दिवाली के लिए कड़ी मेहनत के बाद भी अंधेरे में रह जाते हैं दीए बनाने वाले कुम्हार, लागत भी नहीं निकाल पा रहे

Diwali 2021: दीए बनाने वाले कुम्हारों का कहना है कि पहले मिट्टी के दीए ही जलाए जाते थे, जिससे दीपावली के समय आने वाले कीट भी समाप्त हो जाते थे, आंखों की रोशनी भी बढ़ती थी. लेकिन आज के समय में इनका स्थान चाइनीज सामान ने ले लिया है. हम परंपरागत यही काम करते हैं तो इसे छोड़ भी नहीं सकते हैं, लेकिन सामान खरीदने के लिए बहुत ही कम लोग आ रहे हैं.

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