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वैक्सीन हराम या हलाल? इस देश में डॉक्टर के बाद मौलवियों की भी अनुमति जरूरी

सांकेतिक फोटो (pixabay)
सांकेतिक फोटो (pixabay)

Vaccine Update: राष्ट्रपति जोको विडोडो (Joko Widodo) का कहना है, 'इस बात को लेकर चिंता नहीं करनी चाहिए कि वैक्सीन हलाल है या नहीं. हम कोविड महामारी की वजह से एक आपातकालीन स्थिति में हैं.'

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 6, 2021, 11:44 PM IST
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जकार्ता. इंडोनेशिया (Indonesia), दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाला देश है. कोरोना वायरस (Corona Virus) से खासा प्रभावित भी है, लेकिन वैक्सीन को अनुमति मिलने की प्रक्रिया मौलानाओं पर अटकी हुई है. हालांकि, चीनी वैक्सीन निर्माता सिनोवैक (Sinovac) ने जुलाई में ही कह दिया था कि वैक्सीन में सुअर से जुड़ा कोई भी मटेरियल नहीं है. लेकिन कुछ मौलानाओं को अभी और जानकारियां चाहिए. एक ओर सरकार देश में वैक्सीन कार्यक्रम शुरू करने पर विचार कर रही है. वहीं, दूसरी ओर सिनोवैक वैक्सीन को लेकर उठ रहे हलाल और हराम के सवाल सरकार की तैयारियों को और मुश्किल बना रहे हैं.

इंडोनेशिया में करीब 8 लाख संक्रमण के मामले सामने आ चुके हैं. वहीं, 23 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. यहां हेल्थ अथॉरिटीज के सिनोवैक वैक्सीन की सुरक्षा को लेकर आश्वस्त होने के बाद हेल्थ वर्कर्स, सैनिकों और पुलिस कर्मियों को वैक्सीन लगाई जाएगी. न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस देश में वैक्सीन को उलेमा काउंसिल की अप्रूवल प्रक्रिया से गुजरना होगा. यह एक मुस्लिम मौलानाओं का एक समूह है, जो तय करता है कि इंडोनेशिया में कौन से प्रोडक्ट्स हलाल हैं.

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राष्ट्रपति जोको विडोडो का कहना है, 'इस बात को लेकर चिंता नहीं करनी चाहिए कि वैक्सीन हलाल है या नहीं. हम कोविड महामारी की वजह से एक आपातकालीन स्थिति में हैं.' उन्होंने कहा कि लोगों के मन से डर खत्म करने के लिए वो पहले खुद वैक्सीन लगवाएंगे. हालांकि, इंडोनेशिया के लोगों को अभी भी धार्मिक नेताओं से मिलने वाली अनुमति का इंतजार है.

एनवाईटी से बातचीत में इंडोनेशिया की सरकारी वैक्सीन निर्माता बायो फार्मा के प्रवक्ता बामबांग हेरियांतो ने कहा कि फार्मा प्रोडक्ट्स में सुरक्षा, प्रभावकारिता और गुणवत्ता के बाद हलाल सबसे जरूरी चीज होती है. माना जा रहा है कि उलेमा परिषद जल्द ही वैक्सीन के इस्तेमाल की अनुमति के मामले में आदेश या फतवा जारी कर सकता है.

यह मामला 2018 का है जब मीजल्स फैला था. यहां सरकार ने विश्व स्वास्थ्य संगठन की मदद से एक महत्वकांक्षी टीकाकरण कार्यक्रम शुरू किया, लेकिन एकमात्र बड़ी तादाद में उपलब्ध वैक्सीन में सुअरों से जुड़ी सामग्री मौजूद थी. इस वैक्सीन की समीक्षा करने के बाद उलेमा परिषद ने इसे हराम घोषित कर दिया था. हालांकि, आपातकाल स्थिति को देखते हुए इसके इस्तेमाल की अनुमति दे दी गई थी. मलेशिया और संयुक्त अरब अमीरात जैसे मुस्लिम बहुल देशों में इस्लामिक अथॉरिटीज ने सुअरों का अर्क होने के बावजूद वैक्सीन को अनुमति देने की बात कही है.
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