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पाकिस्तान में हिंदुओं की वो हवेलियां, जिनकी शानोशौकत हैरान करने वाली है

भले ही बंटवारे के दौरान बड़े पैमाने पर हिंदुओं ने पाकिस्तान को छोड़ दिया है लेकिन उनकी भव्य हवेलियां अब भी हैरान करती हैं और बताती हैं कि वो लोग वहां कितनी शानोशौकत के साथ रहते थे. इन कोठियों में ना केवल भव्य वास्तुकला की झलक है बल्कि उनकी समृद्ध जीवनशैली की बानगी भी. ये हवेलियां अब भी पाकिस्तान में जगह जगह हैं और बताती हैं कि कभी हिंदू यहां कितना शानदार जीवन गुजारते थे.

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भारत-पाकिस्तान तनाव भले ही अपनी जगह हो लेकिन ये भी सच है कि दोनों ही देश अब तक एक-दूसरे की विरासत को सहेजे हुए हैं. मिसाल के तौर पर पाकिस्तान को ही लें तो वहां अब भी कुछ बेहद खूबसूरत इमारतें हिंदू इतिहास रखती हैं. खासकर पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के पोतोहार इलाके में अब भी कई हवेलियां हैं, जहां न केवल हिंदू मालिक होते थे, बल्कि इनकी वास्तुकला पर भी हिंदुओं की कुछ खास शैलियां दिखती हैं. इनमें से कुछ हवेलियां खाली पड़ी हुई हैं, जबकि कुछ में अब भी इक्का-दुक्का बाशिंदे हैं. जानिए, पाकिस्तान की हिंदू हवेलियों के बारे में. (Photo-dawn)

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पोतोहार में हवेलियों की भरमार है. बता दें कि हवेली एक पर्शियन शब्द है, जिसका अर्थ है अपने में खूब फैला और विशाल भवन. ये आमतौर पर संभ्रांत वर्ग के लोगों का आवास हुआ करता था. पोतोहार की इन्हीं हवेलियों में से एक है खेम सिंह बेदी हवेली. अविभाजित भारत के रावलपिंडी में जन्मे खेम सिंह बेदी के नाम पर ये हवेली है. बेदी के बारे में सबसे खास बात ये है कि वे खुद को सिख गुरु नानक देव का वंशज बताते थे. उस दौर में काफी पढ़े लिखे बेदी की हवेली भी काफी विशालकाय और हिंदू और अंग्रेजी वास्तुकला लिए हुए है. (Photo-dawn)

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दौलताना शहर में भी हिंदू हवेलियां हैं. इनमें आत्म सिंह गुजराल और जीवन सिंह हवेलियां मुख्य हैं. इन हवेलियों के पलस्तर उखड़े होने के बाद भी दीवारें आज तक मजबूती से खड़ी हैं. हवेलियों के प्रवेश द्वार पर हवेली मालिक का नाम अंग्रेजी और ऊर्दू में खुदा दिखता है. इस शहर के अलावा गुलायाना और डोरा बादल गांवों में भी कई-एक हिंदू हवेलियां हैं. (Photo-dawn)

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हवेलियों का वास्तु वैसे तो अलग-अलग तरह का है लेकिन सबमें एक बात आम है. इनमें लकड़ियों से बने काफी विशाल झरोखे हैं. लकड़ियों पर नक्काशी या भी पेंटिंग की हुई है, जो हवेली के रहने वालों की जीवनशैली या रुचि के अनुसार रही होगी. वैसे झरोखे बनाने में वास्तुविदों की राय भी अहम रहती होगी. झरोखे सिर्फ पुरुष सदस्यों के लिए होते थे. महिलाओं का इनसे झांकना मना होता था. (Photo-dawn)

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झरोखे के अलावा हवेली की ऊपरी मंजिल पर बालकनी होती थी, जो मर्द-औरत दोनों ही इस्तेमाल करते रहे होंगे. बता दें कि पुराने समय में लगभग सभी समुदायों में पुरुषों और औरतों के लिए मिलने-जुलने की जगह अलग होती है, लेकिन घरों के ऊपरी हिस्से आमतौर पर दोनों के लिए ही होते थे. ऐसा इसलिए था कि ऊपरी हिस्से तक पहुंच केवल घर के सदस्यों की ही होती थी. (Photo-dawn)

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कई हवेलियां विशाल होने के साथ-साथ काफी ऊंची भी हैं. इन्हीं में से एक है बख्शी राम हवेली. वो इस तरह से डिजाइन की गई थी कि ऊपर चढ़ने पर सारे गांव या शहर का नजारा आसानी से दिख सके. ये केवल सुरक्षा के इरादे से ही नहीं, बल्कि मौसम का आनंद लेने के लिए भी तैयार की जाती रही होंगी. (Photo-dawn)

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इसी तरह से कलार सैदान में एक हवेली हुआ करती थी- खेम सिंह बेदी हवेली. इसे भारत-पाक विभाजन के बाद स्कूल में बदल दिया गया. हालांकि स्कूल बनने के बाद भी इसकी इमारत और स्थापत्य से कोई छेड़छाड़ नहीं की गई. स्कूल के कमरों में सिख गुरुओं के अलावा हिंदू देवी-देवताओं की तस्वीरें हैं. साथ ही सिख महिलाओं को श्रृंगार करते दिखाया गया है. (Photo-dawn)

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पाकिस्तान के पोतोहार में टूरिज्म की काफी संभावना के बाद भी इसपर खास ध्यान नहीं दिया गया और ज्यादातर हवेलियां मौसमों की मार झेलते खड़ी हैं. पोतोहार में सैलानियों के लिए देखने की एकमात्र जगह फिलहाल कटस राज मंदिर बताए जाते हैं. मंदिरों की इस कतार को किला कटस भी कहते हैं. यहां एक तालाब भी है. कहा जाता है कि ये तालाब भगवान शिव के आंसुओं से बना है, जो उन्होंने अपनी पत्नी सती की मौत पर बहाए थे. (Photo-dawn)

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    पाकिस्तान में हिंदुओं की वो हवेलियां, जिनकी शानोशौकत हैरान करने वाली है

    भारत-पाकिस्तान तनाव भले ही अपनी जगह हो लेकिन ये भी सच है कि दोनों ही देश अब तक एक-दूसरे की विरासत को सहेजे हुए हैं. मिसाल के तौर पर पाकिस्तान को ही लें तो वहां अब भी कुछ बेहद खूबसूरत इमारतें हिंदू इतिहास रखती हैं. खासकर पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के पोतोहार इलाके में अब भी कई हवेलियां हैं, जहां न केवल हिंदू मालिक होते थे, बल्कि इनकी वास्तुकला पर भी हिंदुओं की कुछ खास शैलियां दिखती हैं. इनमें से कुछ हवेलियां खाली पड़ी हुई हैं, जबकि कुछ में अब भी इक्का-दुक्का बाशिंदे हैं. जानिए, पाकिस्तान की हिंदू हवेलियों के बारे में. (Photo-dawn)

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