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क्या है FTAF, ग्रे लिस्ट में कब से है पाकिस्तान और क्या होगा इसका असर, यहां जानें सब कुछ

क्या है FTAF, ग्रे लिस्ट में कब से है पाकिस्तान और क्या होगा इसका असर, यहां जानें सब कुछ

एफएटीएफ की तरफ से उसे ग्रे लिस्ट में रखने से उसकी इकॉनमी कंडीशन और भी बदतर हो जाएगी. (फाइल फोटो)

एफएटीएफ की तरफ से उसे ग्रे लिस्ट में रखने से उसकी इकॉनमी कंडीशन और भी बदतर हो जाएगी. (फाइल फोटो)

एफएटीएफ (FATF) ने पाकिस्तान (Pakistan) को 2018 में ग्रे लिस्ट में डाला था. पाकिस्तान को उम्मीद थी कि उसे 2021 में एफएटीएफ की तरफ से उसे राहत मिल जाएगी लेकिन इस बार भी ऐसा नहीं हुआ. इससे पहले एफएटीएफ ने 2018, 2019,2020 और 2021 अप्रैल में भी रिव्यू किया था.

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    नई दिल्ली: गुरुवार को पाकिस्तान को एक बड़ा झटका लगा. आर्थिक तंगी झेल रहे पाकिस्तान (Pakisatn) को फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (Financial Action Task) से राहत नहीं मिली. एफएटीएफ (FATF) ने पाकिस्तान को 2022 तक ग्रे लिस्ट में बनाए रखने का निर्णय लिया है. एफएटीएफ की इस ग्रे लिस्ट में पाकिस्तान के अलावा तुर्की, ईरान, उत्तर कोरिया समेत कई देश शामिल हैं. ग्रे लिस्ट (FATF Grey List) में जाने वाले देशों पर कई तरह की पाबंदियां लगाई जाती हैं. तो आइए जानते हैं कि आखिर क्या है ये एफएटीएफ और यह किस तरह से काम करती है.

    फाइनेंशियल एक्शन टॉस्क फोर्स एक अंतर सरकारी संस्था है. इसे जी7 समूह के देशों के द्वारा फ्रांस की राजधानी पेरिस में 1989 में स्थापित किया गया था. इस संस्था का मुख्य रूप से काम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धन शोधन यानी मनी लॉन्ड्रिंग, हथियारों के लेन देन और आतंकवादी संगठनों को वित्तीय सहायता देने वालों पर नजर रखना है. एफएटीएफ की एक साल में तीन बार बैठक होती है.

    पैसों के दुरुपयोग पर रखती है नजर
    एफएटीएफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वित्तीय प्रणाली और माध्यमों का दुरुपयोग होने से बचाने और ऐसे लोगों की पहचान करने के लिए काम करती है जो गलत कामों के लिए पैसों का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस्तेमाल करते हैं. एफएटीएफ पहले सिर्फ मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों की निगरानी करता था लेकिन 2001 के बाद इसने आतंकवादी वित्तपोषण से निपटने के प्रयासों को भी अपनी सूची में शामिल कर लिया.

    यह भी पढ़ें- इमरान खान की बढ़ी मुश्किल, FATF की ग्रे लिस्ट में बना रहेगा पाकिस्तान, आतंकियों के खिलाफ एक्शन न लेने की सजा

    एफएटीएफ ने पाकिस्तान को 2018 में ग्रे लिस्ट में डाला था. पाकिस्तान को उम्मीद थी कि उसे 2021 में एफएटीएफ की तरफ से उसे राहत मिल जाएगी लेकिन इस बार भी ऐसा नहीं हुआ. इससे पहले एफएटीएफ ने 2018, 2019,2020 और 2021 अप्रैल में भी रिव्यू किया था लेकिन पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट से बाहर नहीं किया गया. एफएटीएफ का मानना है कि पाकिस्तान उसकी सिफारिशों को लागू करने और उन पर काम करने में पूरी तरह से विफल रहा है.

    पाकिस्तान की इस समय आर्थिक स्थिति बिल्कुल खराब है और एफएटीएफ की तरफ से उसे ग्रे लिस्ट में रखने से उसकी इकॉनमी कंडीशन और भी बदतर हो जाएगी. एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में बने रहने से पाक को आईएमएफ, विश्व बैंक और यूरोपीय संघ की तरफ से आर्थिक मदद बिल्कुल न के बराबर होगी और इसका सीधा असर उसकी अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा. जब एफएटीएफ ने पाकिस्तान को पहली बार ग्रे लिस्ट में जून 2018 में डाला था तब संस्था का मकसद पाकिस्तान में होने वाली टेरर फंडिंग पर रोक लगाना था.

    Tags: Money Laundering, Pakistan, Terror Funding

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