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प्रेमदासा vs राजपक्षे: श्रीलंका के राष्ट्रपति चुनाव में किसकी जीत से होगा भारत को फायदा?

News18Hindi
Updated: November 16, 2019, 1:45 PM IST
प्रेमदासा vs राजपक्षे: श्रीलंका के राष्ट्रपति चुनाव में किसकी जीत से होगा भारत को फायदा?
श्रीलंका में चुनाव: कौन मारेगा बाज़ी?

इस चुनाव में सत्तारूढ़ पार्टी के उम्मीदवार और आवासीय मंत्री सजीथ प्रेमदासा (Sajith Premadasa) और पूर्व रक्षा सचिव एवं विपक्ष के नेता गौतबाया राजपक्षे (Gotabaya Rajapaksa) के बीच कड़ा मुकाबला है.

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  • Last Updated: November 16, 2019, 1:45 PM IST
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(उदय सिंह राणा)

कोलंबो. श्रीलंका (Sri Lanka) में राष्ट्रपति पद के लिए आज मतदान हो रहे हैं. वोटिंग में 1.6 करोड़ लोग हिस्सा ले रहे हैं. इस चुनाव पर कई देशों की नज़रे टिकी हैं. हाल के दिनों चीन और श्रीलंका की बढ़ती नजदीकियों के चलते भारत (India) भी इस चुनाव में काफी दिलचस्पी ले रहा है. भारत के श्रीलंका से हमेशा अच्छे रिश्ते रहे हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि भारत के लिहाज से किसकी जीत लाभकारी साबित होगी.

चुनावी मैदान में कौन?
इस चुनाव में सत्तारूढ़ पार्टी के 52 वर्षीय उम्मीदवार और आवासीय मंत्री सजित प्रेमदासा और पूर्व रक्षा सचिव एवं विपक्ष के 70 वर्षीय नेता गौतबाया राजपक्षे के बीच कड़ा मुकाबला है. नेशनल पीपुल्स पावर (एनपीपी) गठबंधन से अनुरा कुमारा दिसानायके भी एक मजबूत उम्मीदवार हैं. दोनों उम्मीदवार बड़े राजनीतिक घराने से ताल्लुक रखते हैं. प्रेमदासा पूर्व राष्ट्रपति रणसिंघे प्रेमदासा के बेटे हैं. 1993 में LTTE ने उनकी हत्या कर दी थी. वहीं गौतबाया राजपक्षे पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के भाई हैं. महिंदा ने ही उत्तर में LTTE के खिलाफ आखिरी लड़ाई को अंजाम दिया था.

भारत के साथ संबंध
इन दोनों के साथ ही भारत के अच्छे रिश्ते की उम्मीद जताई जा रही है. 1987-90 तक श्रीलंका में भारतीय शांति सेना के लिए खुफिया प्रमुख के रूप में काम कर चुके रिटायर्ड कर्नल आर हरिहरन का कहना है कि भारत को दोनों उम्मीदवारों में से किसी के बारे में 'चिंता' करने की कोई जरूरत नहीं है.

उन्होंने कहा, 'इलम युद्ध के दौरान गौतबाया राजपक्षे रक्षा सचिव थे. उसी दौरान उनके भाई वहां राष्ट्रपति थे. उन दिनों तमिलनाडु में श्रीलंका के खिलाफ आवाज़ें उठ रही थीं. इसके बवजूद नई दिल्ली ने इस मुद्दे को ज्यादा बड़ा होने नहीं दिया. उन दिनों राजपक्षे पर मानवाधिकार उल्लंघन का भी आरोप लगा था, लेकिन भारत के समर्थन की वजह से संयुक्त राष्ट्र के रुख में नरमी देखी गई थी.राजपक्षे का चीन प्रेम
राजपक्षे के चुनावी कैंपेन का मुख्य मुद्दा राष्ट्रीय सुरक्षा रहा है. उन्होंने अपने घोषणा पत्र में कहा है कि सुरक्षा सहयोग में वो भारत के साथ अच्छे संबंध चाहते हैं. हालांकि भारत को इस बात की चिंता है कि राजपक्षे चीन के साथ भी अच्छे संबंध चाहते हैं. दरअसल कहा जाता है कि चीन ने महिंदा राजपक्षे के चुनावी कैंपेन में फंडिंग की थी.

प्रेमदासा से उम्मीदें
सजित प्रेमदासा के साथ भारत के संबंध अच्छे हो सकते हैं. तमिल नैशनल एलाइंस पार्टी (TNA) ने पहले ही प्रेमदासा को अपना समर्थन दे दिया है. रिटायर्ड कर्नल आर हरिहरन ने कहा, 'पिछले बार जब मोदी श्रीलंका के दौरे पर गए थे तो सजित प्रेमदासा उन दिनों हाउसिंग मंत्री थे. पीएम मोदी ने जब लोगों को भारत की तरफ से घर हैंडओवर किए उस वक्त सजित प्रेमदासा उनके साथ थे. उस वक्त दोनों नेताओं की बॉडी लैंग्वेज काफी सकारात्मक दिख रही थी. सजित चार बार सांसद रह चुके हैं. उन्हें भारत और श्रीलंका के अच्छे-बुरे हर तरह के रिश्तों के बारे में अच्छी तरह पता है.'

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First published: November 16, 2019, 12:43 PM IST
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