PAK की तरह भुखमरी की कगार पर है चीन, लोगों को खाना न बर्बाद करने की सलाह

PAK की तरह भुखमरी की कगार पर है चीन, लोगों को खाना न बर्बाद करने की सलाह
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग (फाइल फोटो)

China food crisis: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) ने खाना बर्बाद करने वाले लोगों के लिए एक नए कैम्पने की शुरुआत की है. हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि कोरोना वायरस, बाढ़ और टिड्डी के चलते चीन में अनाज की पैदावार कम हुई है और भुखमरी के हालातों के चलते ऐसा किया गया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 2, 2020, 4:40 PM IST
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बीजिंग. चीन (China) एक बार फिर सवालों के घेरे में है और ऐसा माना जा रहा है कि कोरोना वायरस (Covid-19), टिड्डी और बाढ़ की समस्या के चलते अनाज के उत्पादन में भारी कमी आई है और भुखमरी के हालत बनने की आशंका है. पश्चिमी मीडिया में छपी कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) ने इसी भुखमरी के मद्देनज़र 'क्लीन योर प्लेट कैम्पेन' फिर से लॉन्च किया है. इस कैम्पेन में लोगों से खाना न बर्बाद करने के लिए कहा गया है. हालांकि चीनी मीडिया ने इस रिपोर्ट्स को पूरी तरह खारिज कर दिया है.

BBC की एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन में साल 2013 में सबसे पहले 'क्लीन योर प्लेट कैम्पेन' शुरू किया गया था. चाइनीज़ एकेडमी ऑफ़ सोशल साइंसेज़ (CASS) के रुरल डेवेलपमेंट इंस्टिट्यूट और चाइना सोशल साइंसेज़ प्रेस की ओर से 17 अगस्त को संयुक्त रूप से जारी 'द रुरल डेवलपमेंट रिपोर्ट 2020' में यह भी कहा गया है कि गेहूं, चावल और मक्के की घरेलू आपूर्ति भी 2025 तक मांग से 25 मिलियन टन कम रहेगी. हालांकि चीन का कहना है कि इस रिपोर्ट को गलत तरीके से प्रचारित किया जा रहा है. चीन के सरकारी समाचार पत्र ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक़, शी ज़िनपिंग ने खाने की बर्बादी को 'हैरान करने वाला और निराशाजनक' बताते हुए इस मुद्दे पर जागरूकता फैलाने को कहा है. उन्होंने कहा कि ऐसा सामाजिक वातावरण तैयार किया जाए जिसमें खाना बर्बाद करने को 'शर्मिंदगी के नज़रिए' से देखा जाए.






कोरोना महामारी के चलते प्रभावित हुआ उत्पादन
चाइना ग्लोबल टेलिविज़न नेटवर्क (सीजीटीएन) ने ज़िनपिंग के हवाले से कहा है, ''हालांकि चीन ने कई सालों से बम्पर पैदावार की है लेकिन अब भी खाद्य सुरक्षा को लेकर जागरूकता फैलाने की ज़रूरत है. कोविड-19 का असर हमारे लिए अलार्म की तरह है." चीनी कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के हवाले से बताया गया है कि चीन में 2019 में कुल अनाज की पैदावर 664 मिलियन टन हुई है. चीनी टीवी चैनल सीजीटीएन के मुताबिक़, इसमें 210 मिलियन टन चावल और 134 मिलियन टन गेहूं है जबकि अभी देश में चावल की खपत 143 मिलियन टन और गेहूं की खपत 125 मिलियन टन है. ग्लोबल टाइम्स ने अपनी एक रिपोर्ट में लिखा है कि चीन के लिए महामारी या बाढ़ के कारण खाद्यान्न की कमी होने से ज़्यादा बड़ा संकट खाना बर्बाद करने से उभर सकता है.



क्या भुखमरी छिपा रहा है चीन?
चीन की सरकारी मीडिया के लगातार खाना बर्बाद न करने की बातों के चलते विश्लेषकों के मन में यह आशंका पैदा कर दी है कि बर्बादी और लोगों के ग़ैर-ज़िम्मेदाराना व्यवहार की आड़ में चीन में खाद्य संकट की बात छिपाई तो नहीं जा रही? इसके लिए सरकारी मीडिया आंकड़ों का भी हवाला दिया. इन आंकड़ों के मुताबिक चीनी उपभोक्ताओं ने साल 2015 में बड़े शहरों में 17 से 18 टन तक खाना बर्बाद किया है. चीन कोविड-19 या फिर कई प्रांतों में प्राकृतिक आपदा के कारण फसल बर्बाद होने की वजह से किसी तरह के खाद्य संकट का सामना कर रहा है. चीन ने खाद्य उत्पादन, टिड्डियों के प्रकोप और महामारी के असर पर अच्छी तरह से नियंत्रण रखा है.







चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने चीन की खाद्य सुरक्षा के जुड़े मसले को लेकर पश्चिमी मीडिया पर निशाना साधा है. 17 अगस्त को इसमें छपे एक लेख के अनुसार, 'कुछ पश्चिमी मीडिया ने झूठी ख़बरें छापीं हैं कि दक्षिणी चीन में भारी बाढ़ और अमरीका के साथ बढ़ते तनाव के कारण पूरे चीन में खाद्य संकट का ख़तरा मंडरा रहा है.' अख़बार के मुताबिक ये अभियान खाने की बर्बादी करने वालों और लाइवस्ट्रीमिंग करते हुए बड़ी मात्रा में खाना खाने वाले लोगों के लिए चलाया जा रहा है, इन लोगों का नाम 'बड़े पेट वाले सितारों' रखा गया है जो कि सोशल मीडिया पर काफी वायरल भी हो रहा है.
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