WHO ने कहा- आखिरी स्टेज में हो रहे टेस्ट का मतलब ये नहीं कि वैक्सीन तैयार है

WHO ने कहा- आखिरी स्टेज में हो रहे टेस्ट का मतलब ये नहीं कि वैक्सीन तैयार है
रूस ने दावा किया है कि 12 अगस्त को कोराना वैक्सीन का पंजीकरण हो. (कॉन्सेप्ट इमेज)

डब्लूएचओ (WHO) का कहना है कि आखिरी स्टेज में हो रहे कोविड-19 वैक्सीन (Covid-19 Vaccine) के ट्रायल का यह मतलब बिल्कुल भी नहीं है कि कोरोना की वैक्सीन तैयार हो गई है और इसे लोगों को दिया जा सकता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 10, 2020, 7:50 AM IST
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नई दिल्ली. दुनिया भर में कोविड-19 की वैक्सीन (Covid-19 Vaccine) को लेकर ट्रायल जारी हैं. दुनिया में 165 वैक्सीन पर काम चल रहा है जिसमें से 26 के करीब वैक्सीन ह्यूमन ट्रायल के चरण में हैं. इसमें भी कुछ वैक्सीन दूसरे और तीसरे चरण में हैं. माना जा रहा है कि इस साल के आखिर में या फिर अगले साल की शुरुआत में कोरोना वायरस (Coronavirus) का टीका आ सकता है. हालांकि कोविड-19 के टीके को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) की मत सबसे अलग है. डब्लूएचओ का कहना है कि आखिरी स्टेज में हो रहे वैक्सीन के ट्रायल का यह मतलब बिल्कुल भी नहीं है कि कोरोना की वैक्सीन तैयार हो गई है और इसे लोगों को दिया जा सकता है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के हेल्थ इमरजेंसी प्रोग्राम के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर ने कहा है कि किसी वैक्सीन की तीसरे चरण में जाने का मतलब है कि इस वैक्सीन पर पहली बार आम लोगों को दिया जा रहा है. जिससे कि यह मालूम पड़ सके कि ये पूरी तरह से स्वस्थ लोगों को संक्रमण के प्रभाव से बचा सकती है या कि नहीं बचा सकती है. इससे पहले डब्लूएचओ ने जानकारी दी थी कि फिलहाल पूरी दुनिया भर में 6 वैक्सीन तीसरे फेज के ट्रायल में हैं. इसमें से तीन टीके चीन के हैं. चीन की सिनोवैक, वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ बायोलॉजिकल प्रोडक्ट, सिनोफैरम/बीजिंग इंस्टीट्यूट ऑफ बायोलॉजिकल प्रोडक्ट कंपनियों की वैक्सीन तीसरे चरण में पहुंची हैं.

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ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन से बंधी लोगों की उम्मीदें
दुनिया में जिस वैक्सीन से लोगों की सबसे ज्यादा उम्मीद बंधी हुई है वह ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की वैक्सीन है, इसके क्लीनिकल ट्रायल विभिन्न देशों में चल रहे हैं. ऑक्सफोर्ड के इस प्रोजेक्ट में भारत का सीरम इंस्टिट्यूट भी पार्टनर है. सबसे पहले कोरोना के टीके पर काम शुरू करने वाली अमेरिका की मोडेरना कंपनी पहले दो फेज के क्लीनिकल ट्रायल पूरे कर चुकी है जिसके अच्छे नतीजे सामने आए हैं. इस वैक्सीन का तीसरा ट्रायल 27 जुलाई से शुरू हो गया है.

भारत के दो उम्मीदवार दूसरे चरण में
वहीं भारत की दो वैक्सीन-भारत बायोटेक और जायडस कैडिला ह्यूमन ट्रायल के दूसरे चरण में हैं. भारत बायोटेक कंपनी इससे पहले पोलियो, रेबीज, चिकनगुनिया, जापानी इनसेफ्लाइटिस, रोटावायरस और जीका वायरस के लिए भी वैक्सीन बना चुकी है.

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रूस कर चुका है ये दावा
वहीं रूस ने दावा भी किया है कि वह कोविड-19 टीके को स्वीकृति देने वाला पहला देश बनने जा रहा है जहां अक्टूबर की शुरुआत में उन टीकों की मदद से सामूहिक टीकाकरण किया जाएगा जिनका अभी तक क्लिनिकल परीक्षण पूरा नहीं हुआ है. इसे लेकर दुनिया भर के वैज्ञानिक चिंतित हैं कि कहीं अव्वल आने की यह दौड़ उलटी न साबित हो जाए.
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