नेपाल ने बिना किसी सबूत के नए नक्शे को दी मंजूरी, अब डॉक्यूमेंट तलाशने के लिए बनाई टीम

नेपाल ने बिना किसी सबूत के नए नक्शे को दी मंजूरी, अब डॉक्यूमेंट तलाशने के लिए बनाई टीम
नेपाल के विदेश मंत्री प्रदीप ग्वाली नक्शा दिखाते हुए (फोटो- Ap)

Nepal New Map Controversy: कमेटी बनाने के फैसले को लेकर नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की स्थानीय मीडिया में आलोचना हो रही है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: June 14, 2020, 12:32 PM IST
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नई दिल्ली. नेपाल (Nepal) की सरकार ने देश के नए नक्शे (New Map) को मंजूरी दे दी है. शनिवार को इसे निचले सदन से पास करा लिया गया. अब इसे नेशनल असेंबली में भेजा जाएगा, जहां एक बार फिर से इस नक्शे को हरी झंडी मिलना तय है. सत्ताधारी नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के पास यहां दो तिहाई बहुमत है. नए नक्शे में नेपाल ने भारत के कई इलाके को अपना बताया है. सवाल उठता है कि क्या नेपाल के पास सबूत हैं कि वो भारत के इलाकों पर दावा ठोक सके? बिल्कुल नहीं.

अब तलाश करेंगे कागज़
दरअसल नेपाल भी ये खुद मान रहा है कि उसके पास कोई सबूत नहीं है. नए नक्शे को संसद में पास कराने के बाद नेपाल की सरकार ने एक कमेटी बनाई है. इस कमेटी से कहा गया है कि वो उन डॉक्यूमेंट्स की तलाश करे जो साबित कर सकें कि जिन इलाकों पर नेपाल ने दावा किया है ये उनका है. ये किसी भी सरकार का बड़ा ही हास्यास्पद कदम है. इस कमेटी में 9 लोगों को रखा गया है, जिसका नेतृत्व बिष्णु राज उपरेती करेंगे. वो फिलहाल सरकार के पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर हैं.

कमेटी पर महाभारत!
कमेटी बनाने के फैसले को लेकर नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की स्थानीय मीडिया में आलोचना हो रही है. वहां के कई एक्सपर्ट्स और नेताओं का कहना है कि केमिटी बनाना नेपाल के पक्ष को और कमजोर करता है. नेपाल के जाने-माने कार्टोग्राफ़र बुद्धी नारायण श्रेष्ठ ने नेपाली अखबार काठमांडू पोस्ट से बातचीत में कहा कि अगर सरकार के पास पहले से सबूत नहीं थे तो फिर आखिर क्यों झूठे दावे किए गए. वहीं पूर्व राजदूत दिनेश भट्टाराई ने कहा कि टीम बनाने का मतलब ये है कि घोड़े के आने से पहले ही आपने गाड़ी तैयार कर ली. उन्होंने कहा कि अगर अब बातचीत होती है तो फिर भारत को इसका फायदा मिल सकता है.



नक्शे पर क्या है नेपाल की दलील
संशोधित नक्शे में भारत की सीमा से लगे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा इलाकों पर दावा किया गया है. नेपाल का कहना है कि जिन इलाकों को उसने नए नक्शे में अपना हिस्सा बताया है, वहां साल 1962 तक उनका कब्जा था. उनकी दलील है कि वहां वो जनगणना करवाते थे. इसके अलावा जमीन रजिस्ट्री की लोगों को सर्टिफिकेट भी देते थे. हालांकि भारत ने नेपाल के दावों को पहले ही खारिज कर दिया है.

सुगौली संधि के तहत नेपाल के झूठे दावे
नेपाल ने दावा किया है कि सुगौली संधि के आधार पर उत्तराखंड में आने वाले तीन इलाके उसके हैं, जिस पर भारत का कब्जा है. सुगौली संधि, ईस्ट इंडिया कंपनी और नेपाल के राजा के बीच हुई एक संधि है, जिसे 1814-16 के दौरान ब्रिटेन और नेपाल के बीच हुए युद्ध के बाद हरकत में लाया गया था. इस संधि के अनुसार नेपाल के कुछ हिस्सों को ब्रिटिश भारत में शामिल करने, काठमांडू में एक ब्रिटिश प्रतिनिधि की नियुक्ति और ब्रिटेन की सैन्य सेवा में गोरखा को शामिल करने पर समझौता हुआ था.


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