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पाकिस्‍तान में क्‍यों सुर्खियों में है 'नेकी की टोकरी', जानिए क्‍या है मामला

पाकिस्‍तान में क्‍यों सुर्खियों में है 'नेकी की टोकरी', जानिए क्‍या है मामला

इसका मकसद यह है कि भूख से बेहाल लोग इसे बिना कीमत अदा किए अपने घर ले जा सकें.

इसका मकसद यह है कि भूख से बेहाल लोग इसे बिना कीमत अदा किए अपने घर ले जा सकें.

अगर रोटियों की संख्या में वृद्धि होती है, तो होटल की तरफ से इन्‍हें बेच दिया जाता है और इसके रुपये अपने पास रख लिए जाते हैं. मगर अगले दिन टोकरी में रोटियां वापस रखने के लिए इन रुपयों का इस्‍तेमाल किया जाता है.

    इस्‍लामाबाद. पाकिस्‍तान (Pakistan) की राजधानी इस्लामाबाद (Islamabad) के बनी गाला (Bani Gala) इलाके के रहने वाले डॉ. मुहम्मद अखलाक कशफी ने इलाके के विभिन्न होटलों पर 'नेकी की टोकरी' रखी है, जिसमें अपनी हैसियत के मुताबिक अन्‍य लोग भी रोटियां लेकर रखते जाते हैं. इसका मकसद यह है कि भूख से बेहाल लोग इसे बिना कीमत अदा किए अपने घर ले जा सकें.

    डॉ. अखलाक का कहना है कि वह 20 साल से बनी गाला (Bani Gala) में रह रहे हैं. उन्होंने एक चैरिटी सेंटर स्थापित किया है और पिछले सात वर्षों से अपनी हैसियत के मुताबिक नेक काम कर रहे हैं. नेकी की टोकरी के बारे में वह कहते हैं कि 'मैंने तुर्की का एक ऐतिहासिक वीडियो देखा था. इसमें नेकी की टोकरी थी. मुझे यह विचार पसंद आया और मैंने इस पर काम करना शुरू कर दिया.'

    तुर्की की सबसे पुरानी परंपराओं में से एक है 'नेकी की टोकरी'
    उन्होंने कहा कि उन्होंने होटल के लोगों से कहा कि वे सामान लाएंगे और पैसे भी देंगे, बस अल्लाह के नाम पर शुरू करें और जब कोई गरीब व्यक्ति रोटी लेने के लिए आए, तो मना न करें. उसे जितनी ही रोटी चाहिए, उसे दे दें. अगर टोकरी में रोटी न हो, तो इसे मेरे खाते में लिख लें और उसे दे दें. डॉ. अखलाक के अनुसार 'अब तक होटल में किसी ने भी मुझे बिल नहीं दिया है. उनके पास अभी भी हमारे पैसे हैं, क्योंकि दूसरे लोग पैसा देते रहते हैं और टोकरी में रोटी बढ़ रही है. मैंने अपने सभी दोस्तों को इस अच्छे काम में भाग लेने के लिए कहा, जिस पर कई दोस्तों ने यह जिम्मेदारी ली है. पहले हम केवल रोटी दे रहे थे लेकिन अब हम रोटी के साथ करी भी प्रदान कर रहे हैं. न केवल गणमान्य व्यक्ति, बल्कि होटल के मालिक भी नेकी की टोकरी में योगदान दे रहे हैं.

    'इंडीपेंडेंट उर्दू' की खबर के हवाले से बताया गया है कि अगर रोटियों की संख्या में वृद्धि होती है, तो होटल की तरफ से इन्‍हें बेच दिया जाता है और इसके रुपये अपने पास रख लिए जाते हैं. मगर अगले दिन टोकरी में रोटियां वापस रखने के लिए इन रुपयों का इस्‍तेमाल किया जाता है. बनी गाला में नेकी की टोकरियों की श्रृंखला शुरू करने वाले डॉ. अखलाक कहते हैं कि इसमें कोई विशेष लागत नहीं है. अल्हम्दुलिल्लाह, काम बहुत अच्छा चल रहा है. अभी तक कोई शिकायत नहीं हुई है कि किसी ने बहुत ज्यादा रोटी ली हो. गौरतलब है कि तुर्की की सबसे पुरानी परंपराओं में से एक 'नेकी की टोकरी' है, जिसके तहत प्रत्येक होटल पर यह टोकरी रखी जाती थी और अपनी हैसियत के मुताबिक लोग उनमें रोटी और अन्य खाद्य सामग्री डालते थे. इस अच्छी परंपरा के कारण बहुत से जरूरतमंद लोग भोजन करते थे.

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    Tags: Islamabad, Lockdown, Pakistan

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