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'जल्‍द मिलेंगे' कहकर 60 साल के बुजुर्ग ने चुनी इच्‍छा मृत्‍यु, लाइलाज बीमारी से थे परेशान

'जल्‍द मिलेंगे' कहकर 60 साल के बुजुर्ग ने चुनी इच्‍छा मृत्‍यु, लाइलाज बीमारी से थे परेशान

कोलंबिया के विक्‍टर एस्‍कोबार ने चुनी इच्‍छामृत्‍यु. (Pic- AP)

कोलंबिया के विक्‍टर एस्‍कोबार ने चुनी इच्‍छामृत्‍यु. (Pic- AP)

कोलंबिया (Colombia) के 60 साल के बुजुर्ग विक्‍टर एस्‍कोबार (Victor Escobar) ने लाइलाज बीमारी से जूझने के कारण शुक्रवार को इच्‍छा मृत्‍यु (Euthanasia) को चुन लिया. उन्‍होंने सार्वजनिक रूप से इच्‍छा मृत्‍यु चनने का फैसला किया था. उन्‍होंने मरने से कुछ घंटे पहले उन्‍होंने अपने परिवार के साथ समय गुजारा था. उन्‍हें इंजेक्‍शन लगाकर मौत दी गई है.

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कैली (कोलंबिया). ‘मैं बहुत शांति महसूस करता हूं. मेरे साथ जो होने वाला है मुझे उससे डर नहीं लगता है. धीरे-धीरे ही किसी की बारी बाती है. इसलिए मैं अलविदा नहीं कहता, बल्कि कहूंगा कि जल्‍द मिलेंगे…’ ये शब्‍द कोलंबिया (Colombia) के उस 60 साल के बुजुर्ग के थे, जिन्‍होंने लाइलाज बीमारी से जूझने के कारण शुक्रवार को इच्‍छा मृत्‍यु (Euthanasia) को चुन लिया. उनका नाम विक्‍टर एस्‍कोबार (Victor Escobar) था. उन्‍होंने सार्वजनिक रूप से इच्‍छा मृत्‍यु चनने का फैसला किया था. उन्‍होंने मरने से कुछ घंटे पहले उन्‍होंने अपने परिवार के साथ समय गुजारा था.

एक दुर्लभ, दर्दनाक और लाइलाज बीमारी से जूझ रहे विक्टर एस्कोबार ने शुक्रवार को इच्‍छा मृत्‍यु को चुना था. वह कोलंबिया के पहले नागरिक बन गए, जिसे मौत के करीब न होने के बावजूद भी इच्छामृत्यु दे दी गई है. एस्कोबार ने इस हफ्ते कहा था, ‘मैं बहुत शांति महसूस करता हूं. मेरे साथ जो होने वाला है मुझे उससे डर नहीं लगता है. उन्होंने मुझे बताया कि पहले मुझे धीरे-धीरे बेहोश किया जाएगा तो मेरे पास अलविदा कहने का वक्त है. उसके बाद इच्छामृत्यु का इंजेक्शन दिया जाएगा जो दर्दरहित होगा- एक बहुत शांतिपूर्ण मौत. मुझे भगवान पर भरोसा है कि सब कुछ ऐसा ही होगा.’

उनके वकील लुइस गिराल्डो ने शुक्रवार शाम को बताया कि प्रक्रिया पूरी हो गयी है और एस्कोबार की मौत हो चुकी है. कोलंबिया की एक अदालत ने पिछले साल जुलाई में फैसला देते हुए इच्छा मृत्यु के नियमों में बदलाव किया था और उन लोगों के लिए भी इच्छा मृत्यु के दरवाजे खोल दिए थे जो एक गंभीर और लाइलाज बीमारी के कारण गहन शारीरिक और मानसिक पीड़ा झेल रहे हैं चाहे उनकी मौत करीब न हो. हालांकि, कैथोलिक चर्च इस फैसले के विरोध में है.

कैली में अपने अपार्टमेंट में एस्कोबार में गुरुवार को कहा था, ‘एक दरवाजा खुल गया है ताकि मेरे जैसे मरीज को गरिमापूर्ण तरीके से मरने का अवसर मिले.’ मॉर्फिन जैसी दवा भी उनके दर्द को कम नहीं कर पा रही थी और उन्होंने बताया कि अन्य दवाएं भी उनके शरीर पर असर नहीं कर पा रही थीं.

वह 2008 से बीमार थे, जब दो बार आघात आने से उनके आधे शरीर को लकवा मार गया था. हालांकि बाद में कुछ अंगों ने काम करना शुरू कर दिया लेकिन उन्हें सांस लेने में रुकावट पैदा करने वाली फेफड़ों की बीमारी, हाइपरटेंशन, डायबिटीज, गंभीर गठिया जैसे रोगों ने जकड़ लिया और एक दुर्लभ बीमारी भी हो गई थी, जिसमें पसलियां हड्डी से जुड़ जाती हैं जिससे दर्दनाक सूजन होती है.

कोलंबिया के रहने वाले विक्‍टर एस्‍कोबार के जीवित रहते हुए बनाए गए अंतिम वीडियो में वह मुस्‍कुराते हुए दिख रहे हैं. उनके साथ उनका परिवार है. उन्‍हें इच्‍छा मृत्‍यु के लिए जानलेवा इंजेक्‍शन लगाया गया था. उन्‍होंने डॉक्‍टरों और अपने वकील के सामने दम तोड़ा. उनका कहना था, ‘मैं चाहता हूं कि मेरी कहानी को जाना जाए क्योंकि यह मेरे जैसे मरीजों के लिए आराम करने के लिए एक खुला दरवाजा बनाने का मार्ग बनाता है.

अभी तक यूरोप के बेल्जियम, नीदरलैंड, लक्‍जमबर्ग और स्‍पेन में ही इच्‍छा मृत्‍यु का प्रावधान था. लेकिन अब इस सूची में कोलंबिया भी जुड़ गया है. हालांकि वहां इसकी प्रक्रिया काफी जटिल है. (इनपुट भाषा से भी)

Tags: Euthanasia

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