कहां और कैसे हैं परवेज मुशर्रफ जिन्हें पेशावर की अदालत ने सुनाई है मौत की सजा

पूर्व सैन्य प्रमुख परवेज मुशर्रफ (Pervez Musharraf) को मौत की सजा सुनाई गई है.
पूर्व सैन्य प्रमुख परवेज मुशर्रफ (Pervez Musharraf) को मौत की सजा सुनाई गई है.

पूर्व सैन्य प्रमुख परवेज मुशर्रफ (Pervez Musharraf) मार्च 2016 में इलाज के लिए दुबई गए थे और सुरक्षा एवं सेहत का हवाला देकर तब से वापस नहीं लौटे हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 17, 2019, 3:30 PM IST
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इस्लामाबाद. पाकिस्तान (Pakistan) के पूर्व राष्ट्रपति और सैन्य तानाशाह परवेज मुशर्रफ (Pervez Musharraf) को पेशावर हाईकोर्ट (Peshawar High Court) ने फांसी की सजा सुनी है. उन पर  साल 2007 में देश में आपातकाल और देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया गया था. मुशर्रफ को 31 मार्च 2014 के दिन देशद्रोह के मामले में दोषी पाया गया है. ऑल पाकिस्तान मुस्लिम लीग के मुखिया मुशर्रफ बीमार बताए जाते हैं. उनकी पार्टी और उनके परिजनों का दावा है कि बीमार मुशर्रफ, दुबई में अपना इलाज करा रहे हैं.

दावा किया जा रहा है दुबई के एक अमेरिकी अस्पताल में भर्ती मुशर्रफ हार्ट और ब्लड प्रेशर का इलाज करा रहे हैं. 18 मार्च 2016 को पाकिस्तान से दुबई गए मुशर्रफ ने दावा किया था कि वह जरूर लौटेंगे लकिन बाद में गिरफ्तारी के डर से वह अपने वतन नहीं लौटे.  साल 2018 में पाकिस्तान के गृह मंत्रालय ने एक स्पेशल कोर्ट के आदेश के तहत मुशर्रफ का पहचान पत्र और पासपोर्ट सस्पेंड कर दिया था.

पेशावर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस वकार अहमद सेठ की अध्यक्षता में विशेष अदालत की तीन सदस्यीय पीठ ने 76 वर्षीय मुशर्रफ को लंबे समय से चल रहे देशद्रोह के मामले में मौत की सजा सुनाई. यह मामला 2007 में संविधान को निलंबित करने और देश में आपातकाल लगाने का है जो दंडनीय अपराध है और इस मामले में उनके खिलाफ 2014 में आरोप तय किए गए थे. अदालत के दो जस्टिसों ने मौत की सजा सुनाई जबकि एक अन्य जस्टिस की राय अलग थी. इसके ब्योरे अगले 48 घंटों में सुनाए जाएंगे.



विशेष अदालत में जस्टिस सेठ, सिंध हाईकोर्ट के जस्टिस नजर अकबर और लाहौ रहाईकोर्ट के जस्टिस शाहिद करीम शामिल हैं. अदालत ने 19 नवंबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था. विशेष अदालत का यह आदेश इस्लामाबाद हाईकोर्ट के पूर्व के एक आदेश के बावजूद आया है जिसमें उसे फैसला देने से रोका गया  था.
मुशर्रफ ने कानूनी खामियों को चुनौती दी थी 
इस्लामाबाद हाईकोर्ट का आदेश 27 नवंबर को आया था. इसके एक दिन बाद विशेष अदालत अपना फैसला सुनाने वाली थी. मुशर्रफ ने शनिवार को अपने वकीलों के जरिए दायर आवेदन में लाहौर हाईकोर्ट से विशेष अदालत में चल रहे मुकदमे पर तब तक रोक लगाने को कहा था जब तक कि उनकी पूर्व याचिका परहाईकोर्ट फैसला नहीं ले लेता.

उस याचिका में पूर्व तानाशाह ने इस मामले में मुकदमा चला रही विशेष अदालत के गठन और प्रक्रिया में हुई कानूनी खामियों को चुनौती दी थी. इस बीच, विशेष अदालत के फैसले से कुछ देर पहले लाहौर हाईकोर्ट ने मुकदमे पर रोक लगाने की मुशर्रफ की याचिका की सुनवाई पूर्ण पीठ से कराने की अनुशंसा की. एजेंसी इनपुट के साथ

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