मजदूर पिता को है उम्मीद कि पढ़-लिखकर उसकी पोलियोग्रस्त बेटी खड़ी होगी अपने पांव पर- See Photos

जमुई. जो लोग वाकई अपनी बेटी को पढ़ाना और बढ़ाना चाहते हैं, उन्हें किसी रिश्ते-नाते की मदद या किसी वाद या नारे की प्रेरणा की दरकार नहीं पड़ती. मानसिक रूप से विकलांग हो रहे समाज में एक मजदूर पिता रोज अपनी दिव्यांग बेटी को गोद में उठाए परीक्षा केंद्र तक पहुंचता है. वहीं बैठकर परीक्षा खत्म होने का इंतजार करता है और फिर अपनी दिव्यांग बेटी को गोद में उठाए चुपचाप पूरी दृढ़ता से घर लौट आता है. यह नजारा जमुई का है. यह मजदूर पिता अपनी दिव्यांग बेटी के सुनहरे भविष्य को लेकर आश्वस्त है. उसने अपने अनुभवों से जाना है - पढ़ेगी बेटी तो बढ़ेगी बेटी. पेश है इस परीक्षा केंद्र के बाहर सबसे इज्जत और सम्मान बटोर रहे इस मजदूर पिता और उसकी मजबूत बेटी की कहानी. रिपोर्ट : केसी कुंदन.

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