दुनिया की 3 फार्मा कंपनियां कोरोना से जंग में अहम योगदान को तैयार, दुनिया को देंगी 1 अरब 30 करोड़ वैक्सीन

दुनिया की 3 फार्मा कम्पनियां 1.3 बिलियन वैक्सीन साल के अंत तक देंगी.

दुनिया की 3 फार्मा कम्पनियां 1.3 बिलियन वैक्सीन साल के अंत तक देंगी.

कोरोना महामारी इंसानियत पर एक बड़ा कहर बनकर टूटी है. ऐसे में पूरी दुनिया एक साथ इस आपदा का सामना करने में जुटी हुई है. इसी सिलसिले में ग्लोबल हेल्थ समिट के दौरान दुनिया की 3 बड़ी फार्मास्युटिकल कंपनियों ने दुनिया को साल के अंत तक 1.3 बिलियन कोरोना वैक्सीन मुहैया कराने की जिम्मेदारी उठाई है.

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रोम. दुनिया की मशहूर फार्मास्युटिकल कंपनियां - फाइज़र, मॉडेर्ना और जॉनसन एंड जॉनसन ने संकल्प लिया है कि वो कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में अपना फायदा देखे बिना लो और मिडिल इनकम वाले देशों की मदद करेंगी. उन्होंने ग्लोबल हेल्थ समिट के दौरान रोम में कहा कि वे इन देशों को साल 2021 में ही करीब 1.3 बिलियन यानि 1 अरब 30 करोड़ कोविड-19 वैक्सीन की खुराक बिना किसी मुनाफे के मुहैया कराएंगी.

शुक्रवार को इटली में आयोजित इस समिट के दौरान कोविड-19 वैक्सीन के उत्पादन को बढ़ाने को लेकर चर्चा की गई. इस दौरान प्राइवेट और पब्लिक सेक्टर्स के मिलकर काम करने पर भी जोर दिया गया, ताकि जल्द से जल्द लोगों तक वैक्सीन उचित दाम पर पहुंच सके. दुनिया की जानी मानी 3 फार्मास्युटिकल कंपनियों- फाइज़र, मॉडेर्ना और जॉनसन एंड जॉनसन ने इस दौरान लो और मिडिल इनकम वाले देशों की मदद के लिए हाथ बढ़ाया है.

कौन देगा कितनी वैक्सीन?

बिना मुनाफे के वैक्सीन देने के वादे के साथ फाइज़र कुल 1 अरब वैक्सीन इन देशों को देगा. जॉनसन एंड जॉनसन की ओर से 200 मिलियन और मॉडेर्ना की ओर से 100 मिलियन वैक्सीन की खुराक इन देशों को दी जाएगी. इनमें से ज्यादातर वैक्सीन की खुराक WHO की COVAX सुविधा के तहत वितरित की जाएंगी.
यूरोपियन यूनियन भी आया आगे

इसके अलावा यूरोपियन यूनियन ने भी कोरोना के खिलाफ दुनिया की जंग में 100 मिलियन वैक्सीन की खुराक लो और मिडिल इनकम वाले देशों को दान करने का फैसला किया है. ये वैक्सीन इस साल के अंत तक इन देशों को दे दी जाएंगी. ये जानकारी यूरोपियन कमीशन के अध्यक्ष उर्सुला वॉन देर लेयन ने दी. इटली के राजदूत ने कहा कि महामारी ने हमें अंतरराष्ट्रीय सहयोग का महत्व समझा दिया है और इसी के जरिये वर्तमान और भविष्य के स्वास्थ्य संकट से निपटा जा सकेगा. उन्होंने कहा कि यही रोम घोषणा पत्र की आत्मा है कि हम न सिर्फ महामारी बल्कि असमानताओं और जलवायु परिवर्तन को लेकर भी सहयोगात्मक रवैया दिखाएं.

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