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WHO ने कहा- गरीब देशों तक वैक्सीन पहुंचाना ज़रूरी, नॉर्वे ने भी दी चेतावनी

WHO ने कहा- गरीब देशों तक भी पहुंचाई जाए वैक्सीन
WHO ने कहा- गरीब देशों तक भी पहुंचाई जाए वैक्सीन

Covid-19 vaccine update: WHO चीफ टेड्रॉस एडहॉनम गीब्रिएसुस (Tedros Adhanom Ghebreyesus) ने ये कहकर सबको चौंका दिया है कि गरीब देशों को अभी तक सिर्फ कोरोना वैक्सीन के 25 डोज ही मिले हैं. उन्होंने कहा कि गरीब देशों तक वैक्सीन पहुंचाने की जिम्मेदारी बड़े देशों को लेनी चाहिए.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 19, 2021, 11:56 AM IST
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लंदन. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रमुख टेड्रॉस एडहॉनम गीब्रिएसुस (Tedros Adhanom Ghebreyesus) ने कहा है कि कोरोना वायरस की वैक्सीन (Coronavirus Vaccine) आने से इसे पाने के लिए होड़ मची है लेकिन इस होड़ में दुनिया के ग़रीब देशों के पिछड़ने का डर है. WHO चीफ ने चेतावनी दी है कि अगर गरीब देशों में वैक्सीनेशन प्रोग्राम शुरू नहीं किया गया तो दुनिया के बाकी देश भी कोरोना संक्रमण से सुरक्षित नहीं रह पाएंगे. उधर नार्वे ने चेतावनी दी है कि कोरोना वायरस से पूरी तरह से बचाव के लिए लोगों को दो नहीं बल्कि तीन बार वैक्‍सीन लगवाना होगा. नार्वे ने कहा कि देश के लोगों को इस साल के आखिर तक एक और वैक्‍सीन लगवाना होगा.

सोवमार देर शाम जारी एक बयान में टेड्रॉस ने कहा कि एक तरफ जब कोरोना वैक्सीन हमारे लिए उम्मीद ले कर आई है वहीं दूसरी तरफ इसके कारण पैदा होने वाला असल ख़तरा भी सामने आ रहा है. दुनिया के अमीर देशों और ग़रीब देशों के बीच असामनता की दीवार है जो इसके वितरण में बड़ी रुकावट साबित हो सकती है. उन्होंने कहा, 'ये अच्छी बात है कि सरकारें अपने स्वास्थ्यकर्मियों और बूढ़ों को पहले वैक्सीन देना चाहती है. लेकिन ये सही नहीं है कि अमीर देशों के युवाओं और स्वस्थ वयस्कों को वैक्सीन की खुराक ग़रीब मुल्कों में रहने वाले स्वास्थ्यकर्मियों और बूढ़ों से पहले मिले.' उन्होंने कहा कि मौजूदा वक्त में कम से कम 49 अमीर मुल्कों में जहां लोगों को वैक्सीन की 3.9 करोड़ खुराक दी गई है, वहीं ग़रीब मुल्कों में इसकी केवल 25 खुराक ही लोगों को मिली है. उन्होंने कहा कि ये आंकड़ा बताता है कि विश्व एक भयावह नैतिक विफलता के कगार पर है और इसकी क़ीमत दुनिया के सबसे गरीब देशों के लोगों को चुकानी पड़ेगी.

बड़े देश लें जिम्मेदारी
टेड्रॉस ने कहा कि वैक्सीन के वितरण में समानता लाना न केवल देशों की नैतिक जिम्मेदारी है बल्कि ये रणनीतिक और आर्थिक स्तर पर भी महत्वपूर्ण होगा. उन्होंने कहा कि वैक्सीन पाने की होड़ के कारण दुनिया के ग़रीब ख़तरे में होंगे और इससे महामारी पूरी तरह से ख़त्म नहीं हो सकेगी. उन्होंने सभी मुल्कों से अपील की की साल के पहले सौ दिनों के भीतर दुनिया के सभी स्वास्थ्यकर्मियों और बूढ़ों को कोरोना की वैक्सीन दी जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि बीते कई महीनों से संगठन सभी मुल्कों में समान रूप से वैक्सीन पहुंचाने की जद्दोजहद में लगा हुआ है. संगठन ने पांच उत्पादकों से वैक्सीन की 2 अरब खुराक सुरक्षित कर ली है और उसे वैक्सीन की और एक अरब खुराक भी मिलने वाली है. संगठन फरवरी में लोगों को वैक्सीन देना शुरू करेगा.
नॉर्वे ने भी दी है चेतावनी


नार्वे के नेशनल इंस्‍टीट्यूट ऑफ पब्लिक हेल्‍थ ने चेतावनी दी है कि जिन लोगों को कोरोना वायरस के दो डोज दिए जा चुके हैं, उन्‍हें साल के आखिर तक एक और डोज लेना होगा. उसने कहा, 'यह हो सकता है कि हमें एक बूस्‍टर वैक्‍सीन कुछ महीने बाद देनी होगी लेकिन हम अभी इसे नहीं जानते हैं. यह वह स्थिति जिसके लिए हम तैयार हैं. वैक्‍सीन बनाने वाले भी अगर जरूरत पड़ी तो इसके लिए तैयार हैं.' संस्‍था के डायरेक्‍टर गेइर बुखोलम ने कहा कि हमारा मानना है कि आपके अंदर कुछ समय के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता आ गई है. इन वैक्‍सीन के बारे में अभी कई ऐसी बाते हैं जिनके बारे में नहीं जानते हैं. चूंकि लोग अब इस वैक्‍सीन को लगवा रहे हैं तो हमें इस तरह की जानकारी लेनी होगी.'



पब्लिक हेल्‍थ इंग्‍लैंड के ताजा शोध के मुताबिक ये वैक्‍सीन 5 महीने तक ही रोग प्रतिरोधक क्षमता दे रही हैं. इससे पहले टीका बनाने वाली कंपनी मॉडर्ना ने दावा किया था कि उसका टीका एक साल तक प्रभावी रहेगा लेकिन शोधकर्ताओं का कहना है कि वैक्‍सीन 100 फीसदी गारंटी के साथ नहीं आई हैं. यह संभव है कि कुछ लोगों में वैक्‍सीन लगवाने के बाद कुछ हद तक इम्‍युनिटी आ जाए लेकिन वे फिर भी दूसरों को संक्रमित कर सकते हैं.
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