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सऊदी अरब में एक बार फिर पुरुषों के कंधे से कंधा मिला कर चलने को बेताब आधी आबादी

सऊदी अरब में एक बार फिर पुरुषों के कंधे से कंधा मिला कर चलने को बेताब आधी आबादी

सऊदी महिलाओं को अब रंगमंच, खेलों आदि सार्वजनिक स्थानों समेत कार्यक्रमों में शामिल होने की अनुमति है. फोटो साभार/ट्विटर

सऊदी महिलाओं को अब रंगमंच, खेलों आदि सार्वजनिक स्थानों समेत कार्यक्रमों में शामिल होने की अनुमति है. फोटो साभार/ट्विटर

सऊदी अरब ने प्रिंस मुहम्मद के उदय के बाद से बड़े सामाजिक और आर्थिक बदलाव देखे हैं. महिलाओं को अब कार चलाने की अनुमति है.

    रियाद. सऊदी अरब (Saudi Arabia) में हाल के दिनों में सामाजिक और आर्थिक स्‍तर पर कई बदलाव देखे जा रहे हैं. ऐसे में परंपरावादी समाज में दायरों से निकल कर महिलाएं भी प्रगति की राह पर चल पड़ी हैं. इन्‍हीं में से 25 वर्षीय रूआ अल मौसा (Rouaa al-Mousa) भी हैं. उन्‍होंने 'एएफपी' को बताया कि एक बेहतर जॉब की उन्‍होंने कई वर्षों तलाश की और राज्य में इन बदलावों के बीच स्नातक किया. उन्होंने श्रम बाजार में महिलाओं की बाढ़ आते देखी है.

    उन्‍हें राजधानी रियाद (Riyad) में एक सरकारी संस्थान में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर शाम की शिफ्ट में काम करने का मौका मिला. वह 10 महिलाओं और 6 पुरुषों की एक मिली जुली टीम का हिस्सा हैं. अब जबकि कोरोनोवायरस (Corona virus) ने वैश्विक मंदी का खतरा पैदा कर दिया है और मौसा लॉकडाउन में हैं. उन्हें विश्वास है कि लॉकडाउन की इस लंबी अवधि में महिलाओं को कार्यबल में यहा रहना है. उन्होंने एएफपी को बताया, 'मैं अपनी पढ़ाई के दौरान अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना चाहती थी, ताकि मुझे शिक्षा के बाद, एक अच्‍छी जॉब मिल सके, क्योंकि यह हमारे लिए सबसे अच्छा विकल्प था, लेकिन पिछले चार वर्षों के दौरान बड़े बदलाव हुए हैं.'

    वह आगे बताती हैं कि 'मेरे लगभग सभी दोस्त अब जॉब कर रहे हैं और जब हममें से एक को नौकरी नहीं मिलती है, तो यह अजीब लगता है.' दशकों तक सऊदी अरब के परंपरावादी समाज में महिलाओं को मेहनताने के साथ जॉब के सीमित मौके ही मिले और ये भी ज्यादातर स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्रों तक ही सीमित थे. कह सकते हैं कि एक दमनकारी संरक्षकतावादी सोच ने पुरुषों को भी महिलाओं की पेशेवर इच्‍छाओं पर आपत्ति करने का अधिकार दिया.

    2016 में शुरू हुई महिलाओं को आत्‍मनिर्भर बनाने की पहल
    लेकिन इन हालात में 2016 के मध्य में बदलाव तब आया जब क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान ने राज्य की अर्थव्यवस्था में बदलाव लाने और महज तेल पर देश की आत्‍मनिर्भरता को समाप्त करने के उद्देश्य से अपना "विजन 2030" योजना की शुरुआत की. इसके तहत पर्यटन और मनोरंजन क्षेत्रों को बढ़ावा दिया गया. वहीं लाखों महिलाओं के लिए भी श्रम बाजार के दरवाजे खोलकर उन प्रतिबंधों को वापस कर दिया जो उन्हें घर पर रहने को विवश किए हुए थे. फ़ातिमा अल-दखील को महीनों बाद सऊदी शहर खोबर में एक फ्रांसीसी कंपनी में बिक्री प्रबंधक के रूप में एक बड़ा ब्रेक मिला, लेकिन कुछ ही हफ्तों बाद सऊदी अरब में कोरोना का संक्रमण फैलने लगा और इसकी रोकथाम को उठाए गए कदम के तौर पर लॉकडाउन लगा दिया गया. यहां अब तक 17 हजार से ज्‍यादा संक्रमण के मामले सामने आ चुके हैं और 139 लोगों की मौत के मामले दर्ज किए गए हैं.

    यहां महिलाएं सभी स्तरों पर पेशावर क्षेत्रों में प्रवेश कर चुकी हैं
    वहीं लंबे लॉकडाउन से निराश होने के बावजूद जबकि इसकी वजह से सैकड़ों हजारों लोग अपने कार्यालयों को छोड़ने और घर से काम करने के लिए मजबूर हुए हैं, दखील को विश्वास है कि देश भर में महिलाएं करियर बनाना जारी रखेंगी. उन्‍होंने 'एएफपी' से कहा क‍ि 'मेरी सभी सहेलियां लेबर मार्किट में शामिल हो गई हैं और पूरा विश्‍वास है कि यह संकट जल्‍दी खत्‍म होगा.' सऊदी अरब में अब बदलाव की बयार बह रही है. आज यहां महिलाएं सभी स्तरों पर पेशावर क्षेत्रों में प्रवेश कर चुकी हैं. वे बैंकर हैं, व्यवसायी हैं, वित्तीय संस्थानों की प्रमुख, सीमा पार के अधिकारी, नागरिक सुरक्षा सदस्य और जूता विक्रेता सभी कुछ हैं.

    सऊदी की 23 वर्षीय सारा अल-दोसारी ऐसी ही एक महिला हैं, जो रियाद के महिलाओं द्वारा संचालित पैनोरमा मॉल में एक कपड़े की दुकान पर काम करती हैं. आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक सऊदी अरब में कामकाजी महिलाओं की संख्या 2019 की तीसरी तिमाही में 1.03 मिलियन तक पहुंच गई, जो कुल कार्यबल का 35 फीसदी है. रोदीना मामौन को फाइव स्टोर के मालिक ने महिलाओं के सामान बेचने का काम सौंपा है. महिला ग्राहक जो खासतौर पर महिला सहायकों के साथ ज्‍यादा सहज महसूस करती हैं यही वजह है कि बिक्री और मुनाफे में तेजी आई है,

    'महिलाओं को सशक्त बनाने का मतलब सऊदी अरब को सशक्त बनाना'
    सऊदी अरब ने प्रिंस मुहम्मद के उदय के बाद से बड़े सामाजिक और आर्थिक बदलाव देखे हैं. महिलाओं को अब कार चलाने की अनुमति है, सिनेमाघरों को फिर से खोल दिया गया है और महिलाओं को रंगमंच, खेलों आदि सार्वजनिक स्थानों समेत कार्यक्रमों में शामिल होने की अनुमति है. हालांकि उनके इन कदमों की आलोचना भी होती रही है. संबा फाइनेंशियल ग्रुप की सीईओ पहली सऊदी महिला रानिया नशर कहती हैं कि 'महिलाओं को सशक्त बनाने का मतलब है, सऊदी अरब को सशक्त बनाना. सऊदी महिलाएं अपने देश की प्रगति में अहम भूमिका निभाने में अग्रसर हैं.'

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    Tags: Corona, Saudi arabia, Women

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