हैरत! दुनिया का एक रहस्यमयी पिरामिड, जहां ताली बजाने पर सुनाई देती है चिड़ियों की चहचहाहट

हैरत! दुनिया का एक रहस्यमयी पिरामिड, जहां ताली बजाने पर सुनाई देती है चिड़ियों की चहचहाहट
चिचेन इट्जा चिर्प पिरामिड (फाइल फोटो)

मेक्सिको (Mexico) के युकाटन इलाके में स्थित चिचेन इट्जा चिर्प पिरामिड (Pyramid) इतने खास हैं कि अगर कोई वहां ताली बजाता है, तो वह चिड़ियों की चहचहाहट में बदल जाती है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 31, 2020, 3:00 PM IST
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मैक्सिको. पूरे विश्व में ऐसी तमाम चीजें हैं जो अद्भुत और रहस्यमयी (Mystry) हैं. इन रहस्यों के बारे में आज तक कोई जान तक नहीं पाया. ऐसा ही एक रहस्य है दुनिया के सबसे पुराने पिरामिडों में से एक मैक्सिको (Mexico) के युकाटन इलाके में बने पिरामिडों में. इस पिरामिड को चिचेन इट्जा चिर्प के नाम से जाना जाता है. जिसे मैक्सिको की सबसे रहस्यमयी कलाकृति भी माना जाता है. ये पिरामिड मैक्सिको की सांस्कृतिक धरोहरों का केंद्र तो है ही साथ ही ये पिरामिड कई अजूबों से भरा पड़ा है. दरअसल, चिचेन इट्जा एक कोलंबियाई मंदिर है, जिसे माया जनजाति सभ्यता के लोगों ने बनवाया था.

इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत ये है कि यहां नीचे खड़ा होकर अगर कोई ताली बजाता है तो आवाज रिफ्लेक्ट हो जाती है और उसके बाद ये चिड़ियों की चहचहाहट में बदल जाती है. बता दें कि मैक्सिको का 'चिचेन इट्जा' मंदिर खूबसूरत निर्माण में से एक है, लेकिन इसकी सबसे रहस्यमयी बात यहां रिफ्लेक्ट होकर सुनाई देने वाली आवाज है. ध्वनि विशेषज्ञों के मुताबिक इस पिरामिड में ताली बजाने पर आवाज रिफ्लेक्ट होकर क्विजटल नामक पक्षी के आवाज की तरह आती है. यही नहीं अगर कई लोग एक साथ ताली बजाते हैं, तो आपको ऐसा लगेगा कि कई चिड़ियाएं बोल रही हैं. साल 1998 में कैलिफोर्निया के ध्वनि विशेषज्ञ डेविड लुबमैन ने चिचेन इट्जा पर शोध किया. उनके बाद कई ध्वनि विशेषज्ञ यहां शोध करने आए लेकिन वे सभी किसी नतीजे पर नहीं पहुंचे. आज तक कोई वैज्ञानिक ये नहीं बता पाया कि चिचेन इट्जा में ताली बजाने पर चिड़ियों की तरह आवाज क्यों रिफ्लेक्ट होती है. इसके अलावा चिचेन इट्जा की एक खासियत ये भी है कि अगर कोई इसके बेस में खड़े होकर ड्रम बजाए या चिल्लाए तो हर बार अलग-अलग तरह की आवाज रिफ्लेक्ट होती है.

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इसलिये किया पिरामिड का निर्माण
ऐसे में यह कहना कठिन है कि माया सभ्यता के लोगों को इन सब बातों की जानकारी थी या उन्होंने ऐसी आवाजों को रिफ्लेक्ट होने के लिए इस पिरामिड का निर्माण किया था. इसके अलावा इस पिरामिड के एक तरफ की सीढ़ियों पर अगर सूरज की रोशनी पड़ती है, तो वे सांप की आकृति की नजर आती हैं. यही नहीं बेल्जियम यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक मीको डिक्लर्क ने भी इस पिरामिड पर शोध किया. इस शोध में उन्होंने बताया कि पिरामिड की सीढ़ियां चढ़ने पर ऐसी आवाज निकलती है, जैसे बाल्टी में बारिश का पानी गिर रहा हो. बता दें कि माया सभ्यता के लोग बारिश के देवता को पूजते थे, इसलिए यह को-इंसिडेंट नहीं हो सकता है. इस पिरामिड से तरह-तरह की धुनियां सुनाई देती हैं.
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