US में 50 लाख से ज्यादा हुए Covid-19 केस, WHO ने कहा- वैक्सीन कोई जादुई गोली नहीं

US में 50 लाख से ज्यादा हुए Covid-19 केस, WHO ने कहा- वैक्सीन कोई जादुई गोली नहीं
अमेरिका में 50 लाख से ज्यादा हुए कोरोना के केस

Coronavirus Vaccine Updates: WHO ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि अगर कोरोना वायरस (Coronavirus vaccine update) की वैक्सीन आने वाले महीनों में तैयार हो भी जाती है तो ये कोई जादुई गोली नहीं होगी जो संक्रमण को पलक झपकते ही ख़त्म कर देगी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 10, 2020, 8:23 AM IST
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वाशिंगटन. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि अगर कोरोना वायरस (Coronavirus vaccine update) की वैक्सीन आने वाले महीनों में तैयार हो भी जाती है तो ये कोई जादुई गोली नहीं होगी जो संक्रमण को पलक झपकते ही ख़त्म कर देगी. WHO के महानिदेशक टेड्रोस एडहोम घेब्येयियस (Tedros adhanom) ने कहा कि हमें अभी लंबा रास्ता तय करना है इसलिए सबको साथ मिलकर प्रयास करने होंगे. उधर जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के मुताबिक अमेरिका (US) में कोरोना वायरस (Covid-19) के मामले रविवार को बढ़कर 50 लाख हो गए जो कि अभी तक दुनिया में किसी देश में सबसे अधिक हैं. रविवार को भी अमेरिका में करीब 48 हज़ार कोरोना संक्रमण के नए केस सामने आए.

अमेरिका के संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ एंथनी स्टीफन फॉसी के वरिष्ठ सलाहकार डेविड मारेंस ने भी कहा कि वैक्सीन बनाने का हर प्रयास एक अंध परीक्षण की तरह होता है. जो शुरुआत में तो अच्छे परिणामों के साथ आता है लेकिन इसकी कोई गारंटी नहीं होती कि अंतिम चरण में भी वह वैक्सीन अपने ट्रायल के दौरान सफल साबित हो. हम आशा करते हैं कि हम पहली बार में ही इसे सही से कर पाएंगे और 6 से 12 महीनों के भीतर हमारे पास एक अच्छी वैक्सीन होगी. अमेरिका में जॉर्ज वाशिंगटन विश्वविद्यालय के मिलकेन इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक हेल्थ में वैश्विक स्वास्थ्य के सहायक प्रोफेसर वैक्सीनोलॉजिस्ट जॉन एंड्रस के मुताबिक कोरोना वायरस के एक प्रभावी टीका का विकास इतना निश्चित नहीं है जितना हम सोच रहे हैं. यह खतरनाक है कि वैक्सीन बनाने की रेस में हम यह भूल जाएं कि हमें इस समय क्या करना चाहिए.


5 करोड़ के आस-पास हो सकते हैं केसअमेरिकी स्वास्थ्य अधिकारियों का मानना है कि जांच की सीमाओं और बड़ी संख्या में कम लक्षण वाले मामलों की पहचान नहीं हो पाने के चलते अमेरिका में यह संख्या इससे कई गुना अधिक या करीब पांच करोड़ के आसपास हो सकती है. अमेरिका में प्रतिदिन करीब 54,000 नये मामले सामने आ रहे हैं. इसके उलट यूरोप में वायरस के मामले कम से कम फिलहाल नियंत्रण में प्रतीत हो रहे हैं. विश्व के सबसे ताकतवर देश अमेरिका द्वारा संक्रमण के मामलों को काबू में रखने में असफलता को यूरोप में हैरानी से देखा जा रहा है.



बीती फरवरी में जब इटली में संक्रमण के मामलों में अचानक बढ़ोतरी हुई थी तब देश इसे संभालने के लिए तैयार नहीं था. हालांकि देश में 10 सप्ताह के लॉकडाउन, सतर्कता बरतते हुए संक्रमितों की पहचान करने का अभियान और जनता में मास्क लगाने और एकदूसरे से दूरी बनाने को लेकर स्वीकार्यता ने इटली को मामलों को काबू में करने का एक मॉडल बना दिया. रोम के उत्तर में लेक ब्रेसियानो के किनारे में अपने मित्रों के साथ मास्क लगाकर घूम रही पैत्रिजिया एंतोनिनी ने अमेरिका के लोगों के बारे में कहा, 'क्या वे अपने स्वास्थ्य को लेकर चिंता नहीं करते? उन्हें और एहतियात बरतने की जरूरत है. उन्हें असली लॉकडाउन की जरूरत है.'

रूस की वैक्सीन से उम्मीदें
दुनियाभर में रूसी कोरोना वैक्सीन पर उठते सवालों के बीच रूस के स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री म‍िखाइल मुराश्‍को ने कहा है कि रूस की वैक्‍सीन ट्रायल में सफल रही है और अब अक्‍टूबर महीने से देश में व्‍यापक पैमाने पर लोगों के टीकाकरण काम काम शुरू होगा. उन्‍होंने कहा कि इस वैक्‍सीन को लगाने में आने वाला पूरा खर्च सरकार उठाएगी. वहीं उप स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री ओलेग ग्रिदनेव ने कहा कि रूस 12 अगस्‍त को दुनिया की पहली कोरोना वायरस वैक्‍सीन को रजिस्‍टर कराएगा. इससे पहले रूस ने कहा था कि उसकी कोरोना वायरस वैक्‍सीन क्लिनिकल ट्रायल में 100 फीसदी सफल रही है. इस वैक्‍सीन को रूस रक्षा मंत्रालय और गमलेया नैशनल सेंटर फॉर र‍िसर्च ने तैयार किया है.
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