत से ही बीमारी से जुड़े तथ्यों को मिटाने की कोशिश में लगा हुआ था. सीनेटर ने फॉक्स न्यूज को दिए साक्षात्कार में कहा कि जिन लोगों ने इसके खिलाफ आवाज उठाने की कोशिश की उन साक्ष्य और गवाहों या तो गायब कर दिए गए हैं या उन्हें मार दिया गया है. उनका कहना है कि इस महामारी के बारे में हमें कोई निश्चित उत्तर मिले इसकी संभावना बहुत कम रह गई है.

    सीनेटर ने डब्ल्यूएचओ के निदेशक को भी निशाने पर लेते हुए कहा कि वो काफी वक्त तक कोविड 19 को महामारी के होने की बात से इंकार करते रहे. उन्होंने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के निदेशक ने जिस लापरवाही के साथ महामारी की शुरुआत में काम किया और दुनिया को इसके खतरे से अंजान रखा इससे साफ जाहिर होता है कि निदेशक शुरू से ही चीन के कहने के अनुसार ही बात कर रहे थे. उन्होंने आरोप लगाया कि डब्ल्यूएचओ ने वुहान जांच में एक नकली दल को जांच के लिए भेजा था.

    अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप पर भी बरसे
    टॉम कॉटन चीन के खिलाफ कदम नहीं उठाने को लेकर यूएस के प्रेसिडेंट पर भी जमकर बरसे. उन्होंने कहा कि हम बहुत कुछ कर सकते थे और हम कुछ नहीं कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि अमेरिका के लोगों ने जो बाइडेन और कांग्रेस के सदस्य को इसलिए चुना ताकि वो बेहतर फैसला लें लेकिन, ऐसा होता दिखा नहीं रहा है.

    हाल ही में चीन के राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग ने डब्ल्यूएचओ की दूसरी दौर की जांच की योजना को नकार दिया था. बाद में अमेरिका ने चीन के इस कदम को दुनिया के लिए खतरनाक करार दिया था. इससे पहले डब्ल्यूएचओ के प्रतिनिधित्व में वैज्ञानिकों का एक दल चीन में वायरस की उत्पत्ति की जांच के लिए गया था. जिससे तस्वीर साफ हो सके कि चीन किस तरह की शोध में शामिल था, लेकिन वैज्ञानिकों को वहां जांच में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा और निष्पक्ष जांच नहीं हो सकी.

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