सुहागन होने के बावजूद सूनी थी इन दुल्‍हनों की मांग, अब भर पाएंगी चुटकीभर सिंदूर

इलाके के आदिम जनजाति समाज की कई महिलाएं ऐसी हैं जो सिंदुर के इंतजार में वृद्ध हो कर मर तक जाती हैं, पर समाज बिना भोज के उन्हें पत्नी की मान्यता नहीं देता. कई बार परिजन, बेटे-बेटी, पोते-पोती मृत्यु शैय्या पर लेटी महिला को जीते जी खुशी देने के लिए जैसे तैसे पैसे जुटा कर भोज का इंतजाम करता है. तब मृत्यु शैय्या पर ही चुटकी भर सिंदुर लगा कर जीवन साथी उसे विवाहित घोषित कर पाता है.

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