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उइगर और कजाखियों पर इस कदर जुल्‍म ढा रहा चीन, जानकर कांप जाएगी रूह

News18Hindi
Updated: October 19, 2019, 1:22 PM IST
उइगर और कजाखियों पर इस कदर जुल्‍म ढा रहा चीन, जानकर कांप जाएगी रूह
चीन में उइगर मुसलमानों पर हो रह जुल्‍म की कहानी सामने आई है.

चीन (China) के एक जेल से निकली कजाखिस्‍तानी मूल की महिला ने चीन के अत्‍याचारों की कहानी बताई है. उनके अनुसार वहां रीएजुकेशनल सेंटर्स (Reeducational centre) के नाम पर जेल (Jail) बनाए गए हैं, जिनमें उइगर और कजाखी मुस्लिमों को प्रताड़ित किया जाता है.

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  • Last Updated: October 19, 2019, 1:22 PM IST
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नई दिल्‍ली. पाकिस्‍तान (Pakistan) का साथ देने वाला उसका 'सदाबहार दोस्‍त' चीन (China) अपने देश में रह रहे उइगर मुसलमानों (Uighur Muslims) और कजाखिस्‍तानी मूल के लोगों पर लगातार जुल्‍म ढा रहा है. इसे लेकर विभिन्‍न वैश्विक मंचों पर आवाज भी उठी, लेकिन इसके बाद भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है. चीन में इन लोगों को कभी भी गिरफ्तार करके खासतौर पर बनाए गए जेल में डाल दिया जाता है. वहां उनके साथ जो अत्‍याचार होता है, उसे जानकर हर कोई चौंक सकता है. चीन के एक ऐसे ही जेल से निकलकर स्‍वीडन में शरण पाई एक महिला ने वहां होने वाले अत्‍याचारों की दास्‍तां बताई है. वहीं स्‍वीडन में मौजूद चीनी दूतावास ने महिला की ओर से लगाए गए आरोपों को चीन के खिलाफ हमला बताया है.

महिला ने बताई सारी कहानी
चीन-कजाखिस्‍तान बॉर्डर पर स्थित मंगोलकुरे प्रांत की रहने वाली 43 साल की सायरागुल सॉटबे नामक महिला ने haaretz.com को दिए साक्षात्‍कार में चीन के अत्‍याचारों की पूरी कहानी बताई है. वह कजाखिस्‍तान मूल की हैं. उन्‍होंने चीन में अत्‍याचारों को झेला है और अब स्‍वीडन में बतौर शरणार्थी रह रही हैं. उन्‍होंने युवावस्‍था में मेडिकल की पढ़ाई की और उसके बाद चीन के ही एक अस्‍पताल में काम करने लगी थीं.

चीन के अत्‍याचार झेल चुकी महिला सायरागुल सॉटबे ने बताई सारी कहानी.


इसके बाद उन्‍होंने शिक्षा के क्षेत्र में कदम रखा और पांच प्री स्‍कूल की इंचार्ज बनीं. वह अपने पति और दो बच्‍चों के साथ चीन छोड़कर कजाखिस्‍तान जाना चाहती थीं. 2014 में चीनी अधिकारियों ने सरकारी कर्मचारियों के पासपोर्ट जब्‍त करने शुरू किए. लेकिन उनकी योजना में देरी हुई और 2 साल बाद उनके पति और बच्‍चे तो वहां चले गए लेकिन वह चीन में ही रह गईं.

रीएजुकेशन सेंटर्स के नाम पर खोल रखे हैं जेल
महिला के अनुसार 2016 के आखिरी में पुलिस ने रात में लोगों को गिरफ्तार करना शुरू कर दिया था. इलाके के सभी अल्‍पसंख्‍यकों के डीएनए सैंपल भी लिए गए. सड़कों पर सीसीटीवी लगे थे. एक दिन पुलिस अफसरों ने एक बैठक में घोषणा की कि जल्‍द ही इस आबादी के लिए रीएजुकेशन सेंटरों को खोला जाना है. ता‍कि क्षेत्र में स्थिति को सुधारा जा सके.
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चीन ने रीएजुकेशनल सेंटरों के नाम पर बना रखे हैं जेल. इनमें होता है अत्‍याचार.


चीनी अफसरों ने जनवरी, 2017 में उन लोगों को उठाना शुरू किया जिनके रिश्‍तेदार विदेश में रहते थे. इसी के तहत पुलिस ने सॉटबे को भी उठा लिया और उससे उसके पति और बच्‍चों के संबंध में कई महीनों तक रुक-रुक कर पूछताछ की गई. नवंबर 2017 में उसे नकाब पहनाकर रीएजुकेशन सेंटर ले जाया गया. उसे बताया गया कि उसे यहां चीनी भाषा सिखाने के लिए लाया गया है. उससे एक कागजात भी साइन कराए गए. हालांकि बाद में उन्‍हें छोड़ दिया गया और वह कजाखिस्‍तान अपने परिवार के पास पहुंच गईं.

हंसना, रोना, बात करना, सबपर थी पाबंदी
महिला के अनुसार वो रीएजुकेशन सेंटर एक जेल थी. वहां कैदियों से बात करने, हंसने, रोने और किसी के भी सवाल के जवाब देने पर पाबंदी थी. वहां हर किसी के लिए यूनिफॉर्म तय थी. सबके सिर गंजे किए गए थे. वहां के बेडरूमों की छत पर पांच कैमरे थे. 16 स्‍क्‍वायर मी‍टर के छोटे कमरे में 16 लोग रहते थे. जेल में हर जगह कैमरे से कैदियों की निगरानी होती थी. हर कमरे में टॉयलेट के लिए एक बाल्‍टी होती थी. उसे दिन में सिर्फ एक बार खाली किया जाता था. अगर वो भर जाती थी तो कैदियों को अगले दिन का इंतजार करना पड़ता था. सभी को सिर्फ सीधे हाथ की ओर करवट करके सोने की इजाजत थी.

सिखाया जाता है चीनी प्रोपैगेंडा
महिला के अनुसार जेल में कैदियों की सुबह 6 बजे होती थी. इसके बाद उन्‍हें नाश्‍ते में पानी जैसा सूप और चीनी ब्रेड दी जाती थी. नाश्‍ते के बाद कैदियों को चीनी गाने सिखाए जाते थे. इनमें 'आई लव चाइना', 'थैंक यू टू द कम्‍यूनिस्‍ट पार्टी', 'आई एम चाइनीज' और 'आई लव शी जिनपिंग' शामिल थे. महिला के अनुसार कैदियों को उनके द्वारा किए गए अपराध के लिए पश्‍चाताप कराया जाता था. उन्‍हें दो घंटे के लिए एक कागज पर सारे अपराध लिखने होते थे और उसे इंचार्ज को देना होता था. फिर चाहे उन्‍होंने कुछ किया हो या नहीं.

जेल की सैटेलाइट इमेज.


ब्‍लैक रूम में होता था टॉर्चर
महिला के अनुसार कैदियों को उनकी हर उन गलती की सजा दी जाती थी, जिनपर जेल में पांबदी थी. उन्‍हें एक कमरे में टॉर्चर किया जाता था, जिसे ब्‍लैक रूम कहा जाता था. उसमें कैदियों को दीवार पर लटकाया जाता था, मारा जाता था और बिजली के झटके दिए जाते थे. कैदियों के नाखून उखाड़ दिए जाते थे. महिला के अनुसार जो भी कैदी ब्‍लैक रूम से लौटता था, वह खून से लथपथ होता था.

महिलाओं के रेप भी होते हैं
महिला सॉटबे के अनुसार जेल में महिला और पुरुष कैदियों को जबरन दवाएं और इंजेक्‍शन दिए जाते थे. उन्‍हें कहा जाता था कि ये बीमारी से बचाव के लिए हैं. लेकिन यह एक तरह का मेडिकल एक्‍पेरीमेंट होता था. इसको खाने के बाद महिलाओं के पीरियड्स बंद हो जाते थे तो पुरुष नपुंसक हो जाते थे. जेल में महिलाओं के साथ रेप और गैंगरेप भी किए जाते थे. ऐसा वहां से निकली कई महिलाओं ने स्‍वीकारा है. सॉटबे के मुताबिक 35 साल से कम उम्र के किसी भी महिला और पुरुष का रेप हो सकता था.

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First published: October 19, 2019, 12:48 PM IST
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