राष्ट्रपति चुनाव: अमेरिका में 1845 से ही नवंबर के पहले मंगलवार को होती है वोटिंग

अमेरिका में 3 नवंबर को चुनाव होने जा रहे हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर :AP)
अमेरिका में 3 नवंबर को चुनाव होने जा रहे हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर :AP)

US ELECTION 2020: अमेरिका में अगले महीने 3 नवंबर (पहला मंगलवार) को राष्ट्रपति चुनाव होगा. ऐसे में देश में चुनाव होने में 15 दिन भी नहीं बचे हैं और दोनों मुख्य राजनीतिक दल अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए पुरजोर कोशिश कर रहे हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 19, 2020, 12:58 PM IST
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वाशिंगटन. अमेरिका (America) में इन दिनों चुनावी शोर है. रिपब्लिकन (Republican) और डेमोक्रेटिक (Democratic) दोनों ही मुख्य राजनीतिक दल चुनावी अभियान (Political Campaign) में जुट गए हैं. कोरोनावायरस (Coronavirus) को मात देकर मौजूदा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) चुनाव प्रचार करते नजर आ रहे हैं. वहीं डेमोक्रेटिक पार्टी के राष्ट्रपति उम्मीदवार जो बाइडेन (Jo Biden) ने भी जोरशोर से चुनाव अभियान चला रहे हैं.

175 साल से तय है चुनाव की तारीख

अमेरिका में पहले मंगलवार को राष्ट्रपति चुनाव (President Election) होता है. अमेरिका में 1845 से ही एक तय तारीख पर ही राष्ट्रपति चुनाव होता आ रहा है. अमेरिका में अगले महीने 3 नवंबर (पहला मंगलवार) को राष्ट्रपति चुनाव होगा. ऐसे में देश में चुनाव होने में 15 दिन भी नहीं बचे हैं और दोनों मुख्य राजनीतिक दल अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए पुरजोर कोशिश कर रहे हैं.



दो बार राष्ट्रपति बनने का अधिकार
अमेरिका में अध्यक्षात्मक प्रणाली (Presidential System) है. इस प्रणाली के तहत एक उम्मीदवार को देश का दो बार राष्ट्रपति बनने का अधिकार होता है. डोनाल्ड ट्रंप इस चुनाव के बाद फिर कभी राष्ट्रपति चुनाव लड़ने के योग्य नहीं होंगे. भारत जैसे देशों में मौजूद संसदीय प्रणाली इसके विपरित है. इस प्रणाली में राष्ट्रपति को सीधे जनता चुनती है लेकिन भारत में पार्टी के अंदर के लोग देश का प्रधानमंत्री चुनते हैं.

नेशनल कन्वेंशन चुनती है राष्ट्रपति उम्मीदवार

रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक दोनों ही पार्टी प्रत्येक राज्य में प्राइमरीज़ व अन्य अधिकार रखती हैं. दोनों ही दल की अपने राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार का फैसला करने के लिए अपने मतदान कानून और प्रक्रियाएं होती है. नेशनल कन्वेंशन में चुनकर आए उम्मीदवार को डेलिगेट्स कहते हैं और इनका चुनाव अगस्त में ही हो जाता है. इसमें राष्ट्रपति उम्मीदवार का चुनाव होता है. नेशनल कन्वेंशन पार्टी का राष्ट्रपति उम्मीदवार का चयन करती है. नेशनल कन्वेंशन अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग तारीखों को होती है. यह प्रक्रिया पूरे महीने तक चलती रहती है. इसके बाद जनता सीधे राष्ट्रपति को चुनती है.

कोरोना वायरस का चुनाव प्रकिया पर प्रभाव

दुनियाभर में अमेरिका में सबसे अधिक कोरोना के मामले हैं. ऐसे में देश के सामने खतरनाक वायरस के वातावरण के बीच चुनावी प्रक्रिया को सुरक्षा के साथ पूरा करने की चुनौती है. कोरोनावायरस की वजह से चुनाव प्रणाली में कोई बदलाव तो नहीं किया गया है लेकिन इसमें देरी हो रही है. क्योंकि जिस वक्त चुनाव की प्राइमरीज़ तय की जानी थी उस वक्त देश में कोविड-19 का प्रकोप अपने चरम पर था और रोजाना सैंकडों-हजारों लोग दम तोड़ रहे थे.

कोरोना के साये में राजनीतिक अभियान

वायरस के कारण राजनीतिक अभियान का अलग स्वरुप देखने को मिल रहा है. डेमोक्रेटिक पार्टी के राष्ट्रपति उम्मीदवार जो बाइडेन चुनावी अभियान के लिए वर्चुअल फंडरेजर्स (Virtual Fundraisers) के सहारे हैं. वहीं, डोनाल्ड ट्रंप कोरोनावायरस के पहले से ही इसकी तैयार कर चुके थे. रिपोर्ट के मुताबिक, जो बाइडेन का वर्चुअल चुनावी आभियान उन्हें राष्ट्रपति चुनाव की रेस में आगे खड़ा करता है. ट्रंप के कोरोना पॉजिटिव होने पर भी वह बड़े पैमाने पर अभियान रैलियों में भाग लेने के लिए उत्सुक थे.

पॉपुलर वोट और इलेक्टोरल कॉलेज वोट

अमेरिका में जनता इलेक्टोरल कॉलेज के सदस्यों के लिए वोट करती है. बता दें कि अमेरिका की चुनाव प्रणाली के तहत पूरे देश में एक ही दिन चुनाव होता है. इस दिन राष्ट्रपति पद के चुनाव के साथ काउंसलर्स और ससंद के सदस्यों के लिए भी चुनाव होता है. इलेक्टोरल कॉलेज के सदस्यों पर कोई संवैधानिक बंदिश नहीं होती है लेकिन वे ही अपनी पार्टी के उम्मीदवार को वोट करते हैं. जिस उम्मीदवार को 270 से ज्यादा मतदान हासिल होते हैं वह चुनाव जीत जाता है. इसके बाद अगले साल 20 जनवरी को शपथ ग्रहण समारोह होता है.

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अमेरिका में अनुपस्थित मतदाता (Absentee Ballot) के लिए मतदान करने के लिए पोस्टल वोटिंग का प्रावधान है यानी जो कोई व्यक्ति शारीरिक रूप से चुनाव के दिन मतदान केंद्र पर उपस्थित नहीं हो सकता है वे मेल के जरिए अपना वोट भेज सकता है. ऐसे में कोरोना के कारण अधिक से अधिक लोग इस प्रणाली के तहत मतदान कर कर रहे हैं. वहीं, डोनाल्ड ट्रम्प ने प्रक्रिया की सुरक्षा और सुरक्षा के बारे में अपनी चिंता जताई थी, लेकिन लोग फिर भी इस प्रक्रिया को अपना रहे हैं क्योंकि देश में 2 लाख से ज्यादा लोग कोरोना से दम तोड़ चुके हैं.
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