पुतिन की इस पहल को तैरती तबाही बता रहे हैं जानकार, जानें वजह

रूस के आधिकारिक विभाग ने इसे महज एक न्यूक्यिर पावर प्लांट बताया है, लेकिन एक्सपर्ट इसे कुछ और ही बता रहे हैं...

News18Hindi
Updated: July 9, 2019, 10:55 AM IST
पुतिन की इस पहल को तैरती तबाही बता रहे हैं जानकार, जानें वजह
पर्यावरणों के जानकारों का मानना है कि अर्काटिक एक बेहद स्वच्छ जगह है. वहां परमाणु संयंत्र के ले जाने से खतरा काफी बढ़ जाता है.
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Updated: July 9, 2019, 10:55 AM IST
रूस आर्कट‌िक सर्किल में परमाणु संयंत्र बिठाने की अपनी बहुप्रतिक्षित योजना को अंजाम देने जा रहा है. इसके तहत रूस से करीब 65 सौ किलोमीटर तक समुद्र के रास्ते शिप पर लादकर इस परमाणु संयंत्र ले जाएगा. इसका नाम अकैडेमिक लोमोनोसोव है. जबिक ग्रीनपीस इंटरनेशनल इसे तैरती तबाही (फ्लोटिंग चेरनोबिल) कह रहा है. रूस इसे एक ऊर्जा स्रोत कहता है, जिसका इस्तेमाल वह उचित कामों के लिए करेगा. लेकिन ज्यादातर पर्यावरण के जानकारों ने इसे तबाही बताया है.

क्या है रूस का अकैडेमिक लोमोनोसोव


रूस के आधिकारिक विभाग ने इसे महज एक न्यूक्यिर पावर प्लांट बता रहा है. इससे आम तौर पर बिजली बनाने आदि का काम किया जाता है. रूस का कहना है कि इससे किसी को भी कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा. असल में करीब 20 साल से रूस इस संयंत्र को अर्काटिक ले जाने की ताक में था, लेकिन इसे तैयार करने में समय लग रहा था.

जानकारी के अनुसार पुतिन सरकार ने अमेरिका समेत दुनियाभर में परमाणु हथ‌ियारों को लेकर चल रही मुहिम के बाद इस प्रोजेक्ट पर फोकस बढ़ा दिया और दो सालों के भीतर बाकी काम को पूरा कर लिया गया. इस वक्त इस संयंत्र को करीब 472 मीटर प्‍लेटफॉर्म पर मुरमांस्क नाम के जगह पर रखा गया है. जल्द ही इसे रूस के पेवेक बंदरगाह से आर्कटिक के लिए भेजे जाने की संभावना जताई गई है.



ठीक इसी तरह के संयंत्र से पहले मच चुकी है तबाही
साल 1986 में रूस अविभाजित सोवियत संघ हुआ करता था. तभी यूक्रेन में एक इसी तरह के न्यूक्लियर पावर प्लांट में सेफ्टी टेस्ट के दौरान धमाका हुआ था. इसके बेहद भयावह प्रभाव पड़े थे. रुस इसमें 31 की मौत और रेडिएशन के चलते करोड़ों लोगों की जान पर खतरा बन जाने की सूचना देता रहा है. लेकिन यूएन इसी घटना के बारे में कहता है कि साल रेडिएशन के चलते सोवियत संघ में 9 हजार से ज्यादा मौतें हुई थीं. जबकि ग्रीनपीस इसके व्यापक प्रभावों को देखता हैं. ग्रीनपीस के अनुसार साल दर साल इसी एक घटना के चलते लोगों की मौतें हुईं. इसमें अब तक दो लाख से ज्यादा लोग मर चुके हैं.
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दोबारा यह परमाणु संयंत्र क्यों लगाना चाहता है रूस
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का मानना है कि अर्काटिक में काफी तेल, खनिज व गैस मौजूद है. इनकी खोज लगातार जारी है. लेकिन खोज के लिए आवश्यक बिजली उपलब्‍ध नहीं हो पा रही है. यह परमाणु संयंत्र इसी बिजली की कमी की आपूर्ति के लिए लगाया जा रहा है. लेकिन दूसरे देश और पर्यावरण के जानकार इसके दूसरे और तीसरे मायने भी निकाल रहे हैं. असल में रूस के अर्काटिक वाले क्षेत्र में आबादी बेहद कम है. जबकि इस क्षेत्र का रूस की कुल जीडीपी में एक चौथाई योगदान है. ऐसे में अगर किसी क्षेत्र से पहले देश को काफी फायदा हो रहा है तो उस क्षेत्र में किसी तबाही को भेजने का मायने लोगों को समझ नहीं आ रहे हैं.

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क्या कहते हैं पर्यावरण के जानकार
पर्यावरणों के जानकारों का मानना है कि अर्काटिक एक बेहद स्वच्छ जगह है. वहां परमाणु संयंत्र के ले जाने से खतरा काफी बढ़ जाता है. जबकि वहां कभी किसी तरह की उथल-पुथल मचने से समुद्र के रास्ते पूरी दुनिया पर इसका असर दिख सकता है. ऐसे में इस संयंत्र को वहां ना जाने देने के पक्ष में हैं. जबकि समुद्र के रास्त एटमी संयंत्र को ले जाने का भी पुरजोर विरोध कर रहे हैं.
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