जिनपिंग के आदेश के बाद अब तिब्बत में पढ़ाया जाएगा चीन का पाठ्यक्रम

जिनपिंग के आदेश के बाद अब तिब्बत में पढ़ाया जाएगा चीन का पाठ्यक्रम
चीन ने तिब्बत के स्कूलों में नया पाठ्यक्रम लागू किया.

China in Tibet: चीनी राष्ट्रपति के आह्वान के बाद बिना देरी करते हुए चीनी अधिकारियों ने तिब्बत के स्कूलों में चीन की महानता बखान करने वाला एक अध्याय पाठ्यक्रम में शामिल कर दिया है. चीन का मानना है कि अब तिब्बत के बौद्ध धर्म का चीनीकरण हो जाना चाहिए.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 31, 2020, 5:12 PM IST
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बीजिंग. चीनी (China) राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi jinping) के तिब्बत (Tibet) को लेकर किये गए आह्वान के बाद चीनी प्रशासन ने नए कदम उठाना शुरू कर दिया है. तिब्बत की किलेबंदी की शुरुआत चीन ने स्कूलों में चीन से जुड़ाव वाला पाठ्यक्रम पढ़ाया जाना शुरू करके की है. चीनी अधिकारियों का मानना है कि इससे तिब्बत के लोगों में चीन के प्रति सोच और धारणा में बदलाव लाया जा सकेगा.

राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बीते दिनों कहा, तिब्बत को चीन की राष्ट्रीय एकता से जोड़ा जाए जिससे वे अलगाववाद के खिलाफ खुद खड़े हों. जिनपिंग तिब्बत की जिस सोच में बदलाव की बात कह रहे हैं, वह वहां की सांस्कृतिक पहचान में बदलाव की बात है. शी ने पार्टी कार्यक्रम में कहा, तिब्बत के स्कूलों में राजनीतिक और विचारधारा वाली शिक्षा दी जाए जिससे उनमें पढ़ने वाले छात्र चीन के साथ जुड़ाव महसूस करें. उनके हृदय में चीन के लिए प्यार की भावना उमड़े. इससे आधुनिक, संपन्न, खूबसूरत, शांत और भाईचारे वाले तिब्बत का निर्माण होगा. जिनपिंग ने इस सबके लिए तिब्बत में कम्युनिस्ट पार्टी को मजबूत करने पर भी जोर दिया. कहा, पार्टी जब वहां पर अपना काम बढ़ाएगी, तब लोग खुद ब खुद उसकी विचारधारा से जुड़ते चले जाएंगे.





दलाई लामा ने साधा निशाना
उधर भारत में निर्वासित जीवन व्यतीत कर रहे तिब्बत के आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा इसे सांस्कृतिक नरसंहार कहा है. वह कहते हैं कि चीन तिब्बत की पहचान बदलने पर आमादा है. वह तिब्बतियों को उनकी पहचान से दूर कर देना चाहता है जिससे वे मानसिक रूप से चीन के गुलाम बन जाएं. जिनपिंग तिब्बत को एक 'नया आधुनिक समाजवादी' क्षेत्र बनाने, वहां अलगाववाद के खिलाफ एक 'अभेद्य दीवार' का निर्माण करने और तिब्बती बौद्ध धर्म का 'सिनीकरण' करने का आह्वान किया है.

शिन्हुआ समाचार एजेंसी के अनुसार ‘तिब्बत वर्क’ पर सातवें केंद्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए शी ने कहा कि ऐसे तिब्बत का निर्माण करने के प्रयास किए जाने चाहिए जो संयुक्त, संपन्न, सांस्कृतिक रूप से उन्नत, समरसता से पूर्ण और सुंदर हो. नए दौर में तिब्बत पर शासन करने की चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की नीतियों को पूर्ण रूप से लागू करने की आवश्यकता को रेखांकित करते हुए शी ने विस्तार से दिए गए अपने भाषण में कहा कि “नए आधुनिक समाजवादी” तिब्बत के निर्माण के लिए प्रयास किए जाने चाहिए. सिनीकरण का अर्थ है गैर चीनी समुदायों को चीनी संस्कृति के अधीन लाना और इसके बाद समाजवाद की अवधारणा के साथ चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की राजनीतिक व्यवस्था उस पर लागू करना.

चीन के विदेश मंत्री ने मानवाधिकार चिंताओं को किया खारिज
उधर चीन के विदेश मंत्री ने रविवार को शिनजियांग के हिरासत केन्द्रों और हांगकांग के नए सुरक्षा कानून का बचाव करते हुए यूरोपीय देशों की ओर से जतायी जा रही मानवाधिकारों की चिंताओं को खारिज कर दिया है. विदेश मंत्री वांग यी ने वैश्विक महामारी फैलने के बाद अपने पहले यूरोपीय दौरे पर वैश्विक स्वास्थ्य तथा आर्थिक संकट के कारण फीके पड़े व्यापार और संबंधों को दोबारा बहाल करने की अपील की.

वांग ने पेरिस में रविवार को दावा किया कि शिनजियांग में जिन लोगों को शिक्षा केन्द्रों में भेजा गया था, उन्हें रिहा कर दिया गया है और उन्हें नौकरी भी मिल गई है. जबकि मानवाधिकार समूहों और उनके परिजन लगातार उइगुर मुसलमानों को हिरासत में लिए जाने और उनके प्रियजनों से कोई सम्पर्क ना होने की शिकायत कर रहे हैं. वांग ने 'फ्रेंच इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल रिलेशन्स' में एक सम्मेलन में कहा, 'शिक्षा एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत सभी प्रशिक्षुओं के अधिकार सुरक्षित हैं..वे सभी अब स्नातक हैं और शिक्षा एवं प्रशिक्षण केन्द्र में अब कोई नहीं है. उन सभी को नौकरी मिल गई है.'
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