नवाज के दामाद की गिरफ्तारी और विपक्षियों की एकजुटता इमरान खान के लिए क्यों खड़ी कर सकता है मुश्किल

पाकिस्तान में इमरान सरकार के खिलाफ संयुक्त विपक्ष ने 18 अक्टूबर को कराची में दूसरी रैली निकाली. रैली में उमड़े जनसैलाब को देख इमरान खान और पाकिस्तानी सेना में हलचलें तेज हो गई हैं. फोटो: AP
पाकिस्तान में इमरान सरकार के खिलाफ संयुक्त विपक्ष ने 18 अक्टूबर को कराची में दूसरी रैली निकाली. रैली में उमड़े जनसैलाब को देख इमरान खान और पाकिस्तानी सेना में हलचलें तेज हो गई हैं. फोटो: AP

पाकिस्तान में सत्ता पर काबिज इमरान खान सरकार विपक्ष के साथ-साथ जनता की नाराजगी का भी जमकर सामना कर रही है. इसके बाद अब पूर्व पीएम नवाज शरीफ के दामाद सफदर अवान की गिरफ्तारी ने पाकिस्तान के राजनीतिक गलियारों में उथल-पुथल मचा दी है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 22, 2020, 11:44 AM IST
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इस्लामाबाद. पाकिस्तान (Pakistan) में इन दिनों पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ (Former Prime Minister Nawaz Sharif) के दामाद सफदर अवान (Safdar Awan) की गिरफ्तारी पर सियासत गरमाई हुई है. नवाज शरीफ (PML-N) और उनकी बेटी मरियम (Mariam) ने दो विशाल रैलियों के जरिए सफदर की गिरफ्तारी से एक दिन पहले ही इमरान सरकार (PTI) पर उसकी नाकामियां छिपाने के लिए सेना (Army) की छवि खराब करने का आरोप लगाया था. पाकिस्तान इस समय हाथिए पर है।

देश में सभी राजनीतिक विश्लेषकों और पर्यवेक्षकों ने भी देश के हालिया घटनाक्रमों के बारे में बहुत आलोचनात्मक प्रतिक्रिया दी है. उनके मुताबिक, पाकिस्तान में हालात बद से बदतर हो रहे हैं और भविष्य में इसके और बिगड़ने के आसार नजर आ रहे हैं. सफदर की गिरफ्तारी और सरकार के खिलाफ निकाली गई इन दो विशाल रैलियों का क्या महत्व है?

पाकिस्तान के अब तक के हालात
इमरान खान सरकार (Imran Khan Government) के खिलाफ विपक्ष ने अपनी आवाज को बुलंद कर दिया है. पाकिस्तान में इमरान के खिलाफ रैलियों में भारी जनसैलाब उमड़ा है. बता दें कि पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) जिसमें पिछले महीने स्थापित पाकिस्तान के 11 विपक्षी दलों की अंब्रेला यूनियन और नवाज शरीफ की पाकिस्तान मुस्लिम लीग (एन), पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी समेत अन्य राजनीतिक दल जमात उलेमा ए इस्लाम (फजलूर) और बलोच नेशनल पार्टी ने इमरान सरकार के खिलाफ दो विशाल रैलियां निकालकर मोर्चा खोला था. जिसमें जनता के सामने सरकार की नाकामियों को बताया गया. इधर, विपक्ष के इस हल्ला बोल मिशन से इमरान और सेना के पसीने छूट हुए हैं.
तीसरी रैली निकालने की हो रही तैयारी


वहीं, नेतृत्व के मुद्दे पर विपक्षी दलों के बीच टकराव से बचने के लिए मौलाना फजलुर रहमान खान को अंब्रेला यूनियन का अध्यक्ष बनाया गया है. बता दें कि पहली रैली 16 अक्टूबर को गुजरांवाला और दूसरी 18 अक्टूबर को कराची (Karachi) में निकाली गई थी. अब विपक्षी दल इमरान के खिलाफ 25 अक्टूबर को क्वेटा में तीसरी रैली निकालने की योजना बना रहे हैं. सरकार के खिलाफ विपक्ष की इन रैलियों को कई पहलुओं से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. मोटे तौर पर, पाकिस्तान और इसके बाहर के बहुत सारे आलोचक सरकार के खिलाफ पीडीएम के आंदोलनों को सकारात्मक मान रहे हैं।

पंजाब की राजनीति
बता दें कि पाकिस्तान का पंजाब प्रांत राजनीति और देश की सेना दोनों का मुख्य आधार रहा है। यह न केवल सबसे समृद्ध क्षेत्र है बल्कि इस क्षेत्र ने देश को बड़ी संख्या में नेता भी दिए हैं. यह शरीफ का राजनीतिक घरेलू मैदान भी है. उन्होंने यहां से जनरल क़मर बाजवा को सीधे चुनौती दी। लंदन में बैठ शरीफ ने वीडियो के जरिए गुजरांवाला रैली संबोधित किया था जिसके बारे में कहा जा रहा है कि उनका यह कदम सेना प्रमुख के गृहनगर घाकर मंडी से 10 मील से अधिक दूर नहीं है.

विपक्ष की लड़ाई लोकतंत्र के लिए
कई पर्यवेक्षकों ने विपक्ष के हंगामे का सही ठहराया है. विपक्ष का हंगामा शुरू में इमरान खान को बाहर करने पर केंद्रित था, लेकिन बाद में देश के राजनीतिक मामलों में सेना के बढ़ते हस्तक्षेप पर प्रतिबंध सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सेना पर भी जुबानी हमलाकर इसका विस्तार किया गया. राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो (एनएबी) जैसी संस्थाएं जो देश में मौजूद भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए बनाई गई थीं, जो सीधे सेना के प्रमुख द्वारा नियंत्रित होती हैं, उसे विपक्ष को एकजुट होने और सत्ता के दुरुपयोग की आलोचना करने के लिए मजबूर किया जा रहा है और वह सरकार के दवाब में विपक्ष के नेता, वकीलों और न्यायाधीशों के खिलाफ मनमानी गिरफ्तारी कर कार्रवाई कर रही है जो देश के लोकतंत्र का गला घोंटने का काम करती है.

पाकिस्तान के भविष्य के लिए खतरा इमरान खान
बता दें कि इमरान खान हर पहलू पर सरकार चलाने में नाकाम रहे हैं. चाहे वो देश की डगमगाती अर्थव्यवस्था को संभालने की बात हो या फिर अतंरराष्ट्रीय संबंध. वहीं, तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन (President of Turkey Recep Tayyip Erdogan) का भी कहना है कि इमरान खान ने अपने देश के राजनीतिक और आर्थिक भविष्य को बहुत नुकसान पहुंचाया है.

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था धड़ाम
पत्रकार और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और पीसीबी अध्यक्ष नजम सेठी ने एक न्यूजपेपर में अपने कॉलम में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (International Monetary Fund) के इस साल पाकिस्तान को एक भी रुपया न देने पर चिंता व्यक्त की है. इसका कारण पाकिस्तान ने तीन साल के $6 बी संरचनात्मक समायोजन कार्यक्रम की तीसरी किश्त को न जमा करना है. उन्होंने बताया कि देश में बढ़ती बेरोजगारी और गिरती अर्थव्यवस्था (Declining economy) के कारण जनता इमरान सरकार के खिलाफ रैलियों में हिस्सा ले रही हैं.
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