अच्छी खबर! कोरोना वैक्सीन बनते ही 4 अरब खुराक तैयार कर देगी ये दवा कंपनी

अच्छी खबर! कोरोना वैक्सीन बनते ही 4 अरब खुराक तैयार कर देगी ये दवा कंपनी
कोरोना की वैक्सीन मिलेगी सबको

बड़ी फार्मा कंपनी और टॉप लेवल के मैन्युफैक्चरिंग एक्सपर्ट ने दावा किया है कि कोरोना की वैक्सीन (Coronavirus Vaccine) बनते ही वे इसकी 4 अरब खुराक तैयार करने की क्षमता रखते हैं.

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लंदन. विश्व की बड़ी फार्मा कंपनी और टॉप लेवल के मैन्युफैक्चरिंग एक्सपर्ट ने दावा किया है कि कोरोना की वैक्सीन (Coronavirus Vaccine) बनते ही वे इसकी 4 अरब खुराक तैयार करने की क्षमता रखते हैं. बॉयोफार्मा एग़्जिक्यूटिव जेम्स रॉबिनसन ने कहा कि 'कोएलिशन फ़ॉर एपिडेमिक प्रिपेयर्डनेस इनोवेशन' (सीईपीआई) नाम का संगठन कोरोना वैक्सीन (Covid-19 Vaccine) तैयार करने की नौ परियोजनाओं को अपना समर्थन दे रहा है. इस संगठन का कहना है कि कोरोना वैक्सीन की चार अरब खुराक का उत्पादन करने की क्षमता है.

इस समूह के एक टॉप लेवल के मैन्युफैक्चरिंग एक्सपर्ट ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि चार अरब खुराक तैयार करने की क्षमता रखने वाली कंपनियों की पहचान कर ली गई है. उनका कहना है कि सीईपीआई की योजना हरेक वैक्सीन के लिए दो या तीन उत्पादन संयंत्रों को सुनिश्चित करने की है. उन्होंने कहा, "फिलहाल हम जानते हैं कि हमारी जितनी क्षमता है, उससे दो अरब खुराकों का उत्पादन किया जा सकता है. साल 2021 के आख़िर तक के लिए यही हमारी न्यूनतम लक्ष्य भी है." ये समूह वैक्सीन के वितरण के लिए आठ से दस क्षेत्रीय केंद्र बनाने की योजना पर काम कर रहा है. जेम्स रॉबिनसन कहते हैं कि ऐसा करने पर हमें सब कुछ एक ही जगह से ही करना होगा. हमारी कोशिश इसे दुनिया भर में पहुंचाने की है.





जैसे ही मंजूरी मिली शुरू होगा उत्पादन
बता दें कि अभी तक कोरोना महामारी के लिए किसी वैक्सीन को अंतिम मंज़ूरी नहीं मिली है लेकिन इसके बावजूद सीईपीआई उत्पादन और सप्लाई चेन के इंतज़ाम को दुरुस्त करने में लगा हुआ है ताकि ये सुनिश्चित किया जा सके कि कोरोना वायरस वैक्सीन का वितरण दुनिया भर में बराबर तरीके से हो. 'कोएलिशन फ़ॉर एपिडेमिक प्रिपेयर्डनेस इनोवेशन' का मुख्यालय नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में है. दुनिया की 14 देशों की सरकारें, बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन और ब्रिटेन का वेलकम ट्रस्ट इसका समर्थन कर रहे हैं. सीईपीआई ने कोविड-19 की वैक्सीन की खोज के लिए नौ रिसर्च समूहों के साथ करार किया है और इसके लिए 829 मिलियन डॉलर का निवेश किया गया है. इस समूह को उम्मीद है कि कुछ इनमें से कुछ तो वैक्सीन तैयार करने में कामयाब होंगे.

इनमें इनोवियो फार्मास्युटिकल्स, यूनिवर्सिटी ऑफ़ क्वींसलैंज और सीएसएल लिमिटेड. क्यूरवैक, मॉडर्ना इंक और अमेरिका, नोवावैक्स इंक, यूनिवर्सिटी ऑफ़ ऑक्सफोर्ड और एस्ट्राज़ेनेका, क्लोवर बॉयोफार्मास्युटिकल्स, यूनिवर्सिटी ऑफ़ हॉन्ग कॉन्ग, इंस्टीट्यूट पास्टिअर की अगुआई वाली कंसोर्शियम और यूनिवर्सिटी ऑफ़ पिट्सबर्ग और थेमिस बायोसाइंस जैसे विश्वविद्यालय और दवा बनाने वाली कंपनियां शामिल हैं. जेम्स रॉबिनसन ने बताया कि सीईपीआई ने उत्पादन क्षमता सुनिश्चित करने के लिए शुरुआती कदम उठाए हैं और इसके लिए 200 से ज़्यादा दवा और वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों से करार किया गया है. वो कहते हैं, "बहुत से लोगों को नहीं लगता कि चार अरब खुराक मुमकिन है. लेकिन मैं इस पर यकीन करता हूं." रॉबिनसन सनोफी और मर्क जैसी दुनिया की कुछ सबसे बड़ी वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों के साथ काम कर चुके हैं.

WHO ने जताई थी चिंता
कई देशों के कोरोना की वैक्सीन (Coronavirus Vaccine) बनाने के दावों के बीच वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) ने चेतावनी दी है कि अगर इस साल कोविड-19 की वैक्सीन बन भी जाती है तो उसे लोगों तक पहुंचने में ढाई साल से ज्यादा का वक़्त लग सकता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार अभी तक कोई भी ऐसी वैक्सीन नहीं बनी है जिसे कोरोना वायरस वैक्सीन का नाम दिया जा सके. WHO के विशेष दूत डॉ. डेविड नाबारो ने चेतावनी दी है कि दुनिया में सभी तक टीका पहुंचने में ढाई साल से भी ज्यादा का समय लग सकता है. ब्रिटिश चिकित्सक ने कहा कि अगर साल के अंत तक टीका आ भी जाता है तो सुरक्षा और प्रभाव जांचने के लिए कुछ समय लगेगा. डेविड के मुताबिक देशों को वैक्सीन के उत्पादन का भी इंतजाम करना शुरू कर देना चाहिए क्योंकि बड़ी जनसंख्या वाले देशों में वितरण काफी मुश्किल काम है.

 
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