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किसानों की घर वापसी: अब कुछ ऐसा दिख रहा है टिकरी-सिंघु और गाजीपुर बॉर्डर का नजारा

Kisan Andolan: केंद्र सरकार द्वारा तीन नए कृषि कानूनों (Farm Laws) की वापसी के ऐलान के बाद पिछले एक साल चल रहा किसान आंदोलन खत्‍म हो गया है. इसके साथ शनिवार सुबह से दिल्‍ली के टिकरी, सिंघु और यूपी-गाजीपुर बॉर्डर से किसानों अपने-अपने घर लौटने का जो सिलसिला शुरू हुआ वह रविवार को भी जारी है. इस दौरान कई जगह जश्‍न देखने को मिला. वहीं, कल तक जहां रोड और हाईवे नजर नहीं आते थे, वहां अब सबकुछ साफ दिख रहा है.

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संयुक्त किसान मोर्चा (Samyukta Kisan Morcha) द्वारा किसान आंदोलन (Kisan Andolan) को स्थगित करने की घोषणा के बाद टिकरी बॉर्डर, सिंघु बॉर्डर और गाजीपुर बॉर्डर से प्रदर्शनकारियों की अपने घरों के लिए रवानी तेज हो गई है. वहीं, किसानों के द्वारा अपने टेंट और तंबू हटाने के कारण रोड और हाईवे नजर आने लगे हैं.

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संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा आंदोलन को स्थगित करने की घोषणा के किसान घर वापसी कर रहे हैं. गाजीपुर, टिकरी और सिंघू बॉर्डर से भी किसान अपने घर की ओर लौट रहे हैं. किसानों के मुताबिक, आंदोलन स्थल पूरी तरह से खाली होने में तीन से चार दिन का समय लगेगा. ऐसे में आंदोलन स्थल पर अंतिम दिन तक लंगर की सुविधा जारी रहेगी.

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सफल आंदोलन के बाद पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों में किसानों के अपने घरों के लिए रवाना होने के साथ ही भावनाएं उत्साह बनकर उमड़ने लगीं. रंग-बिरंगी रोशनी से सजे ट्रैक्टर जीत के गीत गाते हुए विरोध स्थलों से निकलने लगे और रंगीन पगड़ियां बांधे बुजुर्ग युवाओं के साथ नृत्य करते नजर आए.

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भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा कि शनिवार से किसानों का जाना शुरू हो गया है, उम्मीद है कि सभी लोग 15 दिसंबर तक पूर्ण रूप से चले जाएंगे. आगे की क्या रणनीति रहेगी? इसके लिए 15 जनवरी को संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक होगी. बता दें कि संयुक्त किसान मोर्चा ने 11 दिसंबर से प्रदर्शन स्थल खाली करने की घोषणा की थी.

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इससे पहले टिकैत ने कहा था कि वे महापंचायतों का आयोजन बंद नहीं करेंगे. किसानों के मुद्दों पर चर्चा के लिए समय-समय पर महापंचायत का आयोजन होगा. अधिकांश किसान शनिवार को दिल्ली की सीमा को छोड़कर अपने घरों को लौट गए हैं और बाकी आने वाले दिनों चले जाएंगे, लेकिन मैं 15 दिसंबर को जाऊंगा.

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पंजाब के मोगा निवासी किसान कुलजीत सिह ओलाख ने घर लौटने को उत्सुक अपने साथी किसानों के साथ सफर शुरू करने से पहले कहा, 'सिंघू बॉर्डर पिछले एक साल से हमारा घर बन गया था. इस आंदोलन ने हमें (किसानों को) एकजुट किया, क्योंकि हमने विभिन्न जातियों, पंथों और धर्मों के बावजूद काले कृषि कानूनों के खिलाफ एक साथ लड़ाई लड़ी. यह एक ऐतिहासिक क्षण है और आंदोलन का विजयी परिणाम और भी बड़ा है.'

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संयुक्त किसान मोर्चा के मुख्यालय पर शनिवार को काफी कम लोग नजर आए तो रविवार को यह वीरान नजर आ रहा है.

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वैसे राष्ट्रीय राजमार्गों पर टॉल प्लाजा और अन्य स्थलों पर किसानों के स्वागत की तैयारियां की गई हैं.

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वहीं, किसान आंदोलन का हिस्‍सा रहे स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेंद्र यादव ने चार हिंदू ‘धामों’ (पवित्र स्थलों) की तुलना चार सीमा विरोध स्थलों -टिकरी, सिंघू, गाजीपुर और शाहजहांपुर (दिल्ली-जयपुर सीमा) से करते हुए कहा कि अब हम नहीं बोलेंगे लेकिन किताबें और इतिहास बोलेगा. यह पूरा देश बोलेगा. आज सिर्फ यह याद रखने का दिन है कि पिछले एक साल से हमारे देश में ‘चार धाम’ का अर्थ बदल गया है. वहीं, उन्‍होंने कहा, ‘महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु के लोग आते थे और कहते थे कि वे चार स्थानों की यात्रा करना चाहते हैं.'

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बता दें कि मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के किसान तीन केंद्रीय कृषि कानूनों के विरोध में और इन कानूनों को वापस लिये जाने की मांग को लेकर पिछले साल 26 नवंबर को बड़ी संख्या में दिल्‍ली के बॉर्डरों पर जमा हुए थे.

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    किसानों की घर वापसी: अब कुछ ऐसा दिख रहा है टिकरी-सिंघु और गाजीपुर बॉर्डर का नजारा

    संयुक्त किसान मोर्चा (Samyukta Kisan Morcha) द्वारा किसान आंदोलन (Kisan Andolan) को स्थगित करने की घोषणा के बाद टिकरी बॉर्डर, सिंघु बॉर्डर और गाजीपुर बॉर्डर से प्रदर्शनकारियों की अपने घरों के लिए रवानी तेज हो गई है. वहीं, किसानों के द्वारा अपने टेंट और तंबू हटाने के कारण रोड और हाईवे नजर आने लगे हैं.

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