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FATF में यूं ही पाकिस्तान की मदद नहीं कर रहे चीन-मलेशिया और तुर्की, ये है वजह

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Updated: October 14, 2019, 10:39 AM IST
FATF में यूं ही पाकिस्तान की मदद नहीं कर रहे चीन-मलेशिया और तुर्की, ये है वजह
मलेशिया के पीएम महातिर मोहम्मद, पाकिस्तान के पीएम इमरान खान और तुर्की के राष्ट्रपति एर्डोगन (बाएं से दाएं)

वर्तमान समय में चीन और मलेशिया FATF का नेतृत्व कर रहे हैं. तुर्की और सऊदी अरब भी इसके सदस्य देश हैं. चीन, मलेशिया और तुर्की पाकिस्तान को अपना दोस्त मानते हैं. पाकिस्तान से चीन की दोस्ती तो जगजाहिर है. पाकिस्तान और चीन का साथ उतना ही पुराना है, जितना पाकिस्तान का इतिहास. वहीं, तुर्की और मलेशिया भी पाक का खुला समर्थन कर रहे हैं.

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  • Last Updated: October 14, 2019, 10:39 AM IST
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पेरिस. फ्रांस की राजधानी पेरिस में टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग पर नजर रखने वाली फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की बैठक जारी है. 18 अक्टूबर तक चलने वाली इस मीटिंग में टेरर फंडिंग रोकने में नाकाम पाकिस्तान (Pakistan) के खिलाफ कड़े फैसले लिए जा सकते हैं. FATF के एशिया पैसिफिक ग्रुप (APG) ने पाकिस्तान को ब्लैकलिस्ट किए जाने की सिफारिश की है; लेकिन माना जा रहा है कि चीन, मलेशिया और तुर्की अपने दोस्त पाकिस्तान को ब्लैकलिस्ट होने से बचा ले जाएंगे. पाकिस्तान के मददगार बनने के पीछे इन तीन देशों के भी अपने-अपने मकसद हैं. आइए जानते हैं आखिर अपनी जमीं पर आतंकियों को पनाह देने वाले और टेरर फंडिंग रोकने में नाकाम पाकिस्तान का साथ चीन, मलेशिया और तुर्की क्यों दे रहे हैं:-

पाकिस्तान के इतिहास जितना ही पुरानी है चीन से दोस्ती
वर्तमान समय में चीन और मलेशिया FATF का नेतृत्व कर रहे हैं. तुर्की और सऊदी अरब भी इसके सदस्य देश हैं. चीन, मलेशिया और तुर्की पाकिस्तान को अपना दोस्त मानते हैं. पाकिस्तान से चीन की दोस्ती तो जगजाहिर है. पाकिस्तान और चीन का साथ उतना ही पुराना है, जितना पाकिस्तान का इतिहास. ताइपे में चीनी गणतंत्र की सरकार से रिश्ता तोड़ कर पाकिस्तान के इस्लामिक गणतंत्र ने कम्युनिस्ट पार्टी को सबसे पहले मान्यता दी.

पाकिस्तान के मिलिट्री शासक याहया खान अमेरिकी राष्ट्रपति निक्सन और माओ की दोस्ती का जरिया बने. अमेरिका और चीन के बीच दोस्ती के दरवाजे खोलने में भी वह मददगार साबित हुए. इसके बाद से चीन और पाकिस्तान ने एक दूसरे के साथ मतलब की यारी निभाई है. चीन ने पाकिस्तान के कश्मीर पर दावे का हमेशा समर्थन किया है. पाकिस्तानी आतंकी मसूद अजहर को आतंकवादी घोषित करने के यूएन के प्रस्ताव में अड़ंगा लगाया. बदले में पाकिस्तान ने तिब्बत और ताइवान पर चीन के दावे का समर्थन किया.

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इमरान खान और शी जिनपिंग


CPEC के लिए चीन को चाहिए पाक का साथ
वहीं, चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर या सीपीईसी चीन का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है, जो पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर और अक्साई चीन जैसे विवादित इलाकों से होकर गुजरता है. मुख्य तौर पर यह एक हाइवे और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट है जो चीन के काशगर प्रांत को पाकिस्तान के ग्वारदर पोर्ट से होकर गुजरेगा. ऐसे में जाहिर है व्यापारिक लाभ के लिए चीन को पाकिस्तान का साथ चाहिए और बदले में उसे साथ निभाना भी पड़ेगा.
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तुर्की और मलेशिया खुले तौर पर कर रहे पाक की मदद
चीन के साथ ही तुर्की और मलेशिया भी खुले तौर पर पाकिस्तान के साथ आ रहे हैं. जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 खत्म होने के बाद इन दोनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के साथ मिलकर भारत के इस कदम की आलोचना की थी. हाल ही में इन तीनों देशों ने इस्लामी टीवी शुरू करने का ऐलान भी किया. दरअसल, न्यूयॉर्क में संपन्न हुई संयुक्त राष्ट्र महासभा की 74वें अधिवेशन से इतर पाकिस्तान के पीएम इमरान खान, तुर्की के राष्ट्रपति एर्डोगन और मलेशिया के पीएम महातिर मोहम्मद ने मीटिंग की थी, जिसमें फैसला लिया गया कि तीनों देश मिलकर एक टीवी चैनल शुरू करेंगे, ताकि इस्लाम के बारे में दुनियाभर में हो रही गलत व्याख्या की सही जानकारी दी जा सके.

तुर्की ने फिलिस्तीन से की थी कश्मीर की तुलना
वैसे तुर्की कश्मीर मसले पर पहले भी पाकिस्तान का साथ देता आया है, लेकिन अब वह खुले तौर पर कश्मीर पर बोलने लगा है. तुर्की के राष्ट्रपति रिसेप तैयब एर्डोगन ने हाल ही में कश्मीर की तुलना फिलिस्तीन से की थी. तुर्की में एर्डोगन की तुलना सद्दाम हुसैन, बशर अल असाद और मुअम्मर गद्दाफी जैसे तानाशाहों से की जा रही है.

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इमरान खान और तुर्की के राष्ट्रपति एर्डोगन


तुर्की से पाकिस्तान को मिल रहा जंगी जहाज
पाकिस्तान का साथ देने का एक और कारण ये भी है कि तुर्की को उससे जंग के सामान मिल रहे हैं. वहीं, पाकिस्तान खुद को समुद्री ताकत के तौर पर उभारना चाहता है, जिसमें तुर्की उसकी मदद कर रहा है. पाकिस्तान ने तुर्की से जुलाई 2018 में एक डील की है. इसके तहत तुर्की से MILGEM एडीए क्लास नेवीशिप दी जानी हैं, जिनका निर्माण भी शुरू हो गया है.

क्या खास है इस नेवीशिप में
बता दें कि पाकिस्तान को तुर्की से मिलने वाला नेवीशिप 99 मीटर लंबा है और ये 2400 टन का भार संभाल सकता है. ये एक एंटी-सबमरीन कॉम्बैट शिप है, जो रडार को भी धोखा दे सकता है. इनमें से दो शिप तुर्की में बनेंगे. गौरतलब है कि तुर्की उन देशों में शामिल है, जिनके पास ताकतवर जंगी पोत बनाने की क्षमता है.

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First published: October 14, 2019, 9:10 AM IST
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