मुसलमानों पर चीन का अत्याचार, अमेरिका ने तीन अधिकारियों पर लगाया बैन

मुसलमानों पर चीन का अत्याचार, अमेरिका ने तीन अधिकारियों पर लगाया बैन
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (फाइल फोटो)

जिनजियांग चीन का सबसे बड़ा प्रांत है. जहां बड़े पैमाने पर उइगर मुस्लिम (Uighurs Muslims) रहते हैं. पिछले कुछ सालों से योजनाबद्ध तरीके से चीन इन उइगर मुस्लिमों के दमन में लगा है.

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वॉशिंगटन. अमेरिका और चीन के बीच तनातनी का दौर लगातार जारी है. कोरोना वायरस से लेकर भारत के साथ सीमा विवाद, अमेरिका (America) हर मुद्दे पर चीन को घेरने में लगा है. गुरुवार को चीन ने अमेरिका के तीन अधिकारियों पर बैन लगा दिया. वजह है चीन में उइगर मुसलमानों (Uighurs Muslims) के खिलाफ अत्याचार. पिछले दिनों अमेरिकी (US) सीनेट ने एक प्रस्ताव पारित कर उइगर मुसलमानों पर हो रहे जुल्म पर चीन से जवाब मांगा था. अमेरिका की सीनेट में ये प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हो गया था. बता दें कि कोरोना संक्रमण (Coronavirus) के चलते उइगर मुसलमानों पर जुल्म की कई ख़बरें चीन से आ रही हैं.

इन अधिकारियों पर लगा बैन
चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़े इन अधिकारियों में चेन कुआंगू, झु हाइलुन और वांग मिंगशान शामिल हैं. प्रतिबंध लगने के बाद ये अधिकारी ओर इनके परिवार के सदस्य अब अमेरिका में प्रवेश नहीं कर पाएंगे. बता दें कि मैग्निट्स्की अधिनियम के तहत ये बैन लगाया गया है. इस कानून के तहत अमेरिकी सरकार को दुनिया भर में मानवाधिकार उल्लंघन करने वालों को किसी भी अमेरिकी संपत्ति, अमेरिकी यात्रा प्रतिबंध और उनके साथ व्यापार करने वाले अमेरिकियों पर प्रतिबंधों की अनुमति देता है.

चीन का अत्याचार
चीन की सरकार देश में उइगर मुस्लिम आबादी पर अंकुश लगाने के लिए बेहद आक्रामक रुख अपनाए हुए है. चीन ने मुस्लिमों की आबादी को कंट्रोल में रखने के लिए बड़े पैमाने पर एक अभियान चलाया हुआ, जिसके तहत न सिर्फ उइगर समुदाय के पुरुषों-महिलाओं की जबरदस्ती नसबंदी की का रही है बल्कि उन्हें बच्चे पैदा करने से भी रोका जा रहा है.



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चीन चाहता है खत्म हो उइगर मुसलमानों की पहचान
जिनजियांग चीन का सबसे बड़ा प्रांत है. जहां बड़े पैमाने पर उइगर मुस्लिम रहते हैं. पिछले कुछ सालों से योजनाबद्ध तरीके से चीन इन उइगर मुस्लिमों के दमन में लगा है. चीन को लगता है कि उइगर मुसलमान ना तो अपने कल्चर को छोड़ने को तैयार हैं और ना ही धर्म और ना ही अपनी भाषा. इसे चीन अपने देश के लिए बड़ी मुश्किल मानता है. लिहाजा वो बड़े पैमाने पर वो सबकुछ कर रहा है, जिससे अगले कुछ सालों में उइगर मुसलमानों की अपनी अलग पहचान चीन हमेशा हमेशा के लिए खत्म हो जाए.
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