म्यांमार चुनावों में आंग सान सू की बहुमत के करीब, जानिए क्यों खुश हो रहा है चीन?

म्यांमार इलेक्शन के नतीजों में आंग सांग सू की की पार्टी को बहुमत मिलता नज़र आ रहा है.
म्यांमार इलेक्शन के नतीजों में आंग सांग सू की की पार्टी को बहुमत मिलता नज़र आ रहा है.

Myanmar Election 2020: म्यांमार इलेक्शन के नतीजों में आंग सांग सू की की पार्टी को बहुमत मिलता नज़र आ रहा है. आंग सांग सू की को भारत का नजदीकी माना जाता है. सू की का झुकाव भारत की तरफ ज्यादा है. इसी कारण भारत ने म्यांमार के साथ कालादान प्रोजक्ट डील को फाइनल किया है. इसके अलावा म्यांमार में एक पोर्ट को भी भारत विकसित कर रहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 10, 2020, 3:10 PM IST
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यंगून. म्यांमार (Myanmar) में हुए आम चुनावों में लोकत्रंत समर्थित नेता और वर्तमान राष्ट्रपति आंग सांग सू की (Aung san suu kyi) की पार्टी बहुमत के बेहद करीब है. सू की की पार्टी नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी (एनएलडी) ने दावा किया है कि उसने संसदीय चुनाव में बहुमत हासिल कर लिया है और वह सत्ता पर काबिज रहेगी. हालांकि फिलहाल काउंटिंग जारी है और निर्वाचन आयोग ने फिलहाल आखिरी नतीजे आने देने की बात कही है.

म्यांमार की सर्वोच्च नेता आंग सांग सू की को भारत का नजदीकी माना जाता है. उन्होंने अपनी पढ़ाई भी दिल्ली में ही रहकर की है. जब म्यांमार में सेना ने सत्ता पर कब्जा कर लिया तब उन्हें बार बार नजरबंदी और रिहाई से गुजरना पड़ा. उस समय अप्रत्यक्ष रूप से उनकी भारत सरकार ने पूरी मदद की थी. यही कारण है कि सू की का झुकाव भारत की तरफ ज्यादा है. इसी कारण भारत ने म्यांमार के साथ कालादान प्रोजक्ट डील को फाइनल किया है. इसके अलावा म्यांमार में एक पोर्ट को भी भारत विकसित कर रहा है. एनएलडी के प्रवक्ता मोनीवा आंग शिन ने कहा कि पार्टी पुष्टि करती है कि उसने बहुमत के आंकड़े 322 से अधिक सीटों पर जीत दर्ज की है, लेकिन अंतिम नतीजों में पार्टी द्वारा लक्षित 377 सीटों से भी अधिक पर जीत दर्ज होगी. उल्लेखनीय है कि एनएलडी की जीत की उम्मीद की जा रही है क्योंकि पार्टी नेता और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता आंग सान सू की देश में खासी लोकप्रिय हैं.

चीन क्यों है खुश?
चीन ने पिछले चुनाव में म्यांमार के सैन्य गठबंधन का समर्थन किया था, जबकि इस बार वह खुलकर लोकतंत्र समर्थक आंग सांग सू की को जीतते हुए देखना चाह रहा है. चीन सरकार के प्रतिनिधियों को लगता है कि उन्हें सैन्य शासन में किसी जनरल को मनाना उनके लिए मुश्किल काम है. जबकि, लोकतंत्र समर्थक नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी (एनएलडी) के नेता आसानी से उनकी बातें मान लेते हैं. सैन्य-गठबंधन वाली यूनियन सॉलिडैरिटी एंड डेवलपमेंट पार्टी 2015 के चुनाव में एनएलडी से बुरी तरह हार गई थी. इस साल के चुनाव में भी आंग सांग सू की की पार्टी एनएलडी जीतते हुए दिखाई दे रही है. सू की खुद को रोहिंग्या विवाद से दूर रखने और आर्थिक लाभ के लिए पिछले कुछ साल से चीन की करीबी बनी हुई हैं. जबकि, वहां की सेना विद्रोहियों को हथियार, पैसा और समर्थन देने के कारण चीन का विरोध कर रही है.



चीन चाहता है कि म्यांमार उसके बेल्ट एंड रोड प्रोजक्ट की कई परियोजनाओं को मंजूर करे. इसके लिए म्यांमार सरकार पर दबाव बनाने के लिए वह इन आतंकी समूहों को हथियार देता है. जबकि म्यांमार इसमें शामिल होने से इनकार करता रहा है. इतना ही नहीं, चीन भारत के भी आतंकी समूहों को कश्मीर में हमले करने के लिए उकसा रहा है. म्यांमार की सेना के अनुसार, विद्रोही गुट अराकान आर्मी के पीछे विदेशी देश का हाथ है. 2019 से इस आतंकी संगठन ने चीन निर्मित हथियारों और लैंड माइन के जरिए म्यांमार आर्मी पर हमला कर रहे हैं. नवंबर 2019 में म्यांमार सेना ने एक छापे के दौरान प्रतिबंधित टांग नेशनल लिबरेशन आर्मी से बड़ी संख्या में हथियारों को जब्त किया था. इसमें सरफेस टू एयर मिसाइल्स भी शामिल थीं. बताया जाता है कि इस छापे के दौरान मिले मिसाइलों की कीमत 70000 से 90000 अमेरिकी डॉलर के आसपास थी. ये हथियार मेड इन चाइना थे.
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