लाइव टीवी

भारत से रेल लिंक-चीन से सड़क, एशिया की 2 महाशक्तियों का स्वागत क्यों कर रहा है नेपाल?

News18Hindi
Updated: October 14, 2019, 5:34 PM IST
भारत से रेल लिंक-चीन से सड़क, एशिया की 2 महाशक्तियों का स्वागत क्यों कर रहा है नेपाल?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नेपाल के पीएम केपी शर्मा ओली के साथ

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) और नेपाली पीएम केपी शर्मा ओली (KP Sharma Oli) के बीच सबसे बड़ी डील ट्रांस-हिमालयन कनेक्टिविटी नेटवर्क को लेकर हुई है. दोनों ही देश 2.75 अरब डॉलर के इस नेटवर्क को शुरू करने पर सहमत हो गए हैं, जो कि नेपाल को शी जिनपिंग के ड्रीम प्रोजेक्ट द बेल्ट एंड रोड इशिनिएटिव (BRI) से लिंक करेगी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 14, 2019, 5:34 PM IST
  • Share this:
(उदय सिंह राणा)

नई दिल्ली. शनिवार को चेन्नई से काठमांडू के लिए उड़ान भरने के साथ ही शी जिनपिंग (Xi Jinping) पिछले 23 सालों में नेपाल की यात्रा करने वाले पहले चीनी राष्ट्रपति बन गए. उन्होंने रविवार को नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली (KP Sharma Oli) से मुलाकात की. इस दौरान दोनों देशों के बीच करीब 20 समझौते हुए. इसमें सड़क सुरंग (Road Tunnel) का निर्माण और तिब्बत की ओर रेलवे लिंक को सुविधाजनक बनाने का समझौता भी शामिल है.

वैसे ओली के कार्यकाल में नेपाल की चीन के साथ नज़दीकियां बढ़ी हैं. दूसरी ओर, भारत भी अपने इस पड़ोसी के साथ रिश्ते मजबूत करने में जुटा है. यही वजह है कि केपी शर्मा ओली के पहले कार्यकाल में ही भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) तीन बार नेपाल का दौरा कर चुके हैं. ऐसे में नेपाल एशिया के दो महाशक्तियों यानी भारत-चीन के साथ संतुलित संबंध बनाए रखना चाहता है.

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और नेपाली पीएम केपी शर्मा ओली के बीच सबसे बड़ी डील ट्रांस-हिमालयन कनेक्टिविटी नेटवर्क को लेकर हुई है. दोनों ही देश 2.75 अरब डॉलर के इस नेटवर्क को शुरू करने पर सहमत हो गए हैं, जो कि नेपाल को शी जिनपिंग के ड्रीम प्रोजेक्ट द बेल्ट एंड रोड इशिनिएटिव (BRI) से लिंक करेगी. इसके अलावा चीन-नेपाल काठमांडू के चीन बॉर्डर से जोड़ने के लिए सड़क सुरंग का निर्माण करवाएंगे. इसके अलावा रेल नेटवर्क को भी सुविधाजनक बनाया जाएगा.



नेपाल सरकार के सूत्रों के मुताबिक, चीन की मदद से नेपाल अगले 4-5 साल में इस पूरे सड़क सुरंग को तैयार कर लेना चाहता है. सूत्र ने बताया, 'अभी काठमांडू से चीन बॉर्डर के बीच सड़क बेहद खराब है. काठमांडू से चीन बॉर्डर तक जाने में हमें 6 घंटे लग जाते हैं. नई सड़क के बन जाने से करीब 2 घंटे में ही ये दूरी तय कर ली जा सकेगी. उम्मीद है कि अगले 4 या 5 साल में सड़क बनकर तैयार हो जाए.


दरअसल, 2016 में केपी शर्मा ओली के चीन दौरे के बाद दोनों देशों के बीच के रिश्ते को एक नई दिशा मिली थी. तब भी चीन-नेपाल के बीच कई समझौते हुए थे. इस दौरान हुए एक समझौते के तहत ही चीन का ईंधन नेपाल आ रहा है.
Loading...

china nepal
नेपाल के पीएम केपी शर्मा ओली और शी जिनपिंग


साल 2015 में नेपाल-चीन के रास्ते से प्रतिबंध खत्म करने के लिए ये बहुत जरूरी भी था. बता दें कि मधेसी समुदाय ने एक संवैधानिक डील के खिलाफ करीब 6 महीने तक प्रदर्शन किया था और भारत-नेपाल बॉर्डर ब्लॉक कर दिया था. जिससे नेपाल को काफी आर्थिक और व्यापारिक नुकसान हो रहा था. तत्कालीन नेपाली सरकार ने भारत पर इस प्रदर्शन को बढ़ावा देने का आरोप लगाया था. हालांकि, भारत ने इन आरोपों को खारिज किया. थोड़े बहुत उतार-चढ़ाव के बाद भी भारत-नेपाल के बीच रिश्ते अच्छे रहे.

यही वजह है कि भारत नेपाल में सबसे बड़े निवेशक में से एक है. रक्सौल और काठमांडू के बीच रेल लिंक के निर्माण के साथ ही भारत ने नेपाल के ऊर्जा और शिक्षा क्षेत्र में भारी निवेश किया है. इतना निवेश तो चीन ने भी अब तक नहीं किया. लेकिन, अगर नेपाल की मौजूदा स्थिति पर गौर करें, तो ये वास्तविकता है कि नेपाल को अब भारत पर अपनी निर्भरता कम करने की जरूरत है.

वहीं, अगर चीन काठमांडू में सड़क बना देता है और भारत बिहार के रक्सौल से नेपाली की राजधानी तक रेल लिंक शुरू करवा देता है, तो नेपाल की स्थिति मजबूत हो जाएगी. आने वाले दिनों में नेपाल भारत-चीन के बीच एक लिंक के तौर पर उभरेगा. नेपाल सरकार के सूत्रों के मुताबिक, 'हम सिर्फ 3 करोड़ आबादी वाले देश हैं. चीन स्टैंड अलोन मार्केट के तौर पर नेपाल में दिलचस्पी नहीं रखता. चीन भारत के यूपी बिहार राज्यों में ज्यादा दिलचस्पी रखता है, जो चीनी सामान के लिए बड़े बाजार हैं.

30 करोड़ की कुल आबादी के साथ यूपी-बिहार की जनसंख्या नेपाल से 10 गुना ज्यादा है. ट्रांस-हिमालयन कनेक्टिविटी नेटवर्क बनने पर तिब्बत से यूपी-बिहार को सीधा लिंक करेगा. ऐसे में नेपाल सरकार को उम्मीद है कि इस लिंक से उसे व्यापारिक फायदा होगा. यही वजह है कि नेपाल आने वाले समय में भारत-चीन के साथ त्रिपक्षीय समझौते करने की इच्छा रखता है.


kp sharma
पीएम मोदी तीन बार नेपाल का दौरा कर चुके हैं.


केपी शर्मा ओली सरकार के प्रतिनिधि बताते हैं कि उनकी सरकार बनने के बाद पीएम ऑफिस महज ऑफिस नहीं रहा. ओली के नेतृत्व में नेपाल की विदेश नीति बदली है. अब नेपाल एशिया के दो महाशक्तियों चीन और भारत के बीच बेहत तालमेल बिठा पा रहा है. बता दें कि नेपाल में 2008 में राज-तंत्र खत्म होने के बाद दो कार्यकाल पूरा करने के साथ ही केपी शर्मा ओली नेपाल के ऐसे पीएम बन गए हैं, जिनका सबसे ज्यादा कार्यकाल रहा.

नेपाल सरकार में ऊर्जा मंत्रालय के प्रेस को-ऑर्डिनेटर रोशन खाड़का बताते हैं, 'हमारी सरकार दुनियाभर के देशों के साथ मजबूत संबंध बनाने में जुटी है. कई राष्ट्राध्यक्षों के साथ हमने द्विपक्षीय वार्ता की हैं. इनमें अमेरिका, जापान और फ्रांस भी शामिल हैं. हमारे विदेश मंत्री ने हाल ही में यूएस सेक्रेटरी माइक पोम्पियो के साथ एक सफल द्विपक्षीय बैठक की.' रोशन आगे कहते हैं, 'नेपाल अब अपनी जरूरतों के लिए किसी एक देश पर निर्भर होकर नहीं रहना चाहता. हम आगे बढ़ना चाहते हैं. बाकी देशों के साथ भी रिश्ते बेहतर करना चाहते हैं. अभी हमारे चीन और भारत के साथ मजबूत और खास रिश्ते हैं. पड़ोसी होने के नाते ये दोनों हमेशा हमारे करीबी रहेंगे.'

क्या नेपाल भारत-चीन दोनों को एक ही पैमाने पर रख रहा है? इस सवाल के जवाब में खाड़का बताते हैं, 'नेपाल के साथ चीन के करीबी संबंध होने का मतलब ये बिल्कुल भी नहीं है कि भारत-नेपाल के रिश्ते कमजोर हो गए हैं. बेशक 2015 में भारत-नेपाल के बीच कुछ तनाव जरूर हुआ था, लेकिन दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने रिश्तों को सुधारने कि दिशा में काफी मेहनत की. इसका नतीजा है कि नेपाल एक स्वतंत्र, संप्रभु राष्ट्र बनने की तरफ बढ़ रहा है.'

ये भी पढ़ें:- FATF की बैठक जारी, पाकिस्तान के ब्लैकलिस्ट होने से बचने के लिए ये 3 दोस्त बन सकते हैं मददगार

अपना घर संभलता नहीं... और इमरान खान ईरान-सऊदी के बीच का तनाव कम करने पहुंचे तेहरान

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए दुनिया से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: October 14, 2019, 11:20 AM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...