दुनियाभर की जासूसी करने वाली अमेरिका की CIA अमीरात में क्यों हो जाती है फेल

ये अजीब सी बात है कि पूरी दुनिया की जासूसी करने वाली अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA संयुक्त अरब अमीरात से दूर रहती है. अलबत्ता अमीरात अमेरिका की शह पर कई देशों में अस्थिरता पैदा करने का काम करता रहा है.

News18Hindi
Updated: August 27, 2019, 2:51 PM IST
दुनियाभर की जासूसी करने वाली अमेरिका की CIA अमीरात में क्यों हो जाती है फेल
सीआईए का लोगो
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Updated: August 27, 2019, 2:51 PM IST
अमेरिका की केंद्रीय खुफिया एजेंसी (CIA) पूरी दुनिया की जासूसी करती है, उसके जासूस हर जगह फैले हैं. शायद ही कोई ऐसा देश या सरकार हो, जिसकी जासूसी सीआईए नहीं करती हो, लेकिन ये बड़ी हैरानी की बात है कि सीआईए कभी ना तो संयुक्त अरब अमीरात की सरकार की जासूसी करती है और ना ही उन्होंने वहां अपने जासूस रखे हुए हैं.

सीआईए के तीन पूर्व अधिकारियों ने न्यूज एजेंसी रायटर को ये जानकारी दी. उनका कहना है कि सीआईए की इस बात के लिए आलोचना भी होती है. आलोचना करने वाले मानते हैं कि ये अमेरिकी जासूसी के लिए खतरनाक ब्लाइंड स्पॉट है. इससे कभी कोई बड़ा धोखा हो सकता है.

सीआईए द्वारा तमाम देशों में गुपचुप देशों में दखल देना और सरकारों को प्रभावित करने की बात कोई नई है. ओपेक देशों में वो अमेरिका के हितों के अनुसार ऑपरेशन को अंजाम देता रहा है तो खाड़ी और अफ्रीकी देशों में चल रही लड़ाइयों को अपने हिसाब से बनाता बिगाड़ता रहा है. हमेशा कहा जाता है कि इन सारी गतिविधियों में सीआईए अपनी तरह से घुसपैठ करता है और हमेशा यह कोशिश करता है कि अमेरिकी हितों को आंच भी नहीं पहुंचे.

क्या ये सीआईए की विफलता है

सीआईए के ये अधिकारी कहते हैं कि हाल के बरसों में यूएई ने जिस तरह से अपनी सैन्य ताकत के साथ सियासी महत्वाकांक्षाओं को बढ़ाया है, उसे न जान पाना सीआईए की विफलता ही कही जाएगी. हालांकि ये भी कहा जाता है कि ऐसा भी नहीं कि सीआईए के जासूस यूएई को पूरी तरह अनदेखा ही कर देते हों. एक अन्य अमेरिकी एजेंसी नेशनल सेक्यूरिटी एजेंसी (एनएसए) उस पर इलैक्ट्रॉनिक तौर पर नजर रखती है. वहीं सीआईए वहां संयुक्त अरब अमीरात के साथ लायजन रिश्तों के आधार पर संबंध रखता है, जिसमें वो साक्षा तौर पर कॉमन दुश्मनों मसलन अल कायदा आदि पर काम करते हैं.

दुनियाभर में सीआईए के जासूस फैले हैं लेकिन संयुक्त अरब अमीरात में नहीं हैं


लेकिन सीआईए कभी वहां खुद के जासूस नहीं रखता, जो जानकारी इकट्ठा करने के लिए सबसे बहुमूल्य हथियार माने जाते हैं. इस बारे में सीआईए, एनएसए और व्हाइट हाउस कभी कुछ नहीं बोलते. यहां तक यूएई का विदेश मंत्रालय भी इस पर चुप रहता है.
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कुछ और देशों से भी है सीआईए का गठजोड़
यही नहीं जिस तरह का काम सीआईए संयुक्त अरब अमीरात में करती है, कुछ वैसा ही गठजोड़ उसने कुछ और देशों में भी कर रखा है. मसलन आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, ब्रिटेन और कनाडा के साथ भी सीआईए के लोग मिलकर काम करते हैं और अपने इस संयुक्त गठजोड़ को उन्होंने द फाइव आइज का नाम दे रखा है. इसमें वो आपस में सूचनाओं का आदान प्रदान करते हैं.ॉ

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वैसे सीआईए के जासूस हर देश में फैले हुए हैं. उन्होंने हर देश में अपने लोग रखे हुए हैं, इसमें अमेरिका के मुख्य सहयोगी देश भी शामिल हैं. मसलन सऊदी अरब मध्य पूर्व में अमेरिका का असरदार सहयोगी है और अमेरिका से हथियार खरीदता रहा है. लेकिन वहां सीआईए का अपना नेटवर्क खासा मजबूत है.

दरअसल संयुक्त अरब अमीरात और सीआईए मिलकर कई देशों में साथ साथ रणनीतिक मोर्चे पर काम करते हैं


सऊदी अरब में जरूर होती जासूसी
सऊदी अरब अक्सर सीआईए के निशाने पर भी रहता है. सीआईए के पूर्व अधिकारियों और एक ऐसे अधिकारी के अनुसार, जो खाड़ी देशों में काम कर चुके हैं, वो इसकी पुष्टि करते हैं. सऊदी इंटैलिजेंस एजेंट कई ऐसे सीआईए एजेंट्स को पकड़ चुके हैं, जो सऊदी अधिकारियों को अपने खबरी के रूप में तैनात करते रहे हैं.
हालांकि सऊदी की जासूसी एजेंसियां सार्वजनिक तौर पर कभी नहीं कहतीं कि सीआईए उनके यहां ऐसे काम कर रहा है लेकिन वो प्राइवेट मुलाकातों में आपस में सीआईए के बड़े अधिकारियों से इसकी बात करते हैं और पूरी जानकारी देकर कहते हैं कि वो अपने लोगों से कहें कि वो इन कामों से बाज आएं.
अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोपेयो इस तरह के दावों को खारिज करते हैं कि ईरान उन 17 जासूसों को पकड़ा है, जो सीआईए के लिए काम कर रहे हैं.

क्या यूएई ब्लाइंड स्पॉट है
पूर्व सीआईए एजेंट और लेखक रॉबर्ट बेयर कहते हैं, सीआईए यूएई में हमेशा नाकाम रहता है, उसे नहीं मालूम रहता कि उनकी आंतरिक नीतियों में क्या हो रहा है या फिर राजशाही में आंतरिक तौर पर क्या विवाद या झगड़े चल रहे हैं. वो साफ कहते हैं कि सीआईए को ये गर्व नहीं करना चाहिए कि वो वर्ल्ड सर्विस के तौर पर अच्छा काम कर रहा है, क्योंकि यूएई उसकी बहुत बड़ी विफलता है, क्योंकि वहां की रॉयल फैमिलीज के बारे में जानना खासा अहम है.

अब सीआईए के जासूस ही कहते हैं कि यूएई में जिस तरह सीआईए काम नहीं करती, वो उसके लिए ब्लाइंड स्पॉट भी कहा जाने लगा है यानि वहां की जानकारियां अमेरिका को नहीं मिल पातीं


अमेरिकी की शह पर काम करता है अमीरात
डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन से जुड़े रहे एक पूर्व अधिकारी का कहना है कि यूएई में सीआईए के जासूस नहीं होना खतरे की घंटी है क्योंकि अब वहां की राजशाही बहुत खराब सत्ता के रूप में काम कर रहे हैं.
दरअसल यूएई लंबे समय से लीबिया, कतर और अफ्रीकी देशों में अमेरिकी की शह उठापटक करने के लिए पैसा खर्च करता रहा है. जिससे अमेरिका को फायदा हुआ है. लीबिया में लंबे समय तक अमेरिका के इशारों पर ये काम अमीरात ने किया. सूडान में यूएई ने कई साल और बेहिसाब पैसा बहाया कि सूडान के राष्ट्रपति ओमार हसन अल बशीर सत्ता में बने रहें. वो बने भी रहे. फिर अचानक उन्हें बेदखल करके सैन्य अधिकारियों का समर्थन करना शुरू किया गया, जिन्होंने सूडानी राष्ट्रपति को अप्रैल में हटाकर तख्तापलट कर दिया.

अफ्रीका में यूएई ने उठापटक के लिए जमकर धन बहाया है
नई सैन्य सरकार ने जून में दर्जनों प्रदर्शनकारियों को मार दिया, जो सिविलियन सत्ता और चुनावों की मांग कर रहे थे. यूएई ने सूडान के इरिट्रिया और स्व घोषित रिपब्लिक ऑफ सोमालीलैंड में सैन्य बेस बनाया हुआ है. ट्रंप प्रशासन के इस अधिकारी का कहना है कि आप अफ्रीका में कोई भी पत्थर उखाड़ेंगे तो उसके पीछे आपको यूएई ही मिलेगा. संयुक्त अरब अमीरात खुद को इस क्षेत्र की सैन्य और वित्तीय ताकत के तौर पर प्रदर्शित करता है.
यमन में संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब मिलकर अमेरिका की शह पर विद्रोहियों होथी को मदद देते हैं. हाल में दुनियाभर की आलोचना के बाद भी यूएई ने वहां हवाई हमले किये, जिसमें बड़े पैमाने पर लोग मारे गए. जब हाल में अमेरिकी कांग्रेस ने संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब को हथियारों की बिक्री पर रोक लगाई तो राष्ट्रपति ट्रंप ने इसे वीटो कर दिया. सेंटर फार रिस्पोंसिव पॉलिटिक्स के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात की सरकार ने अमेरिकी लॉबिंग पर वर्ष 2017 से अब तक 46.8 मिलियन डॉलर खर्च किये हैं.

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First published: August 27, 2019, 1:19 PM IST
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